फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

ISRO: इसरो 7 अगस्त को लॉन्च करेगा सबसे छोटा वाणिज्यिक रॉकेट एसएसएलवी, सैटेलाइट मार्केट पर नजर

Thu, 04 Aug 2022 06:30 PM IST
Amit Mandal न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

पीएसएलवी के विपरीत, एसएसएलवी रॉकेट के तीन चरणों को फायर करने के लिए ठोस ईंधन हाइड्रॉक्सिल-टर्मिनेटेड पॉलीब्यूटाडाइन का उपयोग करता है जो पेलोड को वांछित ऊंचाई तक ले जाता है।
विज्ञापन
ISRO (file photo) - फोटो : ISRO Twitter Handle
विज्ञापन

विस्तार
वॉट्सऐप चैनल फॉलो करें

भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) 7 अगस्त को अपने सबसे छोटे वाणिज्यिक रॉकेट एसएसएलवी को दो उपग्रहों की कक्षा में स्थापित करने के लिए लॉन्च करेगा, जो अंतरिक्ष में सस्ती यात्रा की पेशकश करेगा साथ ही बढ़ते छोटे उपग्रह प्रक्षेपण बाजार में हिस्सेदारी पर भी इसकी नजर है। 34 मीटर छोटा सैटेलाइट लॉन्च व्हीकल (एसएसएलवी) इसरो के वॉरहॉर्स रॉकेट पोलर सैटेलाइट लॉन्च व्हीकल (पीएसएलवी) से 10 मीटर छोटा है और 500 किलोग्राम तक के पेलोड को 500 किमी प्लानर ऑर्बिट में डाल सकता है।

विज्ञापन


एसएसएलवी रॉकेट की हैं ये खासियतें 
पीएसएलवी के विपरीत, एसएसएलवी रॉकेट के तीन चरणों को फायर करने के लिए ठोस ईंधन हाइड्रॉक्सिल-टर्मिनेटेड पॉलीब्यूटाडाइन का उपयोग करता है जो पेलोड को वांछित ऊंचाई तक ले जाता है। लिक्विड-प्रोपेल्ड वेलोसिटी ट्रिमिंग मॉड्यूल (VTM) तब उपग्रह को कक्षा में स्थापित करता है। अपने पहले प्रक्षेपण में एसएसएलवी 145 किलोग्राम अर्थ ऑब्जर्वेशन -2 उपग्रह और आजादीसैट को कक्षा में स्थापित करेगा, जो कि 8 किलोग्राम का क्यूबसेट है, जिसे देश भर के सरकारी स्कूलों की 750 छात्राओं द्वारा स्वतंत्रता की 75 वीं वर्षगांठ के अवसर पर डिजाइन किया गया है। 

इसरो के अधिकारियों के अनुसार, एसएसएलवी का टर्नअराउंड समय कम है और इसे एक पखवाड़े के भीतर असेंबल किया जा सकता है, जिससे अंतरिक्ष एजेंसी को तेजी से बढ़ते लो अर्थ ऑर्बिट लॉन्च सेक्टर में लॉन्च ऑन डिमांड सेवा देने की अनुमति मिलती है। एसएसएलवी डी-1 रविवार को श्रीहरिकोटा के सतीश धवन अंतरिक्ष केंद्र से सुबह 9:18 बजे आसमान में उड़ान भरेगा और अपनी 13.2 मिनट की उड़ान के अंत में दो पेलोड को कक्षा में स्थापित करेगा।
विज्ञापन


एसएसएलवी की ऊंचाई 34 मीटर है, व्हीकल का व्यास दो मीटर और द्रव्यमान 120 टन है। दूसरी ओर पीएसएलवी 44 मीटर लंबा, 2.8 मीटर व्यास और 320 टन द्रव्यमान है। इसकी कक्षा में 1,800 किलोग्राम तक पेलोड लगाने की क्षमता है। इसरो के एक अधिकारी ने कहा कि एसएसएलवी मॉड्यूलर और एकीकृत सिस्टम और एंड-टू-एंड औद्योगिक उत्पादन के लिए मानक इंटरफेस के साथ व्हीकल को स्थानांतरित करने के लिए तैयार है। एसएसएलवी की प्रमुख विशेषताओं में एक बूस्टर मोटर सेगमेंट शामिल है जिसमें सेगमेंट असेंबली को कम करने और एकीकरण समय को लॉन्च करने के लिए ओपन जॉइंट कॉन्फिगरेशन है। 

विज्ञापन
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें