केंद्र सरकार ने बुधवार को जाति जनगणना कराने का फैसला किया है। एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि सरकार अब जल्द जनगणना कराने की भी योजना बना रही है। कोरोना महामारी के कारण प्रत्येक दस साल में होने वाली जनगणना को टाल दिया गया था। जिसके बाद से इसमें लगातार देरी हो रही थी। अब सबका ध्यान इस पर है कि यह जनगणना कब कराई जाएगी, क्योंकि इसमें पहले ही पांच साल की देरी हो चुकी है।
इस घटनाक्रम से परिचित एक अधिकारी ने कहा कि जनगणना 'जल्द' कराई जाएगी क्योंकि जाति गणना को लेकर फैसला न होने के कारण पूरी प्रक्रिया में देरी हो रही थी। जनगणना भारत के रजिस्ट्रार जनरल और जनगणना आयुक्त की सीधी देखरेख में कराई जाएगी, जो गृह मंत्रालय (एमएचए) को रिपोर्ट करते हैं। गृह मंत्रालय ने अब तक यह नहीं बताया है कि यह बड़ा जनगणना अभ्यास कब शुरू किया जाएगा।
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जनगणना की घर सूची बनाने की प्रक्रिया और राष्ट्रीय जनसंख्या रजिस्टर (एनपीआर) को अपडेट करने का काम 1 अप्रैल से 30 सितंबर 2020 के बीच पूरे देश में होना था, लेकिन कोरोना महामारी के कारण इसे टाल दिया गया। जनगणना की प्रक्रिया अभी भी थमी हुई है और सरकार ने अब तक इसकी नई तारीखों की घोषणा नहीं की है।अगस्त 2024 में केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने कहा था कि जनगणना उपयुक्त समय पर कराई जाएगी और इसका एलान तभी किया जाएगा, जब फैसला लिया जाएगा।
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हालांकि, 2025-26 के बजट में जनगणना के लिए सिर्फ 574.80 करोड़ रुपये ही रखे गए हैं, जिससे यह संकेत मिलता है कि इतनी देरी के बाद भी यह काम इस साल शायद न हो पाए। हालांकि, सरकारी अधिकारी ने कहा कि बजट कोई बड़ी समस्या नहीं है और इसे बिना किसी रुकावट के आसानी से निपटाया जा सकता है। 2025-26 के बजट के अनुसार, जनगणना सर्वे और सांख्यिकी के लिए भारत के रजिस्ट्रार जनरल (आरजीआई) को 574.80 करोड़ रुपये आवंटित गए हैं, जबकि 2024-25 में यह राशि 572 करोड़ रुपये थी। पूरी जनगणना और एनपीआर अभ्यास करने में सरकार का 13,000 करोड़ रुपये से अधिक का खर्चा आ सकता है।
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