राहुल गांधी के आरक्षण पर दिए गए एक बयान पर भाजपा बिफर पड़ी है। उसका कहना है कि कांग्रेस ओबीसी, अनूसूचित जाति और अनुसूचित जनजातियों को मिलने वाले आरक्षण को समाप्त करने की कोशिश कर रही है। भाजपा के अनुसार, कांग्रेस ने कर्नाटक में और तृणमूल कांग्रेस ने दलित जातियों को मिलने वाले आरक्षण को मुसलमानों को देने का काम किया है। अब वह पूरे देश में इसी तरह का काम करने का सपना देख रही है। पार्टी ने दोहराया है कि भाजपा कांग्रेस को कभी ऐसा नहीं करने देगी।
दरअसल, राहुल गांधी ने विदेश में अपने एक बयान में कहा था कि भारत में असमानता है। यदि कभी भारत में असमानता और सामाजिक भेदभाव समाप्त हो जाएगा तब आरक्षण को समाप्त करने पर विचार किया जा सकता है, लेकिन भाजपा राहुल गांधी के इस बयान को ले उड़ी और उसने यही बताया कि कांग्रेस दलितों और जनजातियों को मिलने वाले आरक्षण को समाप्त करने पर विचार कर रही है।
कांग्रेस पर चौतरफा हमला
भाजपा के सांसद संबित पात्रा ने गुरुवार को एक प्रेस कांफ्रेंस कर कहा कि कांग्रेस आरक्षण को समाप्त करने पर विचार कर रही है। उन्होंने कहा कि भाजपा के रहते हुए वे ऐसा कभी नहीं कर पाएंगे। मायावती भी राहुल गांधी के इस बयान पर उनको घेर चुकी हैं। केंद्रीय मंत्री जीतनराम मांझी ने भी कांग्रेस नेता के इस बयान की आलोचना की है। यानी इस मुद्दे पर कांग्रेस नेता पर चौतरफा हमला होने लगा।
कांग्रेस ने भांपा नुकसान, किया डैमेज कंट्रोल
कांग्रेस नेताओं को भी जल्द ही समझ में आ गया कि राहुल गांधी के इस बयान से नुकसान हो सकता है। यदि पिछड़े और दलित जातियों के लोगों के बीच यह बात घर कर गई तो उसे बड़ा नुकसान हो सकता है। इसी समय हरियाणा और जम्मू-कश्मीर में विधानसभा चुनाव चल रहे हैं और चंद दिनों के बाद महाराष्ट्र और झारखंड के भी विधानसभा चुनाव होने हैं, कांग्रेस को इस बयान से बड़ा नुकसान हो सकता है।
संभवतः यही कारण है कि राहुल गांधी ने बाद में अपने बयान पर स्पष्टीकरण करते हुए कहा कि कांग्रेस आरक्षण को समाप्त करने के बारे में नहीं सोच रही है। उलटे वे देश में आर्थिक भागीदारी बढ़ाने और सामाजिक समरसता लाने के लिए आरक्षण की 50 फीसदी की सीमा को समाप्त करने के बारे में सोच रहे हैं। इसे कांग्रेस का 'डैमेज कंट्रोल' माना जा रहा है।
क्यों किया डैमेज कंट्रोल?
2015 के बिहार विधानसभा चुनाव के दौरान राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ प्रमुख मोहन भागवत ने अपने एक बयान में आरक्षण की समीक्षा किए जाने की बात कह दी थी। कहा जाता है कि भागवत के इस बयान के कारण भाजपा को भारी नुकसान हुआ। यदि कांग्रेस इस मामले को नहीं संभाल पाती है तो उसे भी इसका नुकसान हो सकता है। पिछले लोकसभा चुनाव में कांग्रेस ने संविधान का मुद्दा उठाकर ही ओबीसी, दलित और आदिवासी मतदाताओं के बीच अपनी पैठ बनाई है। यदि वह इस मामले को नहीं संभाल पाती है तो उसे इस बढ़त को भी खोना पड़ सकता है। इसे देखते हुए ही कांग्रेस नेता पार्टी का पक्ष रखने के लिए सामने आ गए।
क्या कभी आरक्षण खत्म हो सकता है?
राजनीतिक विश्लेषक धीरेंद्र कुमार ने अमर उजाला से कहा कि इस समय देश की राजनीति में दो ही प्रमुख विचारधाराएं हैं। एक का प्रतिनिधित्व भाजपा कर रही है तो दूसरे का प्रतिनिधित्व कांग्रेस कर रही है। लेकिन जहां तक आरक्षण की बात है, दोनों दल इस मुद्दे पर करीब-करीब एक समान स्टैंड रखते हैं। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) प्रमुख मोहन भागवत कह रहे हैं कि दलित-ओबीसी जातियों को तब तक आरक्षण दिया जाना चाहिए जब तक कि वे स्वयं इसे लेने से इनकार न कर दें। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी सहित भाजपा लगातार कह रही है कि आरक्षण को कभी कोई समाप्त नहीं कर सकता।
दूसरी विचारधारा में राहुल गांधी स्वयं कह रहे हैं कि वे आरक्षण की सीमा को बढ़ाने पर विचार कर रहे हैं। वे कह रहे हैं कि जब तक समाज में समानता नहीं आती, आरक्षण जारी रहना चाहिए। ऐसे में दोनों ही दल ओबीसी-दलितों को आरक्षण बरकरार रखने के पक्ष में हैं। ऐसे में आरक्षण के समाप्त होने की कोई संभावना दूर-दूर तक नजर नहीं आती।
धीरेंद्र कुमार के अनुसार, राजनीतिक नुकसान को देखते हुए कोई दल इसे समाप्त करने के बारे में सोच भी नहीं सकता, लिहाजा आरक्षण को फिलहाल कोई खतरा नहीं है।
राजनीतिक मजबूरी नहीं, सामाजिक आवश्यकता
राजनीतिक विश्लेषक विवेक सिंह कहते हैं कि यह केवल राजनीतिक मजबूरी की बात नहीं होनी चाहिए। हमें आरक्षण की मूल अवधारणा को समझना चाहिए। यह सामाजिक तौर पर पिछड़े वर्गों को आगे बढ़ाने के लिए बनाया गया है। जिन लोगों को भी यह लगता है कि आरक्षण के कारण देश का नुकसान हो रहा है और अगड़ी जातियों के योग्य युवाओं को अवसर नहीं मिल रहे हैं, उन्हें यह समझना चाहिए कि 1990 के दशक में देश में दो सबसे बड़े परिवर्तन हुए। पहला परिवर्तन देश की अर्थव्यवस्था का उदारीकरण था जिसने संभावनाओं के नए द्वार खोल दिए। दूसरा सबसे बड़ा परिवर्तन इसी दौर में समाज के कमजोर वर्गों को आरक्षण मिलना था।
इन दोनों कारणों के सम्मिश्रण से समाज के कमजोर वर्गों को भी देश की अर्थव्यवस्था में भागीदारी देने का अवसर मिला। विवेक सिंह के अनुसार, यदि आज हम वैश्विक आर्थिक ताकत बनकर उभर रहे हैं तो इसका श्रेय केवल सीमित वर्ग को नहीं दिया जा सकता। इसमें समाज के हर वर्ग ने मजबूत भूमिका निभाई है और आरक्षण के कारण कमजोर वर्गों को इसमें भागीदारी देने का ज्यादा अवसर मिला है। यदि देश ने आरक्षण व्यवस्था को न अपनाया होता और समाज के कमजोर वर्गों को भी बेहतर भागीदारी का अवसर न मिलता तो अर्थव्यवस्था की क्या स्थिति होती, इस पर विचार किया जा सकता है।