हरियाणा और महाराष्ट्र विधानसभा चुनाव परिणाम आ चुके हैं। भाजपा दोनों ही राज्यों में सरकार बनाने की तैयारी कर रही है। लेकिन बावजूद इसके भाजपाई खेमे में मायूसी है। कारण स्पष्ट है कि भाजपा इन दोनों ही राज्यों में मजबूत वापसी की उम्मीद कर रही थी, लेकिन दोनों ही राज्यों में उसके प्रदर्शन में कमी आई है।
वर्ष 2014 में प्रचंड बहुमत के साथ जीत दर्ज करने के बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का विजयी रथ दिल्ली में आकर ठहर गया था। पांच साल बाद वर्ष 2019 में परिस्थितियां एक बार फिर लगभग उसी तरह की हैं। पीएम मोदी ने लोकसभा का चुनाव बड़े बहुमत के साथ जीता है। ऐसे में एक बार फिर यह सवाल खड़ा हो गया है कि क्या दिल्ली एक बार फिर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के विजयी रथ के सामने आकर खड़ी हो जाएगी?
आज के हरियाणा और महाराष्ट्र विधानसभा चुनाव में भाजपा के प्रदर्शन में आई कमी ने इन संभावनाओं को एक बार फिर चर्चा में ला दिया है। माना जा रहा है कि हरियाणा चुनाव परिणाम दिल्ली विधानसभा चुनाव पर भी एक हद तक अपना असर डालेगा।
सबसे अहम सवाल यह है कि भाजपा यहां किन मुद्दों पर चुनाव लड़ेगी? एक बार फिर वह इस चुनाव में राष्ट्रीय मुद्दों को उछालेगी जो महाराष्ट्र और हरियाणा में अपेक्षाकृत बेअसर रहे हैं या स्थानीय मुद्दे उठाएगी जिस पर अरविंद केजरीवाल उसे चुनौती दे रहे हैं।