अशोक गहलोत का यह सवाल ज्यादा कीमती है। वह भाजपा की राष्ट्रीय कार्यकारिणी पर सवाल उठा रहे हैं। गहलोत का कहना है कि भाजपा अपनी राष्ट्रीय कार्यकारिणी में महागठबंधन पर चिंता कर रही है। उसकी चिंता यह है कि महागठबंधन होगा कि नहीं? चलेगा या नहीं? इस पर भाजपा चिंता क्यों कर रही है। चिंता कर रही है तो जवाब भी दे दे?
गहलोत ने कहा कि आज तक जो सरकार सत्ता में रही है, वह अपनी राष्ट्रीय कार्यकारिणी में देश की सामाजिक, आर्थिक स्थिति, देश के हालात, मंहगाई, जनता की परेशानी, कानून व्यवस्था के मुद्दे पर चर्चा करती है। गहलोत ने कहा कि यह मैं पहली बार देख रहा हूं कि जनता वाली पार्टी बीजेपी को इसकी चिंता ही नहीं है। कांग्रेस अध्यक्ष सवाल उठा रहे हैं कि प्रधानमंत्री चुप क्यों हैं और भाजपा है कि अपनी राष्ट्रीय कार्यकारिणी में बैठकर विपक्ष की चिंता कर रही है?
भारत बंद के बाद आए दो मंत्री
विपक्ष के भारत बंद के आह्वान और इसके असर दिखाने के बाद केंद्र सरकार के कानून मंत्री रवि शंकर प्रसाद और पेट्रोलियम रसायन एवं प्राकृतिक गैस मंत्री धर्मेन्द्र प्रधान मीडिया के सामने आए। प्रेसवार्ता की। रविशंकर प्रसाद ने इसमें जहानाबाद में बच्ची की भारत बंद के दौरान मौत के विषय को उठाया। उन्होंने भारत बंद को राजनीतिक हिंसा से जोड़ा।
वहीं धर्मेन्द्र प्रधान ने तेल की कीमतों के बढ़ने के कारण गिनाए और इन्हें काबू में कर पाने से हाथ खड़े कर दिए। एक तरह से केंद्र सरकार न तो भारत बंद की नैतिकता पर सवाल उठा सकी, न ही इस तरह के बंद के आह्वान को गलत ठहरा सकी और न ही इसके पीछे के राजनीतिक उद्देश्य का गुब्बारा फोड़ सकी। शाम होते-होते भाजपा के हाथ एक मुद्दा जरूर लगा। नेशनल हेराल्ड केस का। दिल्ली उच्च न्यायालय ने अपने फैसले में सोनिया गांधी और राहुल गांधी द्वारा 2011-12 के उनके कर निर्धारण से जुड़ी फाइल को दोबारा खोलने को चुनौती देने वाली याचिका खारिज कर दिया। इसी पर भाजपा के प्रवक्ता सांबित पात्रा ने प्रेस वार्ता की जिसका बाद रणदीप सुरजेवाला ने राजनीतिक जवाब दे दिया।
एक दिन का भारत बंद जब ट्रेड यूनियन करती हैं तो देश के अर्थशास्त्री 2015 के बाद से इससे 18-25 हजार करोड़ रुपये के नुकसान का आकलन करते आए हैं। ट्रेड यूनियन के इस बंद में बैंक, परिवहन(रेल, भूतल, हवाई), पर्यटन, उद्योग आदि प्रभावित होते हैं।
21 दलों के सहयोग से 10 सितंबर को आयोजित बंद में व्यापारिक प्रतिष्ठान से लेकर काफी कुछ बंद रहा है। नुकसान का आकलन इससे कम नहीं रहा होगा। हालांकि कांग्रेस पार्टी ने भारत बंद को तार्किक नहीं ठहराया है। पार्टी के नेताओं का कहना है कि वह प्रधानमंत्री मोदी को देश की जनता का गुस्सा दिखाना चाहते थे। वहीं अभी इस मामले में सरकार और भाजपा के हाथ खाली हैं।