केंद्र सरकार की तरफ से लागू किया गया लॉकडाउन 2.0 तीन मई को खत्म हो जाएगा। गृह मंत्रालय के अधिकारिक सूत्रों के अनुसार, चार मई से थोड़ी बंदिशों वाली ज्यादा आजादी लेने के लिए तैयार हो जाएं।
केंद्रीय गृह मंत्रालय में कोविड-19 महामारी के लॉकडाउन को लेकर हुई समीक्षा बैठक में भी यह बात सामने आई है कि करीब 147 जिले ऐसे हैं जो कोरोना संक्रमण के लिहाज से अभी खतरे से बाहर नहीं हैं। केंद्र ने जिन राज्यों में श्रमिकों के आवागमन को छूट दी है, वहां के अधिकतर जिले कोरोना संक्रमण से बाहर हैं।
हरियाणा के मुख्यमंत्री मनोहर लाल खट्टर के अनुसार, अभी राज्य के अंदर नए मरीज नहीं आ रहे हैं। जो भी संख्या बढ़ी है, वह बाहर से आने वाले लोगों के कारण है। गृह मंत्रालय के सूत्रों के अनुसार, चार मई से ग्रीन और ऑरेंज जोन में लगी पाबंदियों में काफी ढील दिए जाने की संभावना है।
ये ऐसे इलाके हैं, जहां गृह मंत्रालय ने पहले ही गैर-जरूरी सामानों एवं सेवाओं वाली दुकानों को खोलने की मंजूरी दे दी है। हालांकि अभी तक यह सीमा पचास फीसदी रखी गई है, लेकिन बाजारों और भीड़ की स्थिति के मुताबिक चार मई को इसे वर्गीकृत किया जाएगा।
ग्रीन व ऑरेंज जोन में वाणिज्यिक और निजी प्रतिष्ठानों को कई श्रेणियों के तहत छूट मिलेगी। गृह मंत्रालय ने सभी राज्यों व केंद्र शासित प्रदेशों को इस बाबत आदेश जारी किया है। इसमें 'दुकान और स्थापना अधिनियम' के तहत दर्ज छोटी कमर्शियल साइट शामिल हैं। इनके खुलने का एक समय तय किया जाएगा।
यह भी संभावित है कि हर इलाके की मार्केट के खुलने का समय अलग-अलग रखा जाए। ग्रीन व ऑरेंज जोन में अंतर जिला आवागमन भी शुरू किया जाएगा। अगर इन जोन के बीच में कोई रेड जोन पड़ता है तो वहां पर आवाजाही नहीं होगी।
प्राइवेट ट्रांसपोर्ट के संचालन के लिए एक लंबी चौड़ी नियमावली तैयार की जा रही है। जैसे कि गाड़ी की सैनिटाइज प्रक्रिया का सर्टिफिकेशन आदि। दो स्टेशनों के बीच कौन सी एजेंसी सैनिटाइज और सोशल डिस्टेंसिंग के नियमों का पालन सुनिश्चित करेगी। ये राहत हॉटस्पॉट या कंटेंनमेंट क्षेत्रों में नहीं दी जाएंगी।
गृह मंत्रालय ने कुछ शर्तों के साथ अब लॉकडाउन में फंसे लोगों के एक राज्य से दूसरे राज्य में जाने को मंजूरी दे दी है। जब ये लोग राज्य की सीमा पर पहुंचेंगे तो उनकी जांच होगी। उसके बाद वे किसी फैक्ट्री या दूसरे व्यवसाय में जा सकते हैं। संबंधित जिले के सीएमओ को इन लोगों की जांच करने की जिम्मेदारी सौंपी गई है।
किसे क्वारंटीन करना है और किसे जाने देना है, यह सब सीएमओ की देखरेख में होगा। जो लोग बड़े संस्थान में काम करने के लिए जाएंगे, उन्हें स्वास्थ्य विभाग यह प्रमाण पत्र देगा कि अब उन्हें कोई दिक्कत नहीं है। वे मास्क और सोशल डिस्टेंसिंग का पालन कर काम कर सकते हैं।
स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय द्वारा अधिसूचित मानक स्वास्थ्य प्रोटोकॉल के साथ-साथ कार्यस्थलों, औद्योगिक एवं व्यावसायिक प्रतिष्ठानों को इन दिशानिर्देशों का पालन करने की हिदायत दी गई है।
फैक्ट्री में किसी कर्मचारी के कोविड-19 से ग्रस्त पाए जाने की स्थिति में, वहां के मुख्य कार्यकारी अधिकारी को कारावास भेजने सहित कानूनी कार्रवाई जैसा कुछ नहीं होगा। हालांकि उन्हें सरकारी गाइडलाइन का पालन करना होगा।
केंद्र सरकार ने अपने सभी मंत्रालयों और विभागों में आरोग्य सेतु एप डाउनलोड करना अनिवार्य कर दिया है। सभी स्वायत्त और वैधानिक निकायों, सावर्जनिक क्षेत्रों के उपक्रमों के लिए भी यह निर्देश जारी किया गया है।
रेल मंत्रालय ने अपने 13 लाख कर्मचारियों से इस एप को डाउनलोड करने को कहा है। मानव संसाधन मंत्रालय ने शैक्षणिक संस्थाओं से जुड़े सभी लोगों, छात्रों और शिक्षकों को भी आरोग्य सेतु एप डाउनलोड करने का निर्देश दिया है।
वहीं, गृह मंत्रालय ने भी केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बलों के सभी जवानों को एप इंस्टॉल करने के लिए कहा है। कर्मी को दफ्तर में एंट्री से पहले एप पर स्टेटस चेक करना होगा। ‘सेफ’ या ‘लो रिस्क’ का स्टेटस दिखे तभी दफ्तर में प्रवेश करें। केंद्र ने कहा कि अगर हाई रिस्क या मॉडरेट स्टेटस दिख रहा है तो ऑफिस न जाएं।