फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

बंगाल के कालीपूजा पंडाल में भी महिलाओं को प्रवेश की अनुमति नहीं

Tue, 06 Nov 2018 05:30 AM IST
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कोलकाता
विज्ञापन
प्रतीकात्मक तस्वीर
विज्ञापन

सबरीमाला मंदिर के जैसे ही कोलकाता में भी एक काली पूजा आयोजन समिति के पंडाल में महिलाओं को प्रवेश की इजाजत नहीं है। बुद्धिजीवियों के विरोध के बावजूद इस पंडाल की परंपरा पिछले 34 वर्षों से कायम है। 

विज्ञापन


महानगर के दक्षिण में स्थित चेतला प्रदीप संघ पूजा समिति के आयोजकों ने बताया कि 34 साल पहले बीरभूम जिले के तारापीठ में स्थित शक्तिपीठ के पुजारियों ने इस पूजा की शुरुआत की थी। उसी समय से पंडाल में महिलाओं को प्रवेश नहीं करने दिया जाता है। समिति के संयुक्त सचिव शैवाल गुहा ने बताया कि यदि पंडाल में किसी महिला को प्रवेश करने दिया गया तो इलाके में भारी विपत्ति आएगी। वर्षों पुरानी परंपरा तोड़ी नहीं जा सकती है।

विज्ञापन

बता दें कि इस आयोजन में प्रसाद तैयार करने से लेकर बाकी तमाम काम पुरुष ही करते हैं। समिति के सदस्य साहेब दास ने बताया कि पूजा समिति में महिला सदस्य भी हैं। लेकिन पूजा के दौरान देवी के नाराज होने के डर से वे पंडाल में प्रवेश नहीं करती हैं। वे कुम्हारटोली से पंडाल तक मूर्ति लाने और विसर्जन जैसे कार्यों में पुरुषों के साथ मिल कर काम करती हैं।

बुद्धिजीवियों ने इस पंरपरा को पितृसत्तात्मक मानसिकता का परिचायक बताते हुए इसका विरोध किया है। बुद्धिजीवी नृसिंह प्रसाद भादुड़ी कहते हैं कि इस परंपरा का शास्त्रों से कोई लेना देना नहीं है। वहीं बुद्धिजीवी शंभुनाथ कहते हैं कि किसी मंदिर के भीतर या प्रतिमा के पास महिलाओं को जाने से नहीं रोका जा सकता।

वहीं इलाके की एक महिला सबिता दास कहती हैं कि वह पिछले 20 साल से यह सब देखती रही हैं। अब महिलाएं खुद इस परंपरा को नहीं तोड़ना चाहती हैं। यह हमारी मान्यता में रच-बस गई है।
और पढ़ें...
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें