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Budget 2021 देखकर क्यों उछला बाजार, अर्थशास्त्रियों को उम्मीद- रंग दिखाएगा मूल ढांचे में निवेश का करिश्मा

Wed, 03 Feb 2021 12:27 AM IST
Kuldeep Singh अमित शर्मा, डिजिटल ब्यूरो, नई दिल्ली

सार

  • अर्थशास्त्रियों के मुताबिक बजट में सरकार की मजबूरियां साफ दिखाई पड़ीं, लेकिन इंफ्रास्ट्रक्चर में निवेश से बाजार में मांग बढ़ेगी। कई प्रमुख क्षेत्रों में नौकरियों के अवसर पैदा होंगे।
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शेयर बाजार - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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बजट में सीधे तौर पर नौकरियों के सृजन का कोई सीधा उपाय नहीं किया गया है, लेकिन अर्थशास्त्रियों को उम्मीद है कि मूल ढांचे में निवेश से बाजार में मांग बढ़ेगी और कई अहम क्षेत्रों में नौकरियों के नए अवसर पैदा होंगे। सड़कों और बंदरगाहों के निर्माण पर जोर देने से कोर सेक्टर के 30 से ज्यादा औद्योगिक क्षेत्रों को बढ़ावा मिलेगा तो स्क्रैप पॉलिसी से ऑटो सेक्टर में मांग बढ़ेगी।

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इन्हीं कारणों को देखते हुए बाजार ने बजट पर बेहद सकारात्मक प्रतिक्रिया दिखाई है। हालांकि, विशेषज्ञों का मानना है कि शिक्षा और रक्षा क्षेत्र में और अधिक निवेश की जरूरत है जो दीर्घावधि में सरकार के लिए नए असेट्स का निर्माण करते हैं।

ताइवान की चाओयंग यूनिवर्सिटी ऑफ टेक्नॉलॉजी में अर्थशास्त्र के प्रोफेसर डॉ. नागेंद्र कुमार शर्मा ने अमर उजाला से कहा कि वर्तमान परिस्थितियों में केंद्र सरकार ने एक बेहतर बजट पेश किया है। कोरोना काल में जब पूरे विश्व की अर्थव्यवस्था दबाव में है, सरकार के पास धन जुटाने के लिए ज्यादा विकल्प नहीं थे।
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अतिरिक्त टैक्स लगाने की नीति भी बहुत उचित नहीं कही जा सकती थी। मजबूरन सरकार ने विनिवेश करने, आईपीओ से पैसा जुटाने और बजट घाटे को 9.5 फीसदी के रिकॉर्ड स्तर तक बढ़ जाने को भी स्वीकार करते हुए बाजार में ज्यादा खर्च करने की नीति अपनाई। 

एमएसएमई सेक्टर को 15,700 करोड़ रुपये की बूस्टर डोज दी गई है, लेकिन देश में एमएसएमई की भारी संख्या को देखते हुए यह बहुत कम है। स्टील, लोहा, तांबा और अन्य प्रमुख धातुओं के मूल्यों में कमी की गई है साथ ही निर्यात में बढ़ोतरी के लिए टैक्स की कमी की गई है।

इससे मशीनों के निर्माण में लगी एमएसएमई इकाइयों को भारी मदद मिलेगी। सरकार के इस कदम से देश में सबसे ज्यादा रोजगार देने वाले क्षेत्र को मजबूती मिलेगी। अगर नीतियों का सही क्रियान्वयन यह देश की अर्थव्यवस्था को पटरी पर लाने में अहम भूमिका निभा सकता है।

15 साल पुराने व्यावसायिक वाहनों और 20 साल पुराने निजी वाहनों को सड़कों से हटाने का निर्णय ऑटो सेक्टर में जान फूंकने वाला है। इससेे लगभग एक करोड़ वाहन सड़कों से हट जाएंगे और नई तकनीकी से युक्त बेहतर वाहनों की खरीद होगी। इससे देश पर पेट्रोल-डीजल के भार में कमी आएगी और पर्यावरण शुद्धता भी बढ़ेगी।

साफ दिखी सरकार की मजबूरी
डॉ. नागेंद्र कुमार शर्मा के मुताबिक बजट में सरकार की मजबूरी भी साफ दिखाई पड़ रही है। चीन-पाकिस्तान सीमा पर तनाव के बावजूद सरकार ने रक्षा क्षेत्र में नाम मात्र की वृद्धि की है। शिक्षा जैसे अहम क्षेत्र में 6000 करोड़ की कटौती की है। धन जुटाने के उसके पास विकल्प भी काफी सीमित दिख रहे हैं। लिहाजा धन जुटाने के लिए पब्लिक सेक्टर की कंपनियों को बेचने और बीमा कंपनियों के जरिए पब्लिक से धन जुटाने का विकल्प आजमाया गया है।

मौजूदा समय में यह सरकार की आर्थिक मजबूरी को भी दिखाता  है, लेकिन शिक्षा क्षेत्र में कमी को किसी तरह सही नहीं ठहराया जा सकता क्योंकि बेहतर मानव संसाधन सरकार की भविष्य में ज्यादा आत्मनिर्भरता और बेहतर आय के आधार बनते हैं। जो देश आने वाले समय में वैश्विक ताकत बनने के सपने देखता हो, वह अपने मानव संसाधन में निवेश को कम करने का जोखिम नहीं उठा सकता।
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