श्रीलंका की ताजा जनसंख्या रिपोर्ट ने देश की सामाजिक और जनसांख्यिकीय स्थिति की नई तस्वीर पेश की है। 2024 की जनगणना के अनुसार, देश की कुल आबादी 2.17 करोड़ है, जिसमें महिलाओं की हिस्सेदारी 51.7 प्रतिशत और पुरुषों की 48.3 प्रतिशत दर्ज की गई है। यह आंकड़ा बताता है कि देश में महिलाओं की संख्या अब आधे से अधिक हो चुकी है। विशेषज्ञ इसे शिक्षा, स्वास्थ्य सुविधाओं में सुधार और महिला सशक्तिकरण की दिशा में अहम संकेत मान रहे हैं।
रिपोर्ट के मुताबिक, शहरी इलाकों में महिलाओं की हिस्सेदारी 51.9 प्रतिशत है, जबकि ग्रामीण और एस्टेट (चाय बागान) क्षेत्रों में यह क्रमशः 51.7 और 51.4 प्रतिशत दर्ज की गई है। पुरुषों की हिस्सेदारी शहरी क्षेत्रों में 48.1 प्रतिशत, ग्रामीण में 48.3 प्रतिशत और एस्टेट क्षेत्रों में 48.6 प्रतिशत है।
यह प्रवृत्ति बताती है कि महिला जनसंख्या में वृद्धि पूरे देशभर में समान रूप से फैली हुई है। जनसंख्या विशेषज्ञों के अनुसार, शिक्षा और स्वास्थ्य सेवाओं में सुधार, मातृ मृत्यु दर में गिरावट और महिलाओं की आयु बढ़ने से यह बदलाव देखा गया है।
कम उम्र की आबादी घटी
जनगणना और सांख्यिकी विभाग की रिपोर्ट में एक और बड़ा सामाजिक परिवर्तन सामने आया है। 15 साल से कम उम्र की आबादी 2012 के 25.2 प्रतिशत से घटकर 2024 में 20.7 प्रतिशत रह गई है, यानी देश की युवा आबादी तेजी से घट रही है।
वहीं, 65 वर्ष से अधिक उम्र के नागरिकों की संख्या 7.9 प्रतिशत से बढ़कर 12.6 प्रतिशत हो गई है।
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विशेषज्ञों के अनुसार, यह परिवर्तन दर्शाता है कि श्रीलंका ‘एजिंग सोसाइटी’ की ओर बढ़ रहा है, यानी यहां बुजुर्गों की संख्या तेजी से बढ़ रही है जबकि जन्म दर में गिरावट आ रही है। 15 से 64 वर्ष की श्रेणी में आने वाली कार्यशील आबादी में भी मामूली गिरावट हुई है, जो 2012 में 66.9 प्रतिशत थी, अब 66.7 प्रतिशत है।
सिंहली समुदाय बहुसंख्यक
जातीय दृष्टि से देखा जाए तो श्रीलंका में सिंहली समुदाय 74.1 प्रतिशत के साथ सबसे बड़ा समूह है। इसके बाद 12.3 प्रतिशत श्रीलंकाई तमिल, 10.5 प्रतिशत मुस्लिम और 2.8 प्रतिशत भारतीय मूल के तमिल हैं।
इसके अलावा बर्गर, मलय, श्रीलंकाई चेत्ती, भरथ और मूल निवासी वेद्दा समुदायों की कुल हिस्सेदारी 0.3 प्रतिशत दर्ज की गई है। यह आंकड़े बताते हैं कि देश की जातीय विविधता अब भी बनी हुई है, हालांकि सिंहली बहुल समाज की स्थिति पहले की तरह मजबूत है।
धर्म के हिसाब से, बौद्ध धर्म के अनुयायी 69.8 प्रतिशत के साथ बहुसंख्यक हैं। वहीं हिंदू 12.6 प्रतिशत, मुस्लिम 10.7 प्रतिशत, रोमन कैथोलिक 5.6 प्रतिशत और ईसाई 1.3 प्रतिशत हैं।