विश्व स्वास्थ्य संगठन के महानिदेशक के वरिष्ठ सलाहकार डॉक्टर ब्रूस एइलवॉर्ड के पास पोलियो, इबोला जैसी गंभीर बीमारियों से लड़ने का 30 अनुभव है। अब एइलवॉर्ड कोरोना जैसी महामारी के खिलाफ भी रणनीति बना रहे हैं। एइलवॉर्ड ने फरवरी 2020 में डब्ल्यूएचओ और चीन के संयुक्त कार्यक्रम का नेतृत्व किया था, जिसका मकसद कोरोना के असर का विश्लेषण करना था।
चीन की राजधानी बीजिंग में कोरोना वायरस से संबंधित जुटाई जानकारी को एइलवॉर्ड ने अब दुनिया के साथ साझा किया है। आइए कुछ सवाल—जवाब के जरिये समझते हैं कि कोरोना को कैसे रोका जा सकता है और भविष्य में कोरोना के कबतक रहने की संभावना है...
क्या कोविड-19 का संक्रमण आगे भी जारी रहेगा?
डॉ एइलवॉर्ड के मुताबिक भविष्य में कुछ समय तक कोरोना का असर संक्रमित इलाकों में देखा जा सकता है, उन इलाकों में भी देखा जा सकता है जो संक्रमित नहीं है और उन जगहों पर भी जहां वायरस के फैलने की शुरुआत हुई। चीन ने जनवरी की शुरुआत में ही वायरस की पहचान कर ली थी।
चीन की तरफ से वायरस के संक्रमण को रोकने के लिए कई कदम उठाए गए। वायरस के केंद्र बिंदु वुहान शहर को लॉकडाउन किया गया। अब मार्च के अंत में संभावना है कि चीन कोरोना के कहर के बाहर निकल सकता है तो ये मान कर चले कि लगभग तीन महीने का समय लग सकता है।
जब आप यूरोपीय देश, उत्तरी अमेरिका और मध्य पुर्वी देशों को देखेंग तो यहां वायरस बहुत तेजी से फैला है। अभी इन देशों को जाएंगे इस चुनौती से बाहर निकलने के लिए कई महीनों का समय और लग सकता है। वहीं अफ्रीका और भारत के उपमहाद्वीप में कोरोना की शुरुआत हुई है, हालांकि इन देशों में कुछ ही मामले सामने आए हैं लेकिन वायरस फैलने की गति तेज है।
क्या कोरोना हमेशा के लिए खत्म हो जाएगा?
दक्षिणी गोलार्द्ध (साउथन हेमिस्फेयर) पर जबतक कुछ अलग या बड़ा नहीं होगा तब तक ये वायरस एक समान गति से फैलता रहेगा लेकिन सवाल यह है कि कुछ अलग क्या होगा? क्या यह वायरस पूरी तरह से खत्म हो जाएगा? या फिर एक स्थाई बीमारी के साथ हमें कोरोना से लड़ना पड़ेगा?
कई जानकारों का मानना है कि किसी जगह से कोरोना के संक्रमण के खत्म होने का अबतक कोई सबूत नहीं मिला है। ये वायरस बहुत आसानी से मानव सभ्यता में फैल रहा है लेकिन वायरस से निपटने के लिए देश-विदेशों की भूमिका महत्व रखती है। अगर हर देश में रोजाना टेस्ट होते रहेंगे और लोगों को आइसोलेशन में रखा जाएगा तो वायरस को कुछ हद तक कम करने में मदद मिल सकती है।
भविष्य में कोरोना वायरस का संक्रमण खत्म होगा या नहीं ये पूरी तरह से देश और समाज पर निर्भर करता है। कोई भी देश कोरोना से लड़ने के लिए क्या कदम उठा रहा है, क्या लॉकडाउन जैसी प्रक्रिया को अपनाया जा रहा है, ऐसी तमाम कोशिशों से ही कोरोना के फैलाव को कम किया जा सकता है।
इटली में मृत्यू दर इतनी ज्यादा क्यों है?
मृत्यू दर कुछ तत्वों पर आधारित होती है। अगर इटली की बात की जाए तो ये जगजाहिर है कि जापान के बाद इटली सबसे बुढ़ा शहर है, हालांकि लोग ये भूल चुके हैं। इटली की जनसंख्या में बुजुर्गों की ज्यादा तादाद है और वृद्ध लोगों में बीमारी ज्यादा गंभीर रुप से फैल रही है इसलिए वहां मौत का आंकड़ा ज्यादा है।
डब्ल्यूएचओ की टेस्ट...टेस्ट...टेस्ट, अपील को कितने देशों ने गंभीर लिया है?
ऐसा करने वाले सिर्फ तीन देश है, जिनमें चीन, दक्षिणी कोरिया और सिंगापुर शामिल हैं।
स्वस्थ लोग भी कोरोना की चपेट में आ रहे हैं?
ये सबसे भयावह स्थिति है कि कोरोना से युवाओं में भी तेजी से असर पड़ा है। इटली में आईसीयू में भर्ती 10 फीसदी जनता में 20, 30 और 40 साल के उम्र वाले लोग है। ऐसे लोगों में भी कोरोना के लक्षण देखे गए हैं जिन्हें पहले कोई बीमारी ही नहीं थी। ये बात समझ पाना मुश्किल है कि युवाओं में कोरोना के गंभीर लक्षण दिख रहे हैं और युवाओं की मृत्यू भी हो रही है।
युवाओं को क्या संदेश देना चाहेंगे?
COVID-19 अब तक की सबसे खतरनाक बीमारी है, इसको गंभीरता से लेना पड़ेगा। ये युवाओं के साथ साथ बुजुर्गों और समाज के लिए भी कष्टदायी है। आप किसी ऐसे देश में नहीं रहते हैं जहां कोरोना का असर नहीं है, आप एक बड़े समुदाय का हिस्सा है, आप संक्रमित चेन का हिस्सा है। अगर आप कोरोना से संक्रमित हैं तो ये केवल आपके लिए ही नहीं बल्कि समाज के लिए खतरनाक है।
लॉकडाउन के बाद भी किसी देश की प्राथमिकता क्या होनी चाहिए?
किसी भी देश की प्राथमिकता संक्रमित लोगों या संदिग्ध लोगों की जांच करना है। इसके बाद संक्रमित व्यक्ति को आइसोलेशन में रखें और अंत में क्वारंटीन की सुविधा उपलब्ध कराएं।
कोरोना का अंत कैसे होगा?
कोरोना की हार इंसानियत की जीत पर निर्भर करती है लेकिन सवाल ये है कि कितनी तेजी से इस वायरस के फैलने को रोके जाने के लिए कदम उठाए जाएंगे। ये पूरी तरह से आम जनता के धैर्य और सहयोग पर निर्भर करता है कि वायरस को रोकने के लिए लोग कितनी मदद कर रहे हैं।