पार्टी कार्यकर्ताओं की लंबी मांग को पूरा करते हुए आखिरकार कांग्रेस ने प्रियंका को कमान दे दी है। प्रियंका की एंट्री उस वक्त में हुई है जब राहुल गांधी के नेतृत्व में कांग्रेस ने तीन विधानसभा चुनावों में जीत हासिल की है। प्रियंका गांधी-नेहरू खानदान की 12वीं सदस्य है जिसने राजनीति में कदम रखा है। उनकी एंट्री से पार्टी कार्यकर्ताओं में नई ऊर्जा का संचार हुआ है।
अटकलों का बाजार गर्म है और कहा जा रहा है कि अब राहुल और प्रियंका के सक्रीय राजनीति में आने के बाद सोनिया गांधी चुनाव नहीं लड़ेंगी और मार्गदर्शक की भूमिका निभाएंगी। कयास लगाए जा रहें हैं कि प्रियंका गांधी उनकी जगह रायबरेली से चुनाव लड़ सकती हैं।
12वीं सदस्य ने मारी धमाकेदार एंट्री
आजादी से लेकर अबतक नेहरू-गांधी परिवार के लोगों ने देश की राजनीति पर छाप छोड़ी है। मोतीलाल नेहरू, जवाहरलाल नेहरू, विजयलक्ष्मी, इंदिरा गांधी, फिरोज गांधी, संजय गांधी, राजीव गांधी, मेनका गांधी, राहुल गांधी, वरुण गांधी के बाद गांधी-नेहरू परिवार से प्रियंका ने 12वें सदस्य के तौर पर राजनीति में एंट्री की है। प्रियंका को पूर्वांचल का कमान उनके स्वाभाव की तरह ही सादगी से की गई।
पर्दे के पीछे रहकर किया काम
पार्टी में बिना कोई पद हासिल किए भी प्रियंका गांधी पार्टी के लिए काम करती रही हैं। वह चुनाव के दौरान अक्सर पार्टी के लिए प्रचार में कमान संभाल चुकी हैं। राजस्थान और मध्यप्रदेश में मुख्यमंत्री के चयन में उनकी बड़ी भूमिका बताई जाती है। एक नजर प्रियंका के योगदान पर-
1989: बताया जाता है कि प्रियंका ने सबसे पहले अपने पिता राजीव गांधी के साथ प्रचार में हिस्सा लिया था।
जनवरी 1998: श्रीपेरंबदूर में अपनी मां सोनिया गांधी का साथ देते हुए उन्होंने एक छोटा भाषण भी दिया था।
अक्टूबर 1999: लोकसभा चुनावों में अपने मित्र और कांग्रेस उम्मीदवार सतीश शर्मा के लिए प्रचार करते हुए उन्होंने भाजपा के अरुण नेहरू के लिए कहा था कि क्या आप उसको वोट दोगे जिसने मेरे पिता के पीठ में छुरा भोंका। राजीव गांधी के कजन अरुण नेहरू ने कांग्रेस का साथ छोड़कर 1980 में वीपी सिंह के जन मोर्चा का दामन थाम लिया था।
मई 2004: लोकसभा चुनाव में अपनी मां सोनिया गांधी और भाई राहुल गांधी के लिए रायबरेली और अमेठी में चुनाव प्रचार की कमान संभाली।
अप्रैल 2009: चुनाव प्रचार के दौरान तब के गुजरात के मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी को जवाब देते हुए प्रियंका ने कहा था कि क्या मैं आपको उम्रदराज लगती हूं? मोदी ने कांग्रेस को उम्रदराज पार्टी कहा था। इसके अलावा उन्होंने अपने चचेरे भाई वरुण गांधी को विवादित बयान देने के बाद गीते पढ़ने की सलाह दी थी।
2014: भाजपा के प्रधानमंत्री पद के उम्मीदवार नरेंद्र मोदी और प्रियंका गांधी के बीच नीच राजनीति को लेकर जुबानी जंग छिड़ी। बाद में नरेंद्र मोदी ने खुद को पिछड़ी जाति का बताया था।
2017: उत्तरप्रदेश में सपा के साथ गठबंधन करने और सीटों के बंटवारें में अहम भूमिका निभाई।
2018: अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी के सत्र का आयोजन देखा। इसमें राहुल को राष्ट्रीय अध्यक्ष बनाने पर मुहर लगी थी।
2019: पार्टी ने महासचिव और उत्तरप्रदेश पूर्व का प्रभारी नियुक्त किया।