कोलकाता भगदड़ मामले में खुलासा
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पश्चिम बंगाल की राजधानी कोलकाता में दुर्गा पूजा पंडाल में हुई भगदड़ की शुरुआती जांच में सामने आया है कि बारिश से बचने के लिए कई महिलाएं निकास द्वार के पास जमा हो गई थीं। कपड़े और मेकअप खराब होने के डर से कुछ महिलाएं पंडाल से बाहर निकलने में हिचकिचा रही थीं। इसी दौरान भीड़ बढ़ने से धक्का-मुक्की शुरू हो गई और भगदड़ मच गई। इस हादसे में 19 लोगों की मौत हो गई थी। पुलिस अधिकारी ने बुधवार को बताया कि यह घटना 17 अक्तूबर को शाम करीब 7:30 बजे उत्तर कोलकाता के चोरबागान दुर्गा पूजा पंडाल में हुई थी। अचानक बारिश शुरू होने के बाद निकास द्वार के पास भीड़ बढ़ने लगी। लोग एक-दूसरे को धक्का देने लगे, जिससे कई लोग गिर पड़े। पुलिस के मुताबिक, सबसे पहले एक व्यक्ति निकास द्वार से करीब 11 फीट की दूरी पर गिरा था।
भीड़ संभालने में चूक की जांच
कोलकाता पुलिस अब इस बात की जांच कर रही है कि पंडाल में भीड़ को नियंत्रित करने के पर्याप्त इंतजाम थे या नहीं। यह भी देखा जा रहा है कि मौके पर महिला स्वयंसेवकों और पुलिसकर्मियों की पर्याप्त तैनाती की गई थी या नहीं। पुलिस यह भी पता लगा रही है कि निकास द्वार पर भीड़ बढ़ने की सूचना प्रशासन तक समय पर पहुंची थी या नहीं। जांच में यह भी शामिल है कि अलग-अलग एजेंसियों के बीच तालमेल में देरी तो नहीं हुई।
सुरक्षा एजेंसी के रेडियो सिस्टम की भी जांच
पंडाल के आयोजकों ने सुरक्षा के लिए एक एजेंसी तैनात की थी। इस एजेंसी के पास 'मैनपैक' नाम का पोर्टेबल रेडियो संचार उपकरण था। पुलिस जांच कर रही है कि घटना के समय एजेंसी के कर्मचारी कहां तैनात थे, उन्हें भीड़ बढ़ने की जानकारी मिली थी या नहीं और सूचना मिलने के बाद उन्होंने क्या कदम उठाए।
अब तक नौ गिरफ्तार
इस मामले में पुलिस अब तक नौ लोगों को गिरफ्तार कर चुकी है। इनमें दो ऐसे लोग भी शामिल हैं, जिन पर कथित तौर पर यह घोषणा कर अफरा-तफरी फैलाने का आरोप है कि पंडाल का एक हिस्सा गिर रहा है। पुलिस इन लोगों की आवाज के नमूने लेने के लिए अदालत से अनुमति मांग सकती है। जांच के तहत पंडाल के कलाकार से भी पूछताछ की गई है। पुलिस का कहना है कि हादसे के कारणों और सुरक्षा इंतजामों में संभावित चूक का पता लगाने के लिए जांच जारी है।
अभिषेक बनर्जी ने पूजा समिति के बड़े पदाधिकारियों की गिरफ्तारी की मांग की
कोलकाता के चोरबागान दुर्गा पूजा पंडाल में भगदड़ से 19 लोगों की मौत के मामले में तृणमूल कांग्रेस सांसद अभिषेक बनर्जी ने पूजा समिति के वरिष्ठ पदाधिकारियों को हिरासत में लेकर पूछताछ करने की मांग की है। उन्होंने जांच की पारदर्शिता पर सवाल उठाते हुए कहा कि घटना के 12 दिन बाद भी आयोजकों की भूमिका को लेकर स्पष्ट जानकारी सामने नहीं आई है। अभिषेक बनर्जी ने सोशल मीडिया पर दावा किया कि भाजपा विधायक विजय ओझा, भाजपा जिला अध्यक्ष तमोघ्न घोष और देवदीप अधिकारी के नाम आयोजन समिति के पदाधिकारियों के रूप में सामने आए हैं। उन्होंने सवाल किया कि इनकी भूमिका की जांच में क्या प्रगति हुई है और उनसे पूछताछ क्यों नहीं की गई। उन्होंने आरोप लगाया कि जांच पर राजनीतिक प्रभाव नहीं पड़ना चाहिए। पुलिस इस मामले में अब तक नौ लोगों को गिरफ्तार कर चुकी है। पश्चिम बंगाल सरकार ने घटना की जांच के लिए कलकत्ता हाईकोर्ट की सेवानिवृत्त न्यायाधीश जस्टिस अनिंदिता रॉय सरस्वती की अध्यक्षता में छह सदस्यीय विशेष जांच दल (एसआईटी) बनाया है।