अनुसूचित जाति और जनजाति कल्याण के लिए विधायी समितियां गठित करें राज्य सरकार: ओम बिरला
लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने अनुसूचित जातियों और अनुसूचित जनजातियों के कल्याण के लिए राज्यों से विधायी निकाय बनाने के लिए कहा। उन्होंने कहा कि भुवनेश्वर एजेंडा 2025 के तहत विभिन्न सुझाव प्राप्त हुए हैं और संबंधित संसदीय समिति उन्हें अमल में लाने के लिए केंद्र और राज्यों के समक्ष उठाएगी।
उन्होंने कहा कि औसतन संसदीय समिति की 70 से 80 प्रतिशत सिफारिशें सरकार द्वारा स्वीकार कर ली जाती हैं, जिससे कार्यपालिका को जवाबदेह और पारदर्शी बनाने में इसकी महत्ता पर प्रकाश पड़ता है। इस मुद्दे पर संसदीय समिति ने कई सशक्त निर्णय लिए हैं। इसमें 1.5 लाख से अधिक नौकरियों को नियमित करना और विभिन्न क्षेत्रों में आरक्षण का लाभ प्रदान करना शामिल है।
लोकसभा अध्यक्ष ने कहा कि इन निकायों की बैठक 25 वर्षों के बाद और पहली बार दिल्ली से बाहर आयोजित की गई थी। इसका उद्देश्य एक-दूसरे से सर्वोत्तम प्रथाओं को अपनाने के लिए विचार-विमर्श को बढ़ावा देना तथा हाशिए पर पड़े समुदायों के कल्याण के प्रयासों को सक्रिय करना है। ओम बिरला ने भी कहा कि भारत ने अनुसूचित जातियों और अनुसूचित जनजातियों के अधिकारों को मजबूत करने और यह सुनिश्चित करने के लिए व्यापक सुधार किए हैं कि वे वर्तमान आकांक्षाओं के अनुरूप हों।
उन्होंने कहा कि विपक्ष के सदस्यों को अपनी बात रखने की अनुमति है और वे अक्सर चर्चा के दौरान आवंटित समय से अधिक समय तक बोलते हैं। सदन को नियमों के अनुसार काम करना चाहिए। असहमति लोकतंत्र की ताकत है, लेकिन इसे गरिमापूर्ण तरीके से व्यक्त किया जाना चाहिए। उन्होंने विपक्षी दलों की हालिया मानसून सत्र के दौरान जानबूझकर सदन में व्यवधान डालने की प्रवृत्ति की आलोचना की।
दो दिवसीय सम्मेलन में संसदीय समिति के अलावा 19 राज्य विधानमंडल समितियों और एक केंद्र शासित प्रदेश की समिति के सदस्यों ने भाग लिया। सम्मेलन में ओडिशा के राज्यपाल हरि बाबू कंभमपति ने कहा कि इन समुदायों का कल्याण केवल नीति का प्रश्न नहीं है, बल्कि यह देश की प्रगति का भी पैमाना है, क्योंकि लोकतंत्र समानता, सम्मान, स्वतंत्रता और बंधुत्व के स्तंभों पर टिका है। उनका सशक्तीकरण कोई दान नहीं बल्कि लोकतंत्र का सार है।