भारतीय संविधान में महिला और पुरुष दोनों के लिए समान अधिकार बनाए गए हैं, लेकिन निरक्षरता एवं घरेलू तथा धार्मिक परंपराओं की वजह से महिलाएं उन समस्त अधिकारों का संपूर्ण उपयोग नहीं कर पाती हैं। आज भारतीय नारी ने अपने स्तर पर हर क्षेत्र में सफलता हासिल की है। हम अकसर अखबारों में पढ़ते हैं कि हाईस्कूल परीक्षा परिणाम में छात्राओं ने बाजी मारी, आईआईटी परीक्षा परिणाम में छात्रा सर्वप्रथम आई।
अत: महिलाएं अपने प्रयास और प्रयत्न में पीछे नहीं हैं, लेकिन जरूरत है उन्हें सही अवसर प्रदान करने की। इसी तरह विज्ञान, व्यापार, अंतरिक्ष, खेल,
राजनीति हर क्षेत्र में भारतीय नारी ने नए कीर्तिमान स्थापित किए हैं। सौंदर्य के क्षेत्र में ऐश्वर्या राय, सुष्मिता सेन और मानुषी छिल्लर ने न केवल भारत, बल्कि पूरे विश्व में सम्मान प्राप्त किया। संगीत की दुनिया में लता मंगेशकर को स्वर कोकिला का दर्जा दिया गया है।
आज भारतीय नारी हर क्षेत्र में आगे बढ़ने के प्रयास में लगी है, किंतु हमारी पुरुषवादी सोच उनकी प्रगति में बाधक बन रही है। जब कोई विवाहित महिला अपने करियर में आगे बढ़ना चाहती है, आत्मनिर्भर बनना चाहती है, तो सर्वप्रथम उसके परिवारजनों को ही उसमें आपत्ति होती है।
हालांकि, स्वतंत्रता के बाद के वर्षों में भारतीय नारी हर क्षेत्र में आगे बढ़ी है। उसने कई उपलब्धियां भी हासिल की हैं, लेकिन आगामी समय में प्रवेश करने के पहले हमें जरूरत है उन्हें आत्मनिर्भर बनाने की, जिसके लिए आवश्यकता है, विचार परिवर्तन की।