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यूपी के शेर क्या चिकन के बाद घास खाएंगे?

Mon, 27 Mar 2017 12:02 PM IST
वुसतुल्लाह खान, पाकिस्तान से/बीबीसी हिंदी डॉटकॉम के लिए
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लतीफा है कि खाड़ी के एक देश में पर्यटक के हाथ से कैमरा गिर पड़ा जब उसने देखा कि चिड़ियाघर के पिंजड़े में बंद शेर के आस-पास केले पड़े हैं और साथ वाले पिंजड़े में जो बंदर है वो गोश्त के टुकड़े सूंघ-सूघ कर सलाखों से रगड़ रहा है।
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पर्यटक ने चिड़ियाघर के डायरेक्टर से पूछा कि ये क्या तमाशा है? डायरेक्टर ने कहा कि दरअसल ये शेर बंदर का रूप अपनाकर और वो बंदर शेर के वीजे पर हमारे देश में घुसने की कोशिश करते हुए पकड़े गए। इसलिए अब हम शेर को केले देते हैं और बंदर को गोश्त।

लेकिन उत्तर प्रदेश के मांसखोर शेरों को ये समझाना बहुत मुश्किल है कि उन्हें अचानक से बीफ के बजाय चिकन क्यों मिलने लगा। मेरी लखनऊ के टुंडे बीफ कबाब के रसिया लोगों से हाथ जोड़कर विनती है कि अगर वो चिड़ियाघर में किसी शेर को चिकन खाते देखें तो उस पर रहम खाते हुए हरगिज बीफ का टुकड़ा न फेंकें।
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जैसा देश वैसा भेस

वरना ये शेर दादरी का अखलाक अहमद न बन जाए। ज्ञानी बताता है कि इंसानों की तरह जानवर भी जैसा देश वैसा भेस बनाने की काबिलियत रखते हैं। मसलन आपने देखा होगा कि सड़क पर घूमते गाय, बैल और बकरी को सब्जी न मिले तो कागज, कचरा और प्लास्टिक बैग भी खा लेते हैं। मगर वही कागज और बैग खाकर तुरंत मर क्यों जाते हैं, इस बारे में वैज्ञानिक भी चुप हैं।

कहते हैं कि शेर का पेट खराब हो तो वह घास पर मुंह मारता है। इसलिए उम्मीद है कि यूपी का शेर जब चिकन खा-खाकर पेट खराब कर लेगा तो फिर वो घास खाना शुरू कर देगा। कौन जानता है कि उसकी अगली नस्ल वेजिटेरियन पैदा हो और बीफ से उतनी ही नफरत हो जितनी किसी योगी को हो सकती है।
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डीएनए में मांसखोरी

मेरी अपनी रिसर्च बताती है कि गाय, बैल, भैंस वगैरह दिखने में तो जानवर हैं पर असल में वेजिटेबल हैं। गाय का बच्चा पैदा होते ही सिर्फ दूध पीता है और घास और चारा खाता है और इसी चारे से उसके टिशूज बनते हैं। लिहाजा, जिसे हम गाय, बैल या भैंस समझते हैं, वो दरअसल ही इसी वेजिटेबल की प्रोसेस्ड शक्ल है जो इस जानवर ने जिंदगी भर खाई। कोई भी ज्ञानी अगर किसी गाय, भैंस या बकरी के डीएनए में मांसखोरी का निशान साबित कर दे तो जो जाहिल की सजा, वही हमारी।

मगर मेरी ये वैज्ञानिक दलील कौन सुनेगा? शायद चेन्नई के आसिफ बिरयानी सेंटर में इस समय बीफ भंभोरने वाला अन्ना भी नहीं जो दरअसल सब्जी को मांस समझकर खा रहा है। यूपी में अवैध बीफ बेचने वालों का कोराबार बिलकुल बंद हो जाना चाहिए।

मगर पूरे स्टेट में सब्जी की भी कोई गैरकानूनी दुकान है कि नहीं? आप ये मसला सुलटाते रहिए। मैं तो आज अपने यार सुनील शंकर के यहां बीफ बिरयानी खाने जा रहा हूं। अजब राजस्थानी हैं। कराची में पीढ़ियों से आबाद हैं। बीफ खाता है और खुद को हिंदू भी समझता है। हालांकि मैंने उसे अपनी वेजिटेबल्ड बीफ की थिअरी अब तक नहीं बिताई।

 
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