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कोरोना की तीसरी लहर: लॉकडाउन और कर्फ्यू की आशंका से बढ़ेगा नौकरियां जाने का खतरा

Tue, 06 Jul 2021 05:26 PM IST
प्रतिभा ज्योति न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली,

सार

कोरोना की तीसरी लहर आने की आशंका ने एक बार फिर लोगों की चिंता बढ़ा दी है। डर इस बात का है कि क्या एक बार फिर अर्थव्यवस्था को चोट पहुंचेगी और लोगों की नौकरियां फिर से जाने का खतरा बढ़ गया है?

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प्रतीकात्मक फोटो - फोटो : पीटीआई
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विस्तार
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कोरोना की तीसरी लहर आने की आशंका ने एक बार फिर लोगों की चिंता बढ़ा दी है। डर इस बात का है कि क्या एक बार फिर अर्थव्यवस्था को चोट पहुंचेगी और लोगों की नौकरियां जाने का खतरा बढ़ गया है?

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भारतीय स्टेट बैंक (एसबीआई) ने अपनी रिपोर्ट में कहा है कि कोरोना वायरस की तीसरी लहर अगस्त महीने में आ सकती है, और सितंबर में अपने चरम पर होगी। यानी कोरोना महामारी की तीसरी लहर आई तो फिर लॉकडाउन या कोरोना कर्फ्यू लगाने जैसे हालत पैदा हो सकते हैं और एक बार फिर सब ठप्प पड़ सकता है। जिससे लोगों की नौकरियां जाने और बेरोजगारी दर बढ़ने की आशंका है।

करीब 1 करोड़ लोगों की नौकरी गई
मार्च के आखिर में जब कोरोना के दूसरी लहर ने रफ्तार पकड़ी तो अलग-अलग राज्यों में लॉकडाउन और कोरोना कर्फ्यू की शुरआत हो गई। इससे करीब एक करीब लोगों ने अपनी नौकरी गंवाई। सेंटर फॉर मॉनिटरिंग इंडियन इकोनॉमी यानी सीएमआईई का डेटा के मुताबिक दूसरी लहर की वजह से करीब एक करोड़ लोगों की नौकरियां चली गईं।
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सीएमआईई ने अप्रैल में 1.75 लाख घरों का राष्ट्रव्यापी सर्वेक्षण पूरा किया जिसमें केवल तीन प्रतिशत ने कहा कि आय में वृद्धि देखी गई, जबकि 55 प्रतिशत ने कहा कि उनकी आय में एक वर्ष में गिरावट आई, जिसमें कोरोना की दोनों लहरें जिम्मेवार है। 42 प्रतिशत ने कहा कि उनकी आय एक साल पहले की तरह ही रही। वहीं 97 फीसदी घरों की आय कम हो गई।
 
वहीं कोरोना की पहली लहर में राष्ट्रव्यापी लॉकडाउन के कारण मई 2020 में बेरोजगारी दर 23.5 प्रतिशत के रिकॉर्ड उच्च स्तर को छू गई थी। वहीं इसका आकलन यह भी है कि बेरोजगारी दर अप्रैल में 8 प्रतिशत थी जो मई में 12 प्रतिशत रही। जिन लोगों की नौकरियां गईं उन्हें नया काम मिलने में मुश्किल आई और हालात अभी तक नहीं सुधरे हैं।

नौकरी छूटने के लिए कोरोनावायरस की दूसरी लहर को जिम्मेदार माना जा रहा है। इसकी एक वजह यह भी बताई जा रही है अनौपचारिक क्षेत्र की नौकरियां तो जल्दी आ जाती हैं लेकिन बेहतर गुणवत्ता वाले रोजगार के अवसरों को वापस आने में एक साल लगता है।
 
पूर्ण लॉकडॉउन नहीं लगा, पर अर्थव्यवस्था पर असर पड़ा
एसबीआई के अध्यक्ष दिनेश कुमार खारा ने मई महीने में शेयरधारकों को अपने संबोधन में कहा था कि सरकार की रणनीतियों के बावजूद कोविड 19 महामारी की दूसरी लहर के कारण भारतीय अर्थव्यवस्था प्रभावित होगी।

चालू वित्त वर्ष की शुरुआत COVID-19 संक्रमण की अप्रत्याशित दूसरी लहर के साथ हुई। हालांकि इस बार की सरकार रणनीति यह रही कि पूर्ण लॉकडाउन न लगाया जाए और फिर भी अर्थव्यवस्था पर इसका प्रभाव महसूस किया गया।

 

लोगों की नौकरी खोने और कर्ज चुकाने में देरी होने से वित्तीय झटके महसूस किए गए। कुछ विशेषज्ञों का यह भी मानना है कि महामारी के कारण लोगों पर मनोवैज्ञानिक भय पैदा हुआ है जिससे उपभोक्ता खर्च करने से डर रहे हैं और यदि तीसरी लहर भी आई तो इससे उपभोक्ताओं का यह डर कायम रह सकता है। 

 
भारतीय रेलवे ने खूब कमाई की 
हालांकि कुछ सेक्टरों में कोरोना की दूसरी लहर के वावजूद वृद्धि देखी गई। रेल, वाणिज्य और उद्योग, उपभोक्ता मामलों के मंत्री पीयूष गोयल का कहना है कि भारत ने कोविड की दूसरी लहर के बावजूद अपनी पहली तिमाही में निर्यात में रिकॉर्ड वृद्धि की है। भारतीय रेलवे के इतिहास में अप्रैल-जून 2021 के बीच रेलवे माल भाड़ा अब तक का सबसे अधिक रहा है। 
 
एसबीआई की रिपोर्ट में कहा जा रहा है कि तीसरी लहर में, दूसरी लहर के मुकाबले ज्यादा लोग संक्रमित होंगे तो जाहिर है तीसरी लहर की आहट ने एक बार फिर सरकार और विशेषज्ञों के माथे पर चिंता की लकीर खींच दी है।

 

हालांकि अभी राज्य धीरे-धीरे पाबंदियों में ढील दे रहे हैं और आर्थिक गतिविधियों तेज हुई हैं, इसलिए विशेषज्ञों को उम्मीद है कि जैसे-जैसे अर्थव्यवस्था खुलती जाएगी स्थिति बेहतर होगी, लेकिन यह पूरी तरह से कब तक ठीक हो जाएगा इस बारे मे कुछ भी कहना जल्दबाजी होगी। ऐसे में यदि तीसरी लहर आती है तो अर्थव्यवस्था को संभलने में और वक्त लग सकता है।

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