साल 2014 में 20 हजार से ज्यादा घरेलू महिलाओं ने भारत में खुदकुशी कर ली। इसी साल 5,650 किसानों ने भी देश में आत्महत्या की। इस तरह से घरेलू
महिलाओं की आत्महत्या के मामले किसानों की तुलना में 250 फीसदी से भी ज्यादा है।
महिलाओं में आत्महत्या के कुल मामलों का यह 47 फीसदी है, तो भी घरेलू महिलाओं के आत्महत्याओं के मामले उस तरह से अखबारों के पहले पन्ने पर सुर्खियों में नहीं आ पाते जैसे साल दर साल किसानों के मामले आते हैं। वाकई में 1997 से हर साल 20 हजार से ज्यादा घरेलू महिलाएं भारत में आत्महत्याएँ कर रही हैं।
नेशनल क्राइम रिकॉर्ड्स ब्यूरो के पास 1997 से ही पेशेवर आधार पर आत्महत्या के आकड़ें मौजूद हैं। 2009 में घरेलू महिलाओं की आत्महत्या की तदाद 25092 तक पहुंच गई थी। एक लाख लोगों पर 11 से ज्यादा घरेलू महिलाओं की आत्महत्या की दर 1997 से लगातार बनी हुई है। यह भारत में होने वाली आत्महत्या की औसत दर से ज्यादा है। हालांकि यह दर 2014 में गिरकर 9.3 हुई थी। इसके बाद भी घरेलू महिलाओं की आत्महत्या दर उस साल किसानों से दोगुनी रही। घरेलू महिलाओं की आत्महत्या दर सभी राज्यों में अलग-अलग है।
मसलन 2011 में एक लाख लोगों पर 20 से ज्यादा घरेलू महिलाओं की आत्महत्या के मामले महाराष्ट्र, पांडीचेरी, तमिलनाडु, मध्य प्रदेश, केरल,
कर्नाटक, आंध्र प्रदेश, गोवा, पश्चिम बंगाल और गुजरात में दर्ज किए गए। वहीं पंजाब, उत्तर प्रदेश और बिहार में आत्महत्या की दर इससे कम रही। यूनिवर्सिटी
ऑफ एडीलेड में राजनीति शास्त्र पढ़ाने वाले पीटर मेयर ने भारत में आत्महत्या के समाजशास्त्र का गहन अध्ययन किया है। वो इस पर आश्चर्य जताते हैं कि
भारत में घरेलू महिलाओं में आत्महत्या दर इतनी ज्यादा क्यों है और इसे मीडिया में इतनी कम जगह क्यों मिलती है।
पीटर मेयर कहते हैं, "पश्चिमी समाज पर होने वाले अध्ययन से पता चलता है कि शादीशुदा औरतों को शादी आत्महत्या करने से रोकती है।" अमेरिकी और ऑस्ट्रेलियाई समाज के अध्ययन से पता चला है कि शादीशुदा लोगों में उसी उम्र के गैर-शादीशुदा लोगों के बनिस्पत आत्महत्या की दर कम है। साफ तौर पर भारत इस मामले में अलग है।
2001 में आत्महत्या करने वाले करीब 70 फीसदी लोग शादीशुदा थे। इसमें 70.6 फीसदी पुरुष और 67 फीसदी औरतें थीं। मेडिकल जर्नल लैंसेट में 2012 में प्रकाशित शोध में पाया गया है कि भारत में 15 या उससे ज्यादा उम्र की औरतों में आत्महत्या दर इसी उम्र की अधिक आय वाले देशों की औरतों की तुलना में ढाई फीसदी ज्यादा है और चीन के करीब है। शादीशुदा औरतें इसी तदाद का हिस्सा हैं।