पश्चिम बंगाल में सत्ता परिवर्तन के बाद पिछले 54 दिनों के भीतर राज्य की राजनीति तेजी से बदली है। नई सरकार ने एक तरफ चुनावी वादों को पूरा करने की शुरुआत की, वहीं दूसरी ओर पूर्ववर्ती तृणमूल कांग्रेस सरकार के दौरान बनी कई व्यवस्थाओं में बड़े बदलाव किए। इस दौरान तृणमूल नेताओं का पाला बदलना, ममता के विधायक और सांसदों का टूटना सुर्खिया में रहा। इतना ही नहीं गिरफ्तारियां, अवैध कब्जों पर बुलडोजर कार्रवाई, सीमा सुरक्षा, अवैध प्रवासियों के खिलाफ अभियान और कई नई योजनाओं ने भी राष्ट्रीय स्तर पर सुर्खियां बटोरी। हालांकि अब तृणमूल नेताओं पर अंडे फेंकने और विरोध प्रदर्शन की घटनाएं भी सुर्खियों में हैं।
सत्ता परिवर्तन के बाद सबसे ज्यादा चर्चा तृणमूल कांग्रेस नेताओं के खिलाफ हो रहे हमले की है। कई जगहों पर नेताओं का घेराव हुआ, विरोध प्रदर्शन हुए और कुछ मामलों में अंडे फेंकने की घटनाएं भी सामने आईं। भाजपा का दावा है कि यह किसी राजनीतिक अभियान का हिस्सा नहीं बल्कि पिछले 15 वर्षों में जनता के भीतर जमा नाराजगी का परिणाम है। भाजपा नेताओं का कहना है कि अब लोग खुलकर विरोध दर्ज करा रहे हैं, जो पहले संभव नहीं था।
वहीं तृणमूल कांग्रेस इस दावे को पूरी तरह खारिज करती है। पार्टी का आरोप है कि उसके नेताओं को सुनियोजित तरीके से निशाना बनाया जा रहा है। तृणमूल का कहना है कि विरोध के नाम पर राजनीतिक हिंसा को बढ़ावा दिया जा रहा है और विपक्षी नेताओं को डराने की कोशिश की जा रही है।
महुआ मोइत्रा ने आरोप लगाया कि भाजपा कार्यकर्ताओं ने उनके कार्यक्रम के दौरान अंडे फेंके और गो बैक के नारे लगाए। उन्होंने इस घटना का वीडियो भी साझा किया। उन्होंने यह भी कहा कि वो इस मामले में कानूनी कार्रवाई करेंगी। जरूरत पड़ी तो हाई कोर्ट और सुप्रीम कोर्ट भी जाएंगी।
30 मई को तृणमूल कांग्रेस के राष्ट्रीय महासचिव अभिषेक बनर्जी जब सोनारपुर में कथित चुनाव बाद हिंसा से प्रभावित परिवारों से मिलने पहुंचे थे, तब उनके काफिले के पास कथित तौर पर अंडे और पत्थर फेंके गए। इस दौरान धक्का-मुक्की और नारेबाजी भी हुई, जिसमें अभिषेक बनर्जी को मामूली चोट लगने की बात सामने आई। घटना के बाद उन्होंने इसे राजनीतिक हिंसा और राज्य प्रायोजित आतंक करार दिया। वहीं भाजपा ने इन आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि यह जनता के विरोध का परिणाम था।
पिछले कुछ सप्ताह में कई प्रमुख तृणमूल नेताओं के साथ ऐसी घटनाएं सामने आई हैं। सबसे पहले 30 मई को पार्टी के राष्ट्रीय महासचिव अभिषेक बनर्जी पर सोनारपुर दौरे के दौरान कथित रूप से अंडे और पत्थर फेंके गए। इसके बाद 13 जून को कृष्णानगर में सांसद महुआ मोइत्रा पर अदालत परिसर के बाहर विरोध प्रदर्शन हुआ। हाल ही में नदिया जिले के पलाशी में पार्टी कार्यक्रम के दौरान भी महुआ मोइत्रा पर कथित रूप से अंडे फेंके गए और उनके खिलाफ नारेबाजी हुई।
इसी तरह 15 जून को तृणमूल नेता कुणाल घोष पर कोलकाता स्थित ममता बनर्जी के आवास के बाहर अंडे फेंके गए। इसके अलावा युवा नेता सौमित्र बनर्जी पर भी पुलिस हिरासत के दौरान अंडे फेंके जाने की घटना सामने आई। इन घटनाओं ने यह बहस तेज कर दी है कि बंगाल में विरोध प्रदर्शन का तरीका तेजी से बदल रहा है।
इन घटनाओं को दो अलग-अलग नजरियों से देखा जा रहा है। भाजपा इसे जनता की स्वाभाविक प्रतिक्रिया बता रही है, जबकि तृणमूल कांग्रेस का कहना है कि यह विपक्षी दलों द्वारा माहौल बिगाड़ने की कोशिश है। लगातार हो रहे विरोध प्रदर्शनों ने यह जरूर संकेत दिया है कि सत्ता परिवर्तन के बाद राजनीतिक माहौल पहले जैसा नहीं रहा।
हालांकि यह भी सच है कि केवल कुछ घटनाओं के आधार पर पूरे राज्य की जनता की भावना का निष्कर्ष निकालना संभव नहीं है। अलग-अलग क्षेत्रों में राजनीतिक परिस्थितियां अलग हैं। इसलिए इन घटनाओं को लेकर दोनों दल अपनी-अपनी राजनीतिक व्याख्या कर रहे हैं और आने वाले समय में यह मुद्दा और अधिक चर्चा में रह सकता है।
भाजपा का कहना है कि नई सरकार ने सत्ता संभालते ही भ्रष्टाचार, अवैध कब्जों, सिंडिकेट राज और सीमा सुरक्षा जैसे मुद्दों पर कार्रवाई शुरू कर दी है। पार्टी का दावा है कि जनता इसी बदलाव के पक्ष में खड़ी है और विरोध की घटनाएं उसी माहौल का हिस्सा हैं। भाजपा नेताओं का कहना है कि अब प्रशासन निष्पक्ष तरीके से काम कर रहा है और कानून सभी पर समान रूप से लागू किया जा रहा है।
वहीं तृणमूल कांग्रेस का आरोप है कि नई सरकार राजनीतिक बदले की भावना से काम कर रही है। पार्टी का कहना है कि उसके नेताओं की गिरफ्तारियां, विरोध प्रदर्शन और हमले लोकतांत्रिक व्यवस्था के लिए ठीक संकेत नहीं हैं। तृणमूल का दावा है कि जनता आने वाले समय में इन घटनाओं का जवाब लोकतांत्रिक तरीके से देगी। फिलहाल बंगाल की राजनीति में आरोप-प्रत्यारोप का दौर जारी है। हालांकि ये जरूर देखना ऐसी घटनाओं पर सरकार कितनी सख्त है? और वो क्या कार्रवाई करेगी?