महाराष्ट्र की एक अदालत ने अहम फैसला सुनाते हुए अलग रह रहे पति से दूसरा बच्चा चाहने वाली पत्नी का अनुरोध स्वीकार कर लिया है। इसके अंतर्गत अदालत ने दंपति को सहायक प्रजनन तकनीक (एआरटी) विशेषज्ञ से सलाह करने का निर्देश दिया है। बता दें कि एआरटी पद्धति मुख्य रूप से बांझपन को दूर करने के लिए इस्तेमाल की जाती है और इसमें शुक्राणु दान सहित कई तरीकों को अपनाया जाता है।
नांदेड़ की अदालत ने इस मामले में बच्चे को जन्म देना महिला का मौलिक मानवाधिकार बताया। इसके तहत अदालत ने महिला और उसके पति को एक महीने के भीतर एआरटी विशेषज्ञ से मिलने का निर्देश दिया। महिला और उसका पति दोनों ही पेशे से डॉक्टर हैं।
दंपति ने 2010 में शादी की थी और उनका एक बच्चा है। बाद में उनके संबंधों में खटास आ गई थी और पति ने 2017 में एक अदालत में तलाक की अर्जी दायर की थी। नांदेड़ की रहने वाली 35 साल की महिला ने परिवार अदालत में याचिका दायर करके वैवाहिक संबंध बहाली का अनुरोध किया था। उसका कहना था कि वह अलग रह रहे पति से एक और बच्चा चाहती है क्योंकि उनके पहले बेटे का भाई या बहन होना चाहिए।