बंबई उच्च न्यायालय ने गुरुवार को अनाधिकृत फेरीवालों के खिलाफ कानून के प्रावधानों को पूरी तरह लागू करने में विफल रहने के लिए महाराष्ट्र सरकार को फटकार लगाई। अदालत ने कहा कि सरकार बृहन्मुंबई नगर निगम (बीएमसी) के साथ आरोप-प्रत्यारोप में लगी हुई है, जबकि लोगों को परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है।
उच्च न्यायालय ने समय-समय पर पारित उसके आदेशों का पालन न करने पर निराशा जताई। न्यायालय ने कहा कि अगर उसे मजबूर किया जाता तो वह अपने अवमानना के क्षेत्राधिकार का इस्तेमाल करने से नहीं हिचकिचाएगा।
न्यायमूर्ति एम. एस. सोनक और न्यायमूर्ति कमल खाटा की पीठ ने कहा कि राज्य के अधिकारी रेहड़ी पटरी दुकानदार (आजीविका संरक्षण एवं रेहड़ी-पटरी विक्रेता गतिविधि विनियमन) अधिनियम, 2014 के प्रावधानों को लागू करने में विफल रहे हैं। जबकि लोग महानगर में सार्वजनिक सड़कों पर अनाधिकृत फेरीवालों और विक्रेताओं के खतरों को झेल रहे हैं।
'हमारे आदेशों का पालन नहीं किया जा रहा'
पीठ ने कहा कि यह दुर्भाग्यपूर्ण और दुखद है कि सरकार ने 2014 से संसदीय कानून लागू नहीं किया है। इसके बजाय सहयोग न करने को लेकर बीएमसी के साथ आरोप-प्रत्यारोप का खेल चल रहा है। अदालत ने कहा, "यह बहुद दुर्भाग्यपूर्ण और दुखद है कि न केवल कानून को लागू नहीं किया जा रहा है, बल्कि समय-समय पर पारित हमारे आदेशों का भी पालन नहीं किया जा रहा है।"
अदालत ने पूछा- यह बेबसी क्यों है?
अदालत ने कहा, "यह बेबसी क्यों है? राज्य सरकार का कहना है कि बीएमसी मदद नहीं कर रहा है। बीएमसी किसी और को दोषी ठहराएगी। हर कोई परेशान है। हमें जवाब दीजिए कि जब तक आपकी योजना लागू नहीं होती तब तक आप आम आदमी की समस्या को कैसे कम करेंगे।"
'हम घोड़े को जलधारा के पास ले जा सकते हैं लेकिन...'
पीठ ने राज्य सरकार से 30 सितंबर से पहले ऐसी योजना तैयार करने को कहा। उच्च न्यायालय ने कहा कि अगर मजबूर किया जाता है तो वह अपने अवमानना के क्षेत्राधिकार का उपयोग करने से पीछे नहीं हटेगा।अदालत ने कहा, "हम घोड़े को जलधारा के पास तो ले जा सकते हैं, लेकिन हम उसे पानी नहीं पिला सकते। हम कार्रवाई करने में संकोच नहीं करेंगे। लेकिन पहले हमें कुछ व्यावहारिक समाधान के साथ आने की जरूरत है।"