अटार्नी जनरल मुकुल रोहतगी ने तीन तलाक पर बयान दिया है। उन्होंने कहा कि महिलाओं के साथ निम्न दर्जे का व्यवहार नहीं किया जा सकता और उनको भी पुरुषों के बराबर अधिकार मिलने चाहिए। उन्होंने कहा कि पंथनिरपेक्ष देश में इस तरह की स्थिति नहीं होना चाहिए कि एक महिला के पास अपने पति के बराबर अधिकार हों और वहीं उसके पड़ोस में रह रही दूसरे धर्म की महिला के पास इस तरह का अधिकार नहीं हो।
बताते चलें कि मुकुल रोहतगी का यह बयान मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड के तीन तलाक पर रखे पक्ष के बाद आया है। लॉ बोर्ड का कहना है कि शरिया कानून से इतर बेवजह तलाक देने वालों का सामाजिक बहिष्कार करना जरूरी होगा। इससे पीड़ित मुस्लिम महिलाओं को पर्याप्त न्याय नहीं मिल पाएगा।
बताते चलें कि तीन तलाक को सामाजिक बुराई बताने वाले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के बयान के अगले ही दिन मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने भी इसे देश की ज्वलंत समस्या बताया। उन्होंने तीन तलाक को द्रौपदी के चीर हरण जैसा बताते हुए कहा कि जो लोग इस महत्वपूर्ण मुद्दे पर चुप हैं, वे भी अपराध में भागीदार हैं। उन्होंने द्रौपदी के चीर हरण का जिक्र करते हुए कहा कि उस वक्त पूछा गया था कि इस घटना का दोषी कौन है।
महाभारत के अहम चरित्र विधुर ने जवाब दिया था कि जिन्होंने इस घटना को अंजाम दिया, वे तो अपराधी हैं हीं, सहयोगी और मौन रहने वाले भी इस अपराध में भागीदार हैं। इसी तरह से तीन तलाक को लेकर जो राजनेता मौन हैं, वे भी अपराध में भागीदार हैं।