विदेशी अंशदान विनियमन संशोधन विधेयक 2026 को 13 अगस्त को लोकसभा और राज्यसभा की मंजूरी के बाद संयुक्त संसदीय समिति (जेपीसी) के पास भेज दिया गया। समिति में दोनों सदनों के सांसद होंगे और उसे शीतकालीन सत्र के पहले सप्ताह के आखिरी दिन तक अपनी रिपोर्ट लोकसभा में देनी है।
ऐसे में सवाल उठता है कि एफसीआरए क्या है? विधेयक की संयुक्त संसदीय समिति में कितने सदस्य होंगे? संयुक्त संसदीय समिति क्या होती है? संसद में समिति व्यवस्था कब शुरू हुई? संयुक्त संसदीय समिति कैसे बनती है?समिति का अध्यक्ष कौन होता है? समिति विधेयक की जांच कैसे करती है?क्या जेपीसी ने पहले कानूनों और नीतियों पर असर डाला है?आइए जानते हैं।
विदेशी अंशदान विनियमन अधिनियम यानी एफसीआरए यह तय करता है कि भारत में कोई गैर सरकारी संगठन, न्यास, शैक्षणिक संस्थान, धार्मिक संगठन, कंपनी या व्यक्ति विदेश से मिलने वाला धन किन शर्तों पर प्राप्त कर सकता है और उसका इस्तेमाल कैसे कर सकता है।