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महिला आरक्षण कार्ड खेलने की तैयारी में राहुल, पंजाब समेत कांग्रेस शासित राज्यों को लिखा पत्र

Sun, 09 Dec 2018 10:06 PM IST
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
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राहुल गांधी - फोटो : Facebook
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पांच राज्यों के विधानसभा चुनावों में अपनी पार्टी की सफलता से उत्साहित कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी ने अब लोकसभा चुनावों को ध्यान में रखकर एक नई रणनीति अपनाने की तैयारी की है। लोकसभा चुनावों में महिला मतदाताओं को आकर्षित करने के लिए राहुल ने महिला आरक्षण बिल का मुद्दा गरमाने का निर्णय लिया है। 

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कांग्रेस अध्यक्ष ने पंजाब के मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह समेत अपने दल की सरकार वाले तीनों राज्यों की सरकारों को अपनी-अपनी विधानसभा में इस बिल के समर्थन में प्रस्ताव पारित करते हुए केंद्र सरकार को भेजने के लिए निर्देश दिए हैं। 

कांग्रेस अध्यक्ष ने तीनों राज्यों को लिखे पत्र में कहा है कि केंद्र सरकार से महिला आरक्षण बिल पारित कराने की अपील वाला प्रस्ताव अपनी-अपनी विधानसभा के अगले सत्र में पारित कराया जाए। पत्र में कहा गया है कि यूपीए शासन के दौरान 2010 में राज्यसभा ने इस संबंध में 108वां संविधान संशोधन बिल पारित कर दिया था, लेकिन यह 2014 में 15वीं लोकसभा के भंग होते ही खत्म हो गया था।
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राहुल ने पत्र में लिखा है कि कांग्रेस और अन्य दलों ने प्रधानमंत्री को महिला आरक्षण बिल पारित कराने के लिए समर्थन देने का आश्वासन दिया है। बिल के विरोधी महिलाओं की नेतृत्व और बदलाव लाने की क्षमता पर शक जता रहे हैं, लेकिन 73वें व 74वें संविधान संशोधन ऐसे लोगों को गलत साबित कर चुका है। राहुल ने पत्र में लिखा है कि महिला कांग्रेस अध्यक्ष सुष्मिता देव भी 23 नवंबर को इस बारे में अपने दल की सत्ता वाले सभी राज्यों की सरकाराें को पत्र लिख चुकी हैं।





 

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कुछ ऐसी हो सकती है रणनीति

राहुल गांधी का पत्र संसद का शीत सत्र शुरू होने से ठीक पहले आने के राजनीतिक निहितार्थ माने जा रहे हैं। संसद के मानसून सत्र से पहले भी गांधी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र गांधी को महिलाओं के प्रति अपनी प्रतिबद्धता दिखाते हुए इस बिल को पारित कराने का पत्र लिखा था।

पंजाब के अतिरिक्त इस समय पुडुचेरी और कर्नाटक में भी कांग्रेस की सरकार है। इसके अलावा हाल ही में हुए विधानसभा चुनावों के बाद सामने आए एग्जिट पोल में कांग्रेस के खाते में तीन राज्य आने की संभावना जताई जा रही है, जिनके गठन के साथ ही उनकी विधानसभा में भी ऐसा ही प्रस्ताव पारित कराया जा सकता है।

ओडिशा में बीजद और आंध्र प्रदेश में टीडीपी पहले ही अपनी-अपनी विधानसभाओं में इस संबंध में प्रस्ताव पारित कराकर केंद्र सरकार को भेज चुकी हैं। ऐसे में इस बिल के समर्थन में 8-9 राज्यों की सरकारों के प्रस्ताव पारित करा देने से केंद्र सरकार पर भी संविधान संशोधन लाने के लिए दबाव बन जाएगा।

क्या है महिला आरक्षण बिल
महिला आरक्षण बिल में लोकसभा और सभी राज्य विधानसभाओं में एक तिहाई सीटें महिला उम्मीदवारों के लिए आरक्षित करने को कहा गया है। इस बिल के पारित होते ही यह व्यवस्था लागू हो जाएगी, जिससे भारतीय राजनीति में महिलाओं को उचित हिस्सेदारी का मौका मिलेगा।
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