रूस से भारत के तेल खरीदने पर ट्रंप के व्यापार सलाहकार पीटर नवारो के बेतुके बयान।
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अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के व्यापार मामलों के सलाहकार पीटर नवारो ने हाल ही के दिनों में भारत पर रूस से तेल खरीदने को लेकर कई बेबुनियाद आरोप लगाए हैं। अब नवारो ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर पोस्ट कर अपने दावों को और मजबूती से सिद्ध करने की कोशिश की है। हालांकि, ट्रंप प्रशासन के इस वरिष्ठ अफसर ने जो आरोप लगाए हैं, उन्हें लेकर उनकी खुद की जानकारी पर सवाल खड़े हो गए हैं।
ऐसे में यह जानना अहम है कि आखिर पीटर नवारो ने अब तक भारत पर क्या-क्या आरोप लगाए हैं? उनके आरोपों में कितना दम है? भारत के रिफाइनरी तंत्र को लेकर नवारों की जानकारी किस कदर अधूरी है? इसके अलावा ट्रंप प्रशासन के आरोपों से उलट तथ्यात्मक सच्चाई क्या है?
क्या हैं ट्रंप के व्यापार सलाहकार के आरोप?
पीटर नवारो का आरोप है कि भारत ने रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन की युद्ध मशीनरी को वित्तीय जीवनरेखा दी है। नवारो का कहना है कि नई दिल्ली अमेरिकी उपभोक्ताओं को उत्पाद बेचकर उनसे डॉलर जुटाता है और इन डॉलर के जरिए ही कम कीमत में रूसी कच्चा तेल खरीदता है। इतना ही नहीं ट्रंप के खास अधिकारी का कहना है कि अमेरिकी उपभोक्ता तो भारत के उत्पाद खरीदकर उसे डॉलर मुहैया कराता है, लेकिन भारत, उच्च टैरिफ और गैर-टैरिफ अवरोध लगाकर अमेरिकी निर्यातकों को लाभ नहीं देता।
ऐसे में सवाल-जवाब के जरिए पीटर नवारो के आरोपों की सच्चाई जानना भी जरूरी है।
सवाल-1: क्या भारत ने पुतिन को वित्तीय लाइफलाइन दी?
नहीं, रूस दुनिया का 10 फीसदी कच्चा तेल निर्यात करता है। अगर भारत उससे तेल खरीदना बंद कर दे और पश्चिम एशियाई देशों से तेल खरीदना शुरू कर दे तो बाजार में अचानक से मांग बढ़ जाएगी और आपूर्ति कम होने की वजह से कच्चे तेल के भाव 200 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच सकते हैं। यानी रूस से तेल खरीदकर भारत ने बाजारों को स्थिर रखने में मदद की। अमेरिका की पिछली सरकार में राजस्व मंत्री रहीं जैनेट येलेन ने भी तब भारत की भूमिका की तारीफ की थी।
सवाल-2: क्या भारत रूस से तेल खरीदने के लिए अमेरिकी डॉलर इस्तेमाल किए?
नहीं, भारत के रिफाइनर्स रूसी तेल खरीदने के लिए अमेरिकी डॉलर में लेन-देन नहीं कर रहे। यह खरीद तीसरे देशों के व्यापारियों के जरिए संयुक्त अरब अमीरात की मुद्रा- डिरहम या किसी अन्य देश की मुद्रा में होती है। किसी भी समय अमेरिकी सरकार ने भारत से रूसी तेल की खरीद पर रोक लगाने को नहीं कहा। भारत का रूस से व्यापार पूरी तरह वैध है और जी7 और यूरोपीय संघ के प्राइस-कैप के नियमों के अंतर्गत है।
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सवाल-3: क्या भारत तेल की कालाबाजारी में शामिल है?
ऐसा कोई कालाबाजार नहीं है। रूसी तेल ईरान या वेनेजुएला के तेल की तरह प्रतिबंधित नहीं है। इसे प्राइस-कैप के तहत बेचा जाता है। इस प्रणाली को खुद पश्चिमी देशों ने तैयार किया था, ताकि तेल से लाभ न हासिल किया जा सके। अगर अमेरिका, रूसी तेल को प्रतिबंधित करना चाहता तो वह उसे प्रतिबंधित कर देता। लेकिन उसने ऐसा नहीं किया, क्योंकि उसे बाजार में रूसी तेल चाहिए।
सवाल-4: क्या रूसी तेल के लिए लॉन्ड्रिंग का केंद्र बन गया है भारत?
नहीं, भारत दशकों से दुनिया का चौथा सबसे बड़ा तेल रिफाइनर रहा है। भारत कच्चे तेल को रिफाइन कर ईंधन को निर्यात करता है। इसी तरह से वैश्विक ढांचा बना रहा है। रूसी कच्चे तेल की खरीद कम करके यूरोप ने खुद को भारत के डीजल और जेट ईंधन पर निर्भर बनाया है। यह तेल बाजार में स्थिरता लाना है, न कि लॉन्ड्रिंग।
सवाल-5: क्या भारतीय रिफाइनर पुतिन को भेज रहे लाभांश?
गलत, भारत का 70 फीसदी रिफाइन्ड ईंधन भारत में ही रह जाता है, ताकि घरेलू मांगों को पूरा किया जा सके। रिलायंस की एक रिफाइनरी 2006 से ही निर्यात केंद्रित रही है। यानी रूस-यूक्रेन संघर्ष से काफी पहले से। भारत में घरेलू इस्तेमाल बढ़ने की वजह से रिफाइन्ड तेल का निर्यात कम हुआ है।
सवाल-6: क्या रूस की जंग को आर्थिक सहायता दे रहा भारत, अमेरिकी निर्यातकों पर लगा रहा टैरिफ?
भारत-अमेरिका के बीच व्यापार घाटे को लेकर दिए जा रहे तर्क बेबुनियाद हैं। अमेरिका बीते कई वित्तीय वर्षों से चीन, यूरोपीय संघ और मैक्सिको से व्यापार घाटा झेल रहा है। इस लिहाज से भारत से अमेरिका का करीब 50 अरब डॉलर का व्यापार घाटा तुलनात्मक रूप से कम है। एक और बात भारत अमेरिका से अरबों डॉलर के एयरक्राफ्ट, एलएनजी, रक्षा उपकरण और तकनीक खरीद रहा है।
सवाल-7: क्या भारत अमेरिकी रक्षा समझौतों को मुफ्त में पा रहा है?
नहीं, भारत जनरल इलेक्ट्रिक्स के साथ जेट इंजन्स का सह-उत्पादन कर रहा है। अमेरिका से एमक्यू-9 ड्रोन्स खरीद रहा है और क्वाड और हिंद-प्रशांत के रक्षा संबंधों को बढ़ाने की कोशिश कर रहा है। भारत इकलौता देश है, जो कि एशिया में सैन्य स्तर पर चीन का मुकाबला कर रहा है। यह अमेरिका के लिए सीधा कूटनीतिक लाभ है।
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सवाल-8: क्या यूक्रेन में शांति का मार्ग नई दिल्ली से होकर गुजरता है?
भारत लंबे समय से संयुक्त राष्ट्र (यूएन) में रूस-यूक्रेन युद्ध के कूटनीतिक हल की मांग करता रहा है। इस बीच यूरोप लगातार रूस से गैस खरीदने में जुटा रहा और अमेरिका अब भी उससे यूरेनियम आयात कर रहा है।
सवाल-9: तो सच क्या है?
भारत ने रूस को किसी तरह की आर्थिक सहायता नहीं दी है। भारत ने सिर्फ बाजारों को स्थिर रखा है और ईंधन की कीमतों को वहनीय बनाया है। इससे भारत और विश्व के लिए महंगाई भी नियंत्रित रही है।