भारतीय श्रम बाजार में महिलाओं की भागीदारी 27 प्रतिशत है। जबकि इस मामले में वैश्विक औसत 52 प्रतिशत और दक्षिण एशिया में 29 प्रतिशत है। नौकरियों के ऑनलाइन विज्ञापनों में ये साफतौर पर लिखा हुआ तो कम ही दिखता है कि कंपनी को महिला चाहिए या पुरुष लेकिन दोनों के बीच ये चुनाव पहले ही हो चुका होता है।
रिपोर्ट कहती है कि जॉब पोर्टल पर कंपनियों के पास एक विकल्प होता है जिसमें वो किसी नौकरी के लिए महिला या पुरुष का चुनाव कर सकते हैं। इस बात की पुष्टि क्विकर जॉब्स ने भी की। पोर्टल के एस्केलेशन विभाग में सीनियर एक्जिक्यूटिव हेमंत कुमारयम ने बीबीसी को बताया, ''हमारी वेबसाइट पर कोई भी कंपनी रजिस्ट्रेशन करके अपने विज्ञापन अपलोड कर सकती है। जब कंपनी विज्ञापन अपलोड करती है तो उसे कई तरह के फिल्टर मिलते हैं।''
''जैसे कंपनी शहर, लिंग, कार्य भूमिका, शिक्षा और अनुभव आदि का चुनाव कर सकती है। यानी अगर कंपनी विज्ञापन अपलोड करते समय पुरुष का चुनाव करेगी तो वो विज्ञापन सिर्फ पुरुषों को दिखाई देगा।'' इसमें 301,929 नौकरियों में से 180,058 में पुरुषों को चुना गया था और 121,324 में महिलाओं को चुना गया था। अध्ययन में लगभग 23 हजार विज्ञापन ऐसे भी पाये गये हैं जिनमें स्पष्ट तौर पर लैंगिक प्राथमिकता तो नहीं दी गई लेकिन विज्ञापन लिखने का तरीका ऐसा था जिसमें अप्रत्यक्ष लैंगिक भेदभाव दिखता है।
अध्ययन के अनुसार नौकरी के विज्ञापनों में महिला और पुरुष का चुनाव अनुभव, कंपनी के प्रकार, शिफ्ट और क्षेत्र के आधार पर किया गया है। अनुभव की बात करें तो किसी पद पर अनुभव बढ़ने के साथ ही महिलाओं की मांग भी कम हो गई है। जैसे एक से दो साल के अनुभव के लिए 45 नौकरियों में लैंगिक प्राथमिकता दी गई। इसमें 26 विज्ञापनों में पुरुषों और 19 में महिलाओं को तरजीह मिली। यानी इसमें 7 विज्ञापनों का अंतर है। वहीं, चार से पांच साल के अनुभव वाली नौकरियों में 56 विज्ञापनों में से 40 में पुरुषों और 16 में महिलाओं को प्राथमिकता मिली। इसमें 24 विज्ञापनों का अंतर है। ये आंकड़े औसतन प्रति 100 नौकरियों के आधार पर दिया गया है।
इससे पता चलता है कि ज्यादा अनुभव की नौकरियों में पुरुषों की मांग ज्यादा है। किसी भी कंपनी में अनुभव के अनुसार वेतन और पद भी तय होता है। ऐसे में अपने आप महिलाएं निचले और कम वेतन वाले पदों के लिए चुनी जाएंगी क्योंकि ऊंचे पदों के विज्ञापन उन तक पहुंचेंगे ही नहीं । शिफ्ट की बात करें तो नाइट शिफ्ट में महिलाओं को सबसे कम चुना गया है। वहीं, पार्ट टाइम नौकरियों में महिलाओं को पुरुषों से ज्यादा तवज्जो दी गई है। नाईट शिफ्ट वाली 14 नौकरियों में पुरुषों और 5 में महिलाओं को प्राथमिकता मिली। पार्ट टाइम नौकरी में ये आंकड़ा 20 (पुरुषों) और 25 (महिलाओं) का है। फुल टाइम नौकरियों में भी ज्यादातर पुरुषों की ही मांग है।
अगर क्षेत्र के अनुसार बात करें तो प्रोफेशनल, मशीन और सेल्स से जुड़ी नौकरियों में पुरुषों की ज्यादा मांग होती है। मशीन के काम से जुड़ी नौकरियों के 52 विज्ञापनों में लैंगिक प्राथमिकता दी गई और इसमें सिर्फ 1 विज्ञापन में महिलाओं को तरजीह मिली। आंकड़े बताते हैं कि महिलाओं को सर्विस, बीपीओ, क्लरिकल नौकरियों में ज्यादा महत्व मिलता है। प्रोफेशनल नौकरियों में मैनेजमेंट, इंजीनियरिंग, आईटी, फाइनेंस से जुड़ी नौकरियां आती हैं। वहीं, सर्विस सेक्टर में ब्यूटीशियन, कुक, नैनी, नर्समेड और स्टूअर्ड शामिल हैं। इसके अलावा घरेलू कामों के लिए भी महिलाओं को प्राथमिकता मिलती है। वहीं, बीपीओ क्षेत्र में लैंगिक विभाजन भी बहुत कम है।
वेतन का भेदभाव समान पद के लिए भी होता है। जिन नौकरियों में लैंगिक प्राथमिकता दी गई है उनमें एक ही पद के लिए पुरुषों का औसत वेतन 7,926 रुपये और महिलाओं का 6,598 रुपये रखा गया है। रिपोर्ट में कहा गया है कि इसके पीछे नियोक्ताओं का महिलाओं को लेकर पारंपरिक नजरिया जिम्मेदार है। इससे पता चलता है कि आज भी नियोक्ताओं में क्षमताओं, कुशलता और कार्य प्रदर्शन को लेकर पुरुष को बेहतर मानने की एकतरफा धारणा बनी हुई है।