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बरेली में बीवी ने किया हक का इस्तेमाल, दे दिया तलाक

Fri, 12 May 2017 12:02 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो, बरेली
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मीरगंज के मोहल्ला खानपुरा निवासी सुहाना बी ने अपने शौहर ग्राम सुजातपुर निवासी जमीर अहमद उर्फ गुड्डू को निकाह के समय हुए करार के तहत तलाक-ए-तफवीज दे दिया। जिले में अपनी तरह का यह पहला मामला है जब एक महिला ने निकाह के वक्त हासिल हक के बल पर खुद को शौहर की जौजियत से अलग किया है।
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सुहाना का निकाह 22 मार्च 2011 को सुन्नी हनफी मुस्लिम रीति रिवाज व शरीयत के अनुसार जमीर अहमद उर्फ गुड्डू के साथ हुआ था। मेहर के 50 हजार रुपये भी तय हुए थे। अधिवक्ता काजी जुबैर अहमद की ओर से तैयार तलाकनामे में कहा गया है कि निकाह के समय दोनों पक्षों में करार हुआ था कि जमीर अहमद मेहर की रकम जब भी सुहाना बी तलब करेगी, अदा करेगा।

जमीर अहमद सुहाना बी को पूरे मान सम्मान व प्यार के साथ रखेगा, हर जायज जरूरतें पूरी क रेगा। उसके साथ किसी किस्म की मारपीट, हिंसा नहीं करेगा। खाना पीना, कपड़ा, दवा, इलाज मुहैया कराएगा। यदि जमीर अहमद सुहाना बी के  हुकूक की अदायगी में नाकाम रहेगा या कोताही बरतेगा तो सुहाना बी को हक हासिल होगा कि वह तलाक-ए-तफवीज का इस्तेमाल करते हुए खुद को जमीर अहमद की जौजियत से बरतरफ (अलग) कर लेगी। 
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जुए और शराब की लत के चलते छोड़ा शौहर का साथ !

triple talaq - फोटो : सोशल मीड‌िया
तलाकनामे में कहा गया है कि जमीर अहमद व उसके परिवार वाले सुहाना के  निकाह से मिले दहेज से संतुष्ट नहीं थे। ताने देकर एक मोटर साइकिल व एक लाख रुपये नकद की मांग करने लगे। मांग पूरी न होने पर सुहाना को मारपीट व गाली गलौज करते हुए भूखा प्यासा रखते थे व कपड़ा, दवा-इलाज से महरूम रखकर प्रताड़ित करते थे। 

सुहाना ने यह भी आरोप लगाया है कि जमीर अहमद जुआ खेलने व शराब पीने का आदी है। विरोध करने पर मारपीट करता था। दो वर्ष बाद बेटी जोया की पैदाइश हुई तब भी सुहाना के साथ मारपीट की गई। जमीर अहमद व उसकी मां जैबुन बेगम, देवर बबलू व ननद गुड़िया ने दहेज की मांग पूरी न होने पर मारपीट कर घर से निकाल दिया। 

सुहाना की ओर से दायर वाद में एसीजेएम तृतीय के न्यायालय में भारतीय दंड संहिता की धारा 377, 498 ए, 323, 504 व दहेज प्रतिषेध अधिनियम की धारा 3/4 में जमीर अहमद, जैबुन बेगम, बबलू अमहद और गुड़िया को तलब किया है। इसके अलावा इसी अदालत से सुहाना के दहेज के सामान को हड़पने, गाली गलौज करने व जान से मारने की धमकी में भी तलब किया गया। जमीर अहमद व उसके परिवार वालों को घरेलू हिंसा के मामले में भी तलब किया गया है।
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'पति ने दी थी जिंदगी बर्बाद करने की धमकी'

triple talaq
सुहाना ने परिवार न्यायालय में भरण पोषण का वाद भी दायर कर रखा है। सुहाना का कहना है कि उसके दो आपरेशन हो चुके हैं और जमीर अहमद ने भरण पोषण अथवा दवा इलाज को कोई रकम अदा नहीं की है और स्त्रीधन अपने कब्जे में नाजायज तरीके से ले रखा है। 

सुहाना बी कहती हैं कि जमीर अहमद ने कहा है कि वह सुहाना को न तो तलाक देगा और न ही साथ रखेगा, बल्कि ऐसे ही अधर में रखकर उसकी जिंदगी बरबाद कर देगा। ये हालात निकाह के वक्त किए गए करार की खिलाफवर्जी करते हैं इसलिए वह बिना किसी दबाव के अपनी इच्छा व सहमति से जमीर अहमद के विरुद्ध तलाक-ए-तफवीज का इस्तेमाल करते हुए अपने को जमीर अहमद के रिश्ता-ए-अज्दवाज से खुद को बरतरफ करती हैं। 

इस्लाम में तफवीज-ए-तलाक की व्यवस्था दी गई है। तफवीजे तलाक का मतलब मर्द की ओर से तलाक का अधिकार औरत को हस्तांतरित करना है। इसके लिए निकाह के वक्त ही महर की शर्तों के साथ यह शर्त भी दर्ज होती है कि अगर मर्द की तरफ से औरत कोई दिक्कत महसूस करती है या उत्पीड़न किया जाता है तो औरत को तफवीज-ए-तलाक के तहत मर्द को तलाक देने का हक हासिल होगा - मौलाना डा. एजाज अंजुम, मंजरे इस्लाम दरगाह आला हजरत बरेली।
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