पश्चिम बंगाल में इन दिनों राज्य की नाम बदलने की चर्चा तेज हो गई है। पश्चिम बंगाल का नाम बदलकर 'पश्चिम बंग' करने की तैयारी है। राज्य सरकार अगले विधानसभा सत्र में नाम परिवर्तन से संबंधित विधेयक लाएगी। इसी बीच टीएमसी विधायक कुणाल घोष ने कहा कि इसका नाम 'बांग्ला' होना चाहिए।
क्यों जरूरी है यह नाम?
टीएमसी विधायक कुणाल घोष ने पत्रकारों से बातचीत करते हुए कहा, 'इसका नाम 'बांग्ला' होना चाहिए। पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के कार्यकाल में पश्चिम बंगाल विधानसभा में इसका नाम बदलकर 'बांग्ला' करने का प्रस्ताव पास हुआ था। शिक्षाविदों और इतिहासकारों से बातचीत के बाद यह नाम तय किया गया था। 'पश्चिम बंगाल' नाम होने के कारण, वर्णमाला के क्रम में राज्य का स्थान बहुत नीचे आता था। राज्यों की राष्ट्रीय बैठकों में बंगाल की बारी सबसे आखिर में आती थी।
'सोनार बांग्ला' बनाने का वादा किया'
उन्होंने आगे कहा, 'नतीजतन, कोई असरदार काम नहीं हो पाता था। उन बैठकों में कोई ठोस नतीजा नहीं निकलता था। नाम बदलकर 'बांग्ला' करने से हमें कार्यवाही में बहुत पहले बोलने का मौका मिलता। चुनाव से पहले, जब पीएम मोदी और भाजपा के सभी नेता आए थे, तो उन्होंने क्या कहा था? उन्होंने 'सोनार बांग्ला' बनाने का वादा किया था। उन्होंने यह नहीं कहा था कि वे 'सोनार पश्चिम बंगाल' बनाएंगे। तो, चुनाव से पहले 'सोनार बांग्ला' का नारा था, लेकिन चुनाव के बाद 'बांग्ला' नाम मंजूर नहीं है?। पहली बात तो यह है कि जब 'पूर्व' ही नहीं है, तो 'पश्चिम' का कोई मतलब ही नहीं रह जाता।
विधायक ने आगे क्या कहा?
घोष ने क्या कहा,'देश जाग गया है। भाजपा ने महाराष्ट्र, हरियाणा, दिल्ली, बिहार और बंगाल में लोगों की मर्जी के खिलाफ सत्ता हासिल की है। भाजपा ने वोट लूटे, सत्ता में आई और अब चुनाव आयोग और ज्ञानेश कुमार को हथियार बनाकर लोगों पर ज़ुल्म कर रही है। देश की धर्मनिरपेक्ष, प्रगतिशील और लोकतांत्रिक ताकतें भाजपा के खिलाफ एकजुट हो गई हैं। भाजपा दिशाहीन हो गई है।'
बता दें कि नाम बदलने के लिए विधानसभा से विधेयक पारित होने के बाद भी संवैधानिक प्रक्रिया पूरी करनी होगी। केंद्र सरकार की मंजूरी के बाद संसद में आवश्यक प्रक्रिया होगी और अंततः राष्ट्रपति की मंजूरी मिलने पर ही राज्य का नाम आधिकारिक रूप से बदला जा सकेगा।