अक्षय तृतीया पर खरीदारी करते लोग
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सोने की आसमान छूती कीमतों के बीच अक्षय तृतीया पर सोने की ब्रिकी कम रहने का अनुमान है। सोने की कीमत इस समय प्रति 10 ग्राम 60,000 रुपए हो गई है। इसके चलते लोग इसकी खरीदारी करने से हिचक रहे हैं। जानकारों का कहना है कि इस बार अक्षय तृतीया पर सोने की बिक्री फीकी रह सकती है। पिछले साल की तुलना में इस बार अक्षय तृतीया पर सोने की बिक्री 20-30 फीसदी कम रह सकती है। महंगाई बढ़ने से लोग उन्हीं चीजों की खरीदारी को वरीयता दे रहे हैं, जिनके बिना उनका काम नहीं चल सकता है।
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वैसे अक्षय तृतीया पर सोने की मांग के संबंध में कोई आधिकारिक आंकड़ा तो उपलब्ध नहीं है, मगर बाजार पर नजर रखने वाले लोगों का मानना है कि औसत मांग 15-20 टन रहती है। पिछले साल अक्षय तृतीया पर सोने की मांग मजबूत रही थी, मगर इस साल यह कम रह सकती है। इसमें बढ़ती महंगाई बड़ी बाधा साबित हो रही है। महंगाई उस समय और लोगों के उत्साह पर पानी फेर देती है, जब उन्हें लगता है कि कीमतें कम नहीं होने वाली हैं। इससे हतोत्साहित होकर लोग खर्च कम करने लगते हैं।
इंदौर सराफा बाजार एसोसिएशन से जुड़े व्यापारियों का कहना है कि अक्षय तृतीया पर सोने की बिक्री नरम रह सकती है। गुरु अस्त होने के कारण इस बार अक्षय तृतीया पर विवाह मुहूर्त नहीं हैं। इससे अक्षय तृतीया पर सोने की बिक्री पर सीधा असर हो सकता है। सोने की बढ़ती कीमतों से भी मामला बिगड़ रहा है और लोग आभूषण दुकानों पर जाने से कतरा रहे हैं। अक्षय तृतीया खरीदारी के लिए एक बड़ा अवसर जरूर होता है, मगर मुहूर्त को लेकर असमंजस और बढ़ती कीमतों से सोने की बिक्री पिछले साल की तुलना में कम से कम 25 फीसदी तक कम रह सकती हैं। इस साल अक्षय तृतीया शनिवार शाम से शुरू हो रही है, मगर त्योहारों से जुड़ी कई रस्में रविवार को पूरी की जाएंगी। शुभ मुहूर्त को लेकर उलझन की स्थिति रंग में भंग डाल सकती है।
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पीडब्यूसी ने उपभोक्ताओं के मिजाज को समझने के लिए एक सर्वेक्षण किया था। इसमें कहा गया है कि भारत में 63 फीसदी लोग गैर-जरूरी चीजों पर खर्च में कमी कर रहे हैं। इस सर्वेक्षण में यह भी कहा गया कि अगले छह महीनों में ज्यादातर लोग खर्च और कम कर देंगे। जून 2022 में ऐसा ही एक सर्वे किया था, इसमें सभी श्रेणियों में नियोजित खर्च में भारी कमी देखने को मिली है। सर्वेक्षण में कहा गया है कि ऐशो-आराम, महंगे उत्पाद, यात्रा और फैशन सहित विभिन्न खंडों में अगले छह महीनों के दौरान उपभोक्ताओं द्वारा किए जाने वाले खर्च में काफी कमी आ सकती है। सोना उन वस्तुओं में शामिल है, जिसकी खरीदारी में अभी से कमी आने लगी है।