रिलायंस जियो कंपनी के खिलाफ साजिश के अंदेशे की जांच गृह मंत्रालय करेगा। पुलिस ने इस प्रकरण की रिपोर्ट गृह मंत्रालय को भेज दी है। पुलिस ने बताया कि आरोपियों से ठीक से पूछताछ नहीं हुई। जिसके चलते उनसे रिमांड पर लेकर पुलिस दोबारा पूछताछ होगी। इनके गिरोह से कौन कौन जुड़े, इसकी जांच कराई जाएगी।
आईजी मेरठ सुजीत पांडेय ने रिलायंस जियो कंपनी के टावर में लूटपाट के पीछे बड़ी साजिश होना बताया था। जिसके अनुसार विदेशी कंपनी के निशाने पर रिलायंस जियो टावर के अत्याधुनिक उपकरण थे। इसका खुलासा आरोपियों ने जेल जाने से पहले भी किया।
विदेशी कंपनियों से आरोपियों की इतनी बड़ी डीलिंग कैसे हुई, इसकी जांच कराना बेहद जरूरी है। जिसके चलते इस प्रकरण की रिपोर्ट गृह मंत्रालय को भेजी गई है। गृह मंत्रालय की एक टीम इस प्रकरण की जांच करेगी।।
इंडिया नेटवर्किंग सिस्टम होता प्रभावित
reliance jio
आईजी ने बताया कि 4-जी नेटवर्क के जो अत्याधुनिक उपकरण आरोपियों ने लूटे थे, उनसे इंडिया का तमाम नेटवर्किंग सिस्टम प्रभावित होता। अंदेशा विदेशी कंपनियों द्वारा इंडिया के नेटवर्किंग सिस्टम को खोखला करना है। आरोपियों ने पुलिस को बताया कि रिलायंस जियो की तमाम यूनिट विदेशी कंपनियों के निशाने पर थीं। विदेशी कंपनियों के आरोपियों से सीधे संपर्क थे।
इसका खुलासा करना अभी बाकी
आईजी के अनुसार करोड़ों रुपये कीमत के रिलायंस जियो कंपनी के अत्याधुनिक उपकरण लूटने के बाद आरोपी कहां रखते थे और लूट की प्लानिंग कैसे बनाते थे, इसका खुलासा आरोपियों ने नहीं किया। आरोपियों का विदेशी कंपनियों से कैसे संपर्क हुआ और उनका क्या संबंध था, इसकी जानकारी भी पुलिस को नहीं बताई गई। इसकी जांच होगी।
हाईटेक लुटेरों में छुपा गहरा राज
पुलिस ने बताया कि इन हाईटेक लुटेरों में गहरा राज छुपा है। गिरोह के कई सदस्य रिलायंस व अन्य टेलीकॉम कंपनी में अच्छी जॉब पर थे। उनका परिवार भी संपन्न है। फिर क्यों अपराध में उतरे। बड़ा सवाल यह भी है कि ऑनलाइन डीलिंग का सिस्टम भी विदेशी कंपनियों ने आरोपियों को बताया।
सात साथियों की है तलाश
इस मामले में पुलिस को इस गैंग के सात और साथियों की तलाश है। पुलिस के अनुसार इनमें रविकांत पुत्र सत्यपाल सिंह निवासी शास्त्रीनगर और धर्मेंद्र पुत्र आरबी शर्मा निवासी पीवीटी स्टाफ क्वार्टर, नई दिल्ली के नाम सामने आ चुके हैं। जिनकी तलाश में शुक्रवार को कई जगहों पर दबिश दी गई।
इनके अलावा पांच अन्य बदमाश की तलाश है। वहीं, पुलिस ने इस प्रकरण में बृहस्पतिवार को गिरफ्तार सभी आठों आरोपियों चंदन पांडेय निवासी राजीव नगर पटना बिहार, अपूर्व श्रीवास्तव निवासी अमेठी, पवन निवासी बलिया, संदीप निवासी अमेठी, उत्कर्ष जोशी निवासी रामनगर, नैनीताल, क्षितिज गुप्ता निवासी अमेठी, देवेंद्र उर्फ रिंकू निवासी मंडावली नई दिल्ली और भरत विशाल सिंह निवासी वाराणसी को जेल भेज दिया।
क्यों नहीं भेजा सामान
आरोपियों ने पूछताछ में बताया कि विदेशी कंपनियों को वह लूटे हुए अत्याधुनिक उपकरण ऑनलाइन बेचते थे। जबकि आरोपी 25 दिन तक लूटे हुए सामान को रखे थे। करोड़ों का सामान रखने के साथ पल्लवपुरम में भी जियो के टावर पर डकैती का प्लान उन्होंने बना लिया। सवाल है कि आखिर इतने महंगे सामान को लूटने के बाद आरोपी क्यों इतने दिन रोकते थे