संसद के शीतकालीन सत्र में तीन तलाक को गैरकानूनी और दंडनीय अपराध बनाना भाजपा के नेतृत्व वाली एनडीए सरकार की प्राथमिकताओं में से एक है। वहीं विपक्ष राफेल सौदे और केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो के बीच जारी आपसी घमासान को लेकर सरकार को घेरने की तैयारी कर रही है। संसद का शीतकालीन सत्र सोमवार से शुरू हो रहा है। शुरुआती दिन में पूर्व केंद्रीय मंत्री अनंत कुमार और पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी को श्रद्धांजलि दी जाएगी।
सत्र की शुरुआत के दूसरे दिन पांच राज्यों में हुए विधानसभा चुनाव के नतीजे आएंगे। नए संसदीय मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर ने शुक्रवार को कहा कि राज्य विधानसभा चुनाव के नतीजों का शीतकालीन सत्र पर कोई खास प्रभाव नहीं पड़ेगा। तोमर ने कहा, 'देखिए चुनाव के नतीजे पूरी तरह से राज्य की विधानसभा का मुद्दा हैं। मुझे नहीं लगता कि राज्य में होने वाली हलचल संसद के शीतसकालीन सत्र के एजेंडे या किस्मत को तय करेंगी। सभी राजनीतिक पार्टियां इस बात को जानती हैं और सरकार और विपक्ष की तरफ से बहुत से मसले हैं जिन्हें सदन में उठाया जाएगा और चर्चा की जाएगी।'
अधिकारियों का कहना है कि सरकार तीन अध्यादेशों को कानून में बदलने पर प्राथमिकता से काम करेगी। जिसमें तीन तलाक, कंपनी अधिनियन संशोधन और मेडिकल काउंसिल ऑफ इंडिया अधिनियम संशोधन शामिल हैं। तीन तलाक पर अध्यादेश यदि पास हो जाता है तो मुस्लिम महिलाओं को दिया जाने वाला तुरंत तलाक दंड की श्रेणी में आ जाएगा। इसे उच्चतम न्यायालय के सिद्धांतों के खिलाफ बताया गया है।
इस शीतकालीन सत्र में राफेल लड़ाकू विमान के सौदे को लेकर भाजपा और विपक्ष के बीच तीखी बहस हो सकती है। जहां विपक्ष इसे सरकार का सबसे बड़ा रक्षा घोटाला बता रही है वहीं केंद्र सरकार लगातार इस बात को नकार रही है। वहीं सीबीआई निदेशक आलोक वर्मा और विशेष निदेशक राकेश अस्थाना के बीच हुई लड़ाई के कारण सरकार ने दोनों को शक्ति विहिन करके छुट्टी पर भेज दिया है। पूर्व केंद्रीय राज्यमंत्री रहे एमजे अकबर पर लगे यौन शोषण के आरोप और भारतीय रिजर्व बैंक की स्वायत्ता का प्रश्न, यह सभी ऐसे मुद्दे हैं जिन्होंने विपक्ष को सरकार पर हमला करने का अवसर दिया है।