तीन तलाक बिल पर हंगामे के कारण राज्यसभा की कार्यवाही 2 जनवरी, 2019 तक स्थगित।
तीन तलाक बिल पेश होने से पहले ही राज्यसभा में सत्ता और विपक्ष में हंगामा शुरू हो गया। विपक्ष बिल को सिलेक्ट कमेटी के पास भेजने पर अड़ा है जिसे सत्तापक्ष मानने को तैयार नहीं है। बढ़ते हंगामे को देखकर डिप्टी स्पीकर हरिवंश ने सदन को दोबारा स्थगित कर दिया।
राज्यसभा में विपक्ष के नेता गुलाम नबी आजाद ने तीन तलाक पर कहा, 'यह इतना महत्वपूर्ण बिल है जो सकारात्मक और नकारात्मक तौर पर करोड़ों लोगों की जिंदगी को प्रभावित करेगी। इसे सिलेक्ट कमेटी के पास भेजे बिना पास नहीं किया जा सकता।'
राज्यसभा की कार्यवाही हुई शुरू। विपक्ष ने विधेयक को सिलेक्ट कमेटी के पास भेजने की मांग की।
कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष राहुल गांधी ने तीन तलाक पर कहा, 'पार्टी ने पहले ही अपना पक्ष साफ कर दिया है।'
तीन तलाक पर बीजद के प्रसन्ना आचार्य ने कहा, 'उच्चतम न्यायालय ने जो भी फैसला दिया है हम उससे सहमत हैं। इस विधेयक को पास होना चाहिए लेकिन विधेयक में कुछ दोष हैं जिन्हें दूर किया जाना चाहिए। हम चाहते हैं कि यह विधेयक जितनी जल्दी हो सके उतनी जल्दी पास हो मगर कुछ सुधार के बाद।'
जम्मू कश्मीर की पूर्व मुख्यमंत्री महबूबा मुफ्ती ने तीन तलाक को लेकर कहा, 'इस विधेयक को लेकर भाजपा हमारे घरों में घुस रही है। इससे हमारी पारिवारिक जिंदगी के लिए परेशानी खड़ी हो जाएगी। इसके अलावा इससे आर्थिक रूप से महिलाओं और पुरुषों के लिए अधिक समस्याएं होंगी। मैं शाटी टूटने की परिस्थिति से गुजरी हूं और मुझे लगता है कि शादी टूटने के बाद महिलाएं आर्थिक रूप से ज्यादा टूट जाती हैं। जब हम मुस्लिमों के लिए आरक्षण की मांग करते हैं तो भाजपा इसे धार्मिक तर्ज पर खारिज कर देती है। लेकिन जब इस तरह के कानून की बात आती है, तो वे संसद तक भागते हैं।'
उच्च सदन में नेता प्रतिपक्ष गुलाम नबी आजाद की अध्यक्षता में सोमवार को विपक्षी दलों के नेताओं की बैठक हुयी। इस बैठक में तृणमूल कांग्रेस सदस्य डेरेक ओ ब्रायन, सपा के रामगोपाल यादव, राजद के मनोज झा और आप के संजय सिंह सहित अन्य दलों के नेताओं ने हिस्सा लिया।
मीडिया रिपोर्ट के अनुसार नीतीश कुमार की पार्टी जनता दल यूनाइटेड तीन तलाक विधेयक पर वोटिंग के दौरान सदन से गैरहाजिर रह सकती है। यह भाजपा के लिए झटका है।
विभिन्न मुद्दे को लेकर विपक्षी सांसदों का हंगामा, राज्यसभा दोपहर 2 बजे तक स्थगित।
मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, तीन तलाक विधेयक को लेकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी संसद भवन में भाजपा नेताओं की एक बैठक बुलाई है। इस बैठक में भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह, गृहमंत्री राजनाथ सिंह, वित्त मंत्री अरुण जेटली, सड़क एवं राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी सहित कई बड़े नेता मौजूद हैं।
आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री नारा चंद्रबाबू नायडू ने कहा, 'मैं टीडीपी के राज्यसभा सांसदों से अपील करता हूं कि वह मुस्लिमों के उत्पीड़न का विरोध करें। सभी विपक्षी पार्टियों को भाजपा के मुस्लिम विरोधी रवैये के खिलाफ एकजुट होकर लड़ना चाहिए। सरकार जबरन तीन तलाक विधेयक को थोप रही है और यह धर्मनिरपेक्षता और राष्ट्रीय अखंडता के लिए खतरा है।'
पिछले साल भी सरकार लोकसभा में तो इस बिल को पारित कराने में कामयाब हो गई थी, लेकिन राज्यसभा में संख्या बल की कमी के कारण इसे प्रवर समिति को भेजना पड़ा था। इस बीच सरकार ने प्रवर समिति की कई सिफारिशों को तो स्वीकार किया, मगर इसे दिवानी मामला बनाने और सजा का प्रावधान हटाने की समिति की सिफारिश को नामंजूर करते हुए अध्यादेश जारी कर दिया गया था।
सियासी जोर आजमाइश के लिए भाजपा, कांग्रेस समेत अन्य दलों ने सदन में सांसदों की उपस्थिति सुनिश्चित करने के लिए तीन लाइन का व्हिप जारी किया है। दरअसल विपक्ष बिल में तीन तलाक को आपराधिक मामला बनाने और तीन साल की सजा के प्रावधान के खिलाफ है।