समाजवादी विचारक त्यागी ने कहा कि अगर समाजवाद इस दुनिया में फेल हुआ है तो पूंजीवाद भी बुरी तरह फेल हुआ है। पूंजीवाद के सबसे बड़े चैंपियन अमेरिका और यूरोप में लाखों उद्योगपति असफल साबित हुए हैं और उन्होंने खुद को अपनी सरकारों से दीवालिया घोषित कर दिए जाने की मांग की है। उन्होंने कहा कि इस समाज के विकास का अंतिम खाका सबसे निचले तबके को प्राथमिकता दिए जाने के बाद ही संभव हो सकती है।
भाजपा के आईटी सेल के प्रमुख अमित मालवीय ने कार्यक्रम में अपने विचार रखते हुए कहा कि मौजूदा सरकार के अच्छे कामों का ही परिणाम हुआ है कि भारत दुनिया की छठीं सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बन चुका है। जल्दी ही यह छठीं सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था वाला देश बन जाएगा। उन्होंने कहा कि लोग अब नौकरी नहीं, बल्कि बेहतर नौकरियों की तलाश कर रहे हैं जिसकी वजह से कुछ लोगों को भ्रम होता है कि बेरोजगारी बढ़ गई है।
वहीं कांग्रेस के प्रवक्ता गौरव वल्लभ ने मालवीय से असहमति जताते हुए मोदी सरकार के विकास के दावे को पूरी तरह निराधार बताया। वल्लभ ने कहा कि देश की अर्थ व्यवस्था की रीढ़ लघु उद्योग और गैर वर्गीकृत क्षेत्र है। लेकिन सरकार ने नोटबंदी कर इस व्यवस्था की कमर तोड़ दी है जिसके कारण आज इस समय देश में बेरोजगारी की दर सबसे ज्यादा है। निर्यात दर में बेहद तेज गिरावट दर्ज की गई है।
कांग्रेस नेता गौरव वल्लभ की बातों से असहमति जताते हुए विजयंत पांडा ने कहा कि किसी भी सरकार के पास नौकरियों को गिनने का बिलकुल सही फार्मूला अभी तक नहीं है। एक ढाबे या चायवाले को सरकारी खाते में अभी भी रोजगार से युक्त नहीं माना जाता जबकि वह अपने साथ दो-चार दूसरे लोगों को नौकरी देने की भी क्षमता रखता है।
ऐसे में ठोस आंकड़ों के आधार पर यह दावा नहीं किया जा सकता कि वाकई सरकार के क़दमों से बेरोजगारी बढ़ी है। चूंकि सरकार ने करोड़ों लोगों को मुद्रा लोन दिया है, इसलिए अगर उतने लोगों को भी रोजगार पाया हुआ मानें तो यह अपने आप में एक बड़ी संख्या होगी जिसे सिरे से खारिज नहीं किया जा सकता।