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क्या जोर शोर से होगी ईवीएम की अग्निपरीक्षा?

Fri, 12 May 2017 11:57 AM IST
amarujala.com- Submitted by: आनंद
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इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीन के मुद्दे पर चुनाव आयोग की बुलाई सर्वदलीय बैठक दिल्ली में चल रही है। ईवीएम की विश्वसनीयता के दावों के बाद भी राजनीतिक दलों की चिंता बढ़ती जा रही है। इसे देखते हुए ही यह बैठक बुलाई गई है।
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चुनाव आयोग कई बार कह चुका है कि ईवीएम के साथ छेड़छाड़ नहीं हो सकती, लेकिन कई राजनीतिक दल इसे लेकर सवाल उठा रहे हैं। हाल ही में आम आदमी पार्टी ने दिल्ली की विधानसभा में ईवीएम जैसी एक मशीन के साथ छेड़छाड़ का प्रदर्शन किया।

आम आदमी पार्टी के प्रवक्ता आशुतोष का कहना है कि ऐसी कोई मशीन नहीं जिसके साथ गड़बड़ नहीं की जा सकती, इसलिए चुनाव आयोग को बैलेट पेपर से ही चुनाव कराना चाहिए। कई लोगों का कहना है कि चुनाव में हार का मुंह देखने के बाद आम आदमी पार्टी को ईवीएम में दोष नजर आया है, आम आदमी पार्टी जब तक चुनाव जीत रही थी तब तक सब ठीक था।
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ईवीएम पर संदेह

हालांकि बीबीसी से बातचीत में आशुतोष ने कहा, "जब भिंड की मशीन ने दिखाया कि सारे वोट बीजेपी को जा रहे हैं, जब धौलपुर से खबर आई कि सारे वोट बीजेपी को जा रहे हैं, जब 90 फीसदी मुसलमान आबादी वाली महाराष्ट्र की सीट से बीजेपी जीती तब हमने सवाल उठाया। हमने विधानसभा में ईवीएम जैसी मशीन टेंपर कर के दिखाई।" आशुतोष ने कहा कि 2014 के लोकसभा चुनाव पर भी पार्टी ने उंगली नहीं उठाई थी, लेकिन हाल में हुई घटनाओँ को देखने के बाद उसे ईवीएम पर शंका हुई है।

पहले चुनाव के दौरान हिंसा, बूथ लूटना और जबर्दस्ती वोट डालने की भी खूब खबरें आती थी। इसी को कम करने के लिए इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीन का विकल्प सुझाया गया था। हालांकि आम आदमी पार्टी का कहना है कि बूथ लूटने या फिर बैलेट पेपर फाड़ने जैसी घटनाएं कानून-व्यवस्था से जुड़े मसले हैं और उन्हें ईवीएम लागू करने का आधार बताना उचित नहीं है।

आशुतोष ने कहा, "पहले चुनाव में हिंसा होती थी, लोगों की जान जाती थी लेकिन अब तो ऐसा नहीं होता, क्योंकि कानून व्यवस्था पहले से ठीक हो गई है। कानून व्यवस्था को दुरुस्त करना अलग बात है, लेकिन लोकतंत्र में अगर लोगों को शक हो जाए कि उनका वोट उनके उम्मीदवार को नहीं जा रहा तो ये ज्यादा बड़ा संकट है।"
 

बैलेट पेपर से चुनाव की मांग

उत्तर प्रदेश के चुनाव में हार का मुंह देखने वाली बहुजन समाज पार्टी को भी ईवीएम पर संदेह है और उसने भी सर्वदलीय बैठक में बैलेट पेपर से चुनाव कराने की मांग रखी है। पार्टी की दलील है कि जब तकनीकी रूप से विकसित देशों में बैलेट पेपर से वोट होते हैं तो भारत में क्यों नहीं।

बहुजन समाज पार्टी के प्रवक्ता गया चरण दिनकर ने कहा कि चुनाव अधिकारी तकनीकी रूप से इतने दक्ष नहीं कि ईवीएम के हेर-फेर का पता लगा सकें। दिनकर का कहना है, "इतिहास पढ़ कर लोग आईएस बन जाते हैं। वही जिले में निर्वाचन अधिकारी होते हैं। इसका मतलब ये नहीं है कि वो ईवीएम और उसके अंदरूनी हिस्से के बारे में जानकारी रखें।''

उन्होंने, ''ईवीएम को टेंपर किया जा सकता है। कोई माइक्रोसॉफ्ट का इंजीनियर इसके बारे में बता सकता है, लेकिन जो तकनीक नहीं जानता वो इसके बारे में कैसे बता सकता है।" 1989 में जब पहली बार इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीन का प्रयोग हुआ तो इसे बूथ लूटने और उस वक़्त की तमाम चुनावी गड़बड़ियों को दूर करने का तरीका माना गया।

धीरे-धीरे इसे पूरे देश में लागू करने की क्षमता हासिल हुई। उस वक़्त चुनाव आयुक्त रहे एसएस धनोआ कहते हैं कि बैलेट पेपर से चुनाव में होने वाली दिक्कतों को दूर करने के लिए ईवीएम आई और अब फिर से बैलेट पेपर की ओर लौटना उचित नहीं होगा।
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बैलेट की ओर लौटा जा सकता है?

एसएस धनोआ का कहना है, "ये मशीन इलेक्ट्रॉनिक थी और उसमें इंसानी दखल नहीं दिया जा सकता था, एक बार वोट डला तो वो सुरक्षित हो गया। पंजाब में चुनाव के दौरान बेअंत सिंह की पत्नी को मिले बहुत सारे वोट, चुनाव अधिकारी ने अवैध बता दिए, ईवीएम में ये संभव नहीं।

बैलेट की दिक्कतों को दूर करने के लिए ईवीएम आई, अब बैलेट को फिर से लाना गलत होगा।" ईवीएम का विरोध करने वाले राजनीतिक दल बैलेट पेपर से कम पर मानने को तैयार नहीं, लेकिन चुनाव आयोग के लिए ईवीएम को हटाना इतना आसान भी नहीं होगा।

राजनीतिक पार्टियों की चिंता बड़ी है और चुनाव आयोग उन्हें भरोसा दिलाना चाहता है लेकिन अब तक इसका कोई रास्ता सामने नहीं आया है। सर्वदलीय बैठक से इसका कोई हल निकलेगा इसकी तो उम्मीद कम है, लेकिन शायद दोनों पक्ष एक-दूसरे को अपनी मुश्किलों का अहसास करा सकें।
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