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क्या गृह मंत्रालय के संयुक्त सचिव को कथित भ्रष्टाचार के आरोप में हटाया गया है? सीबीआई कर रही है जांच

Wed, 25 Sep 2019 07:25 PM IST
Harendra Chaudhary जितेंद्र भारद्वाज, अमर उजाला
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गृह मंत्रालय पहुंचा प्रतिनिधिमंडल - फोटो : ANI
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गृह मंत्रालय में संयुक्त सचिव के पद पर तैनात एक अधिकारी, जिन्हें पिछले सप्ताह ही सर्विस एक्सटेंशन मिली थी, को कार्यमुक्त कर दिया गया है। अब सवाल यह उठ रहा है कि क्या उक्त अधिकारी के खिलाफ कथित भ्रष्टाचार का कोई आरोप था। गत दिनों सीबीआई ने गृह मंत्रालय में सेक्शन आफिसर (एसओ) के पद पर तैनात धीरज कुमार सिंह को 16 लाख रुपये की रिश्वत लेते हुए रंगे हाथ गिरफ्तार किया था। बताया जा रहा है कि धीरज कुमार सिंह संयुक्त सचिव रहे डॉ. आर के मितरा की पुलिस ब्रांच में ही सेक्शन अफसर थे। सीबीआई इस मामले की जांच कर रही है।

दो करोड़ रुपये रिश्वत देने की पेशकश

सूत्र बताते हैं कि इस मामले की कड़ियां सत्ता के बड़े केंद्रों से जुड़ रही हैं। सेक्शन अफसर की गिरफ्तारी के बाद और जांच एजेंसी की प्रारंभिक रिपोर्ट के आधार पर संयुक्त सचिव को करीब डेढ़ साल पहले ही सेवा मुक्त कर दिया गया है। बता दें कि सीबीआई ने पिछले दिनों गृह मंत्रालय के एसओ धीरज कुमार सिंह को 16 लाख रुपये की रिश्वत के साथ रंगे हाथों गिरफ्तार किया था। आरोप है कि धीरज कुमार सिंह ने सार्वजनिक क्षेत्र की एक कंपनी से जुड़े मामले की जांच को बंद करने के लिए सीबीआई में डीआईजी के पद पर कार्यरत एक अधिकारी को दो करोड़ रुपये की रिश्वत देने की पेशकश की थी। डीआईजी ने यह बात अपने वरिष्ठ अधिकारियों तक पहुंचा दी।

सीबीआई ने की छापेमारी

हरी झंडी मिलने के बाद सीबीआई की एक टीम ने 16 लाख रुपये की पहली किश्त देने पहुंचे धीरज कुमार को गिरफ्तार कर लिया गया। जांच एजेंसी ने इस मामले में धीरज कुमार सिंह के साथ उक्त कंपनी से जुड़े दिनेश चंद्र गुप्ता को भी गिरफ्तार कर लिया था। सीबीआई ने आरोपी धीरज कुमार सिंह और दिनेश चंद्र गुप्ता के ठिकानों की तलाशी ली। सूत्रों के मुताबिक, जांच एजेंसी ने उक्त आरोपियों के ठिकानों से कई अहम दस्तावेज बरामद किए थे। आरोपियों से हुई पूछताछ में पता चला है कि इस केस की जड़ें गहरी जुड़ रही हैं। सूत्र बताते हैं कि एसओ धीरज कुमार ने यह सब अपने स्तर पर नहीं किया था। इस बाबत पहले कई लोगों के साथ बातचीत हुई थी।

डेढ़ साल का वक्त बाकी था

ऊपर बैठे लोगों से इशारा मिलने के बाद ही सौदेबाजी का क्रम आगे बढ़ा था। डॉ. आरके मितरा को दिया गया सर्विस एक्सटेंशन वापस लेने की एक बड़ी वजह सीबीआई रेड बताई जा रही है। उनके एक्सटेंशन को खत्म होने में अभी डेढ़ साल का वक्त बाकी बचा था। वे मंत्रालय में पुलिस विभाग में एडवाइजर के पद पर तैनात थे। उन्हें सरकार ने हाल ही में सेवा विस्तार दिया था। सूत्र बताते हैं कि सेंट्र्ल पुलिस ऑर्म्ड फोर्सेज कॉडर के अधिकारियों में उनके कामकाज के रवैये से भारी नाराजगी थी। इससे पहले 2017 में एक मामले में उन्होंने राष्ट्रपति/गृहमंत्री के मामूली दंड के आदेश को दरकिनार करते हुए फाइल को सीधे डीओपीटी भेज दिया था।

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इस साल तृणमूल कांग्रेस ने लोकसभा चुनावों के दौरान उनकी चुनाव आयोग में शिकायत भी की थी। मितरा की पत्नी श्रीरुपा मितरा चौधरी मालदा दक्षिण लोकसभा सीट से भाजपा के टिकट पर 2019 में चुनाव भी लड़ी थीं, लेकिन चुनाव हार गई थीं।

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