Janmashtami Celebration 2018
ज्योतिषियों की नजर में मनपसंद डिलीवरी गलत है, नवजात में कोई न कोई कमी मिलेगी
मेडिकल साइंस जैसे विषयों पर रिसर्च करने वाले ज्योतिषाचार्य राजीव नारायण शर्मा मनपसंद डिलीवरी डेट को ठीक नहीं मानते हैं। उनका कहना है कि यह गलत है। प्राकृतिक नियमों के खिलाफ है। इन तरीकों से नवजातों का न तो लग्न बदला जा सकता है और न ही कोई दूसरा प्रयोजन पूरा हो सकता है। यह केवल मन का वहम है कि हमारा बच्चा जन्माष्टमी को पैदा हो या फिर रामनवमी को। समय पूर्व बच्चे के जन्म से किसी गृह आदि में बदलाव हो जाएगा, यह बात पूरी तरह अतार्किक है। इससे कुछ नहीं हो सकता। शर्मा का कहना है कि अगर गर्भकाल के प्राकृतिक चक्र से छेड़छाड़ होती है तो नवजात में अवश्य ही कोई न कोई कमी होगी। शरीर के किसी अंग की बनावट या आकार में न्यूनाधिक अंतर तो मिलेगा ही। यदि बच्चे का जन्म तय समय से पांच-छह घंटे पहले भी कराया जाता है तो सांस चलने या धड़कन आदि में कुछ न कुछ फर्क मिलेगा।
नॉमर्ल डिलीवरी के मुकाबले सिजेरियन केस बढ़ते जा रहे हैं
स्वास्थ्य विभाग की रिपोर्ट के मुताबिक, देश में नॉमर्ल डिलीवरी के मुकाबले सिजेरियन केस तेजी से बढ़ते जा रहे हैं। मनपसंद डिलीवरी डेट या दर्द नहीं सहने की बात हो, दोनों के चलते सर्जरी केस अधिक देखने को मिल रहे हैं।
तमिलनाडु में 2006 के दौरान सर्जरी से डिलीवरी कराने का प्रतिशत 20.3 था, 2016 में वह 34 प्रतिशत हो गया है, गोवा में 25 से 31 प्रतिशत, मणिपुर में 9 से 21, असम में 5.3 से 13.4 और ओडिसा में 5.1 से 13.8 प्रतिशत पहुंच गया है। प्राइवेट अस्पतालों में सर्जरी दर 54 प्रतिशत तो सरकारी अस्पतालों में यह दर 23.7 प्रतिशत है। त्रिपुरा के प्राइवेट हॉस्पिटलों में सर्जरी से डिलीवरी कराने का प्रतिशत 74 है, जबकि सरकारी अस्पतालों में यह प्रतिशत महज 18 है। पश्चिम बंगाल के निजी चिकित्सा संस्थानों में 70.9 प्रतिशत केस सर्जरी से डिलीवरी कराने के आते हैं तो वहीं सरकारी अस्पतालों में यह दर 18.8 प्रतिशत है।