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विधवा को ससुर की संपत्ति से मिलेगा भरण-पोषण?: शीर्ष कोर्ट का बड़ा फैसला, कहा- पति की मौत का समय मायने नहीं...

Tue, 13 Jan 2026 08:46 PM IST
निर्मल कांत न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली।

सार

सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि पति की मृत्यु के बाद विधवा होने वाली महिला को ससुर के निधन के बाद भी उनकी संपत्ति से भरण-पोषण का अधिकार है। कोर्ट ने यह स्पष्ट किया कि मृतक के सभी वारिसों की जिम्मेदारी है कि वे संपत्ति से आश्रितों का पालन-पोषण करें।  कोर्ट ने इस कानून को स्पष्ट करते हुए क्या कहा, पढ़िए-
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सुप्रीम कोर्ट - फोटो : एएनआई (फाइल)
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विस्तार
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सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को एक अहम फैसला सुनाया। शीर्ष कोर्ट ने कहा कि यदि किसी महिला के पति की मृत्यु उसके ससुर के निधन के बाद होती है और वह विधवा हो जाती है, तो भी उसे ससुर की संपत्ति से भरण-पोषण का अधिकार मिलेगा। जस्टिस पंकज मिथल और जस्टिस एसवीएन भट्टी की बेंच सुनवाई कर रही थी। बेंच ने कहा कि पति की मृत्यु का समय, चाहे वह ससुर के मरने से पहले हो या बाद में, महिला की 'निर्भर' स्थिति तय करने में कोई मायने नहीं रखता। यह 1956 के हिंदू दत्तक ग्रहण एवं भरण-पोषण अधिनियम तहत लागू होता है। 
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जस्टिस मिथल ने फैसले को आसान शब्दों में समझाते हुए कहा, 'मृतक हिंदू के सभी वारिसों की यह जिम्मेदारी है कि वे मृतक की संपत्ति से उसके आश्रितों का भरण-पोषण करें।' कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया, 'मृतक हिंदू के पुत्र की कोई भी विधवा, अधिनियम की धारा 21(7) के तहत आश्रित मानी जाएगी और धारा 22 के तहत भरण-पोषण का दावा करने का अधिकार रखती है।'
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पूरा मामला कहां से शुरू हुआ?
यह मामला मृतक महेंद्र प्रसाद की संपत्ति से जुड़े पारिवारिक विवाद के कारण सामने आया। महेंद्र प्रसाद का दिसंबर 2021 में निधन हो गया था। उनके पुत्रों में से एक रंजीत शर्मा का भी मार्च 2023 में निधन हो गया। रंजीत की मृत्यु के बाद उनकी विधवा गीता शर्मा ने अपने ससुर की संपत्ति से भरण-पोषण के लिए परिवार न्यायालय में याचिका दायर की।

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परिवार न्यायालय ने खारिज किया था दावा
परिवार न्यायालय ने शुरू में उनका दावा खारिज कर दिया। कोर्ट ने कहा कि वह ससुर की मृत्यु के समय विधवा नहीं थीं और इसलिए आश्रित नहीं मानी जा सकतीं। हालांकि, हाईकोर्ट ने यह फैसला पलट दिया, जिसके बाद परिवार के अन्य सदस्यों ने सुप्रीम कोर्ट में अपील दायर की। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि हाईकोर्ट का फैसला गैरकानूनी नहीं था। शीर्ष कोर्ट ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट यह मानता है कि मृतक के पुत्र की विधवा की याचिका योग्य है और परिवार न्यायालय को इसे कानून के अनुसार जांचना चाहिए।

कोर्ट ने कहा कि पुत्र या अन्य कानूनी वारिसों की जिम्मेदारी है कि वे मृतक की संपत्ति से सभी आश्रितों का भरण-पोषण करें। इसमें वे सभी लोग शामिल हैं, जिनका पालन-पोषण करना मृतक का कानूनी और नैतिक कर्तव्य था।


 
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