अक्सर ऐसी शिकायतें मिलती रहती हैं कि एनआरआई दुल्हन की तलाश में भारत आते हैं। विदेशों में अपनी हैसियत का बखान कर लड़की वालों को झांसा देकर शादी कर लेते हैं, लेकिन कुछ दिन गुजारने के बाद दुल्हन को छोड़कर भारत से रफूचक्कर हो जाते हैं। या विदेश ले जाकर उन पर सितम ढाते हैं।
जटिल एवं लंबी कानूनी प्रक्रिया के कारण जब सारी आशाएं धूमिल हो जाती हैं, तो दुल्हन को रो-धोकर संतोष करना पड़ता है। ऐसे धोखेबाज एनआरआई पतियों से परेशान महिलाओं की मदद के लिए सरकार ने ठोस योजना बनाने का फैसला किया है। महिला एवं बाल विकास मंत्रालय ऐसी व्यवस्था करने जा रहा है, जिससे एनआरआई पुरुषों द्वारा छोड़ी गई महिलाओं को तुरंत राहत मिल सके।
मौजूदा कानून औपचारिकताओं से भरे हैं, जिनका फायदा उठाकर ये अप्रवासी खुद को बचा लेते हैं। मसलन कई एनआरआई पति देश में अपनी पत्नियों को छोड़ कर विदेश भाग जाते हैं। जहां से उनको पकड़ना या कार्रवाई करना कठिन होता है। इन्हें विदेश जाने से रोकने के लिए अदालत के आदेश जरूरी होते हैं। जब तक आदेश जारी होते हैं, तब तक परदेसी पति रफूचक्कर हो जाते हैं।