लोकसभा में अमित शाह (फाइल फोटो)
- फोटो : संसद टीवी
जंतर-मंतर पर युवाओं के नीट पेपर लीक प्रर्शन के बाद सरकार लगातार अपना इकबाल मजबूत करने पर काम कर रही है। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी इसको लेकर लगातार संवेदनशील बने हैं। संघ प्रमुख मोहन भागवत ने जेन-जी के साथ चर्चा में इसी तरह के फ्लेवर दिया। सबसे बड़ा बदलाव संसद भवन में दिखाई दे रहा है। संसदीय कार्यमंत्री किरण रिजिजू ने बड़ी पहल की।किरण रिजिजू ने लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी से दूसरी बार बात की।
एफसीआरए बिल के दौरान मोर्चा संभाल सकते हैं गृहमंत्री
सरकार संसद में एफसीआरए बिल (फारेन कांट्रीब्यूशन रेगुलेशन अमेंडमेंट बिल) लाना चाहती है। इस विधेयक के 12 अगस्त को सदन में पेश किए जाने का प्रस्ताव है। किरण रिजिजू के संकेत से लग रहा है कि सरकार इस बिल पर चर्चा के दौरान केन्द्रीय गृहमंत्री अमित शाह द्वारा सदन में बयान देने पर विचार कर रही है। माना जा रहा है कि इसके बाद सत्ता पक्ष फ्रंट फुट पर खेलना शुरू कर देगा।
बड़े बदलाव की आहट
शिक्षा मंत्रालय में माहौल थोड़ा बदला-बदला है। कानून मंत्रालय में फिजां थोड़ी बदली है। भाजपा के बड़े नेताओं को पता नहीं है कि आगे क्या होगा? मंत्रालय के अधिकारी रुटीन में अपना काम कर रहे हैं। शीर्ष स्तर के एक अधिकारी का कहना है कि अगले दो-तीन महीने में आपको सरकार जनता के बीच में दिखाई देगी। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के बयानों में भी जेन-जी की स्वीकार्यता काफी बढ़ी है।
भाजपा के संगठन से जुड़े सूत्र का कहना है कि चुनी हुई सरकार की विशेषता है। वह जनता से जुड़े विषय को उच्च प्राथमिकता देती है। इसमें प्रधानमंत्री का कोई जवाब नहीं है। सूत्र का कहना है कि आप किसान आंदोलन को देख लीजिए। केन्द्र सरकार ने कानून वापस लेने का निर्णय लिया था। मोदी सरकार किसी भी विषय को नाक का सवाल नहीं बनाती। उसकी पहली प्राथमिकता जनहित का आदर है।