शहर के सरकारी अस्पताल का भी हाल कुछ ऐसा ही है। यहां भी डॉक्टरों और बाकी कर्मचारियों की भारी कमी है। अस्पतालों में बेड की भी कमी है, जिसकी वजह से महिला वार्ड में भर्ती दो मरीजों को एक बेड पर ही सोना पड़ता है। यहां के सरकारी अस्पताल में कुल 27 डॉक्टरों की पोस्ट निर्धारित की गई है, लेकिन फिलहाल यहां 13 डॉक्टर ही हैं, जिन्हें रोजाना करीब 4 हजार मरीजों को देखना पड़ता है।
यहां तक कि अस्पताल के पास कार्डियोलॉजिस्ट, न्यूरोलॉजिस्ट और स्किन स्पेशलिस्ट डॉक्टर ही मौजूद नहीं हैं। मुख्य चिकित्सा अधीक्षक डॉक्टर बीएम नागर ने बताया कि डॉक्टरों और सुविधाओं की कमी की वजह से हमें मजबूरन मरीजों को मेरठ और अलीगढ़ रेफर करना पड़ता है।
स्कूलों में न बिजली है, न सफाई और न ही किताब
रामपुर शहर के स्कूलों की हालत तो और भी बदतर है। यहां स्कूलों में न तो बिजली है, न सफाई है और ही बच्चों के पास किताबें ही हैं। इसके अलावा स्कूल में कमरे की भी कमी है, जिसकी वजह से दो-दो कक्षाओं के छात्रों को एक ही कमरे में बिठाया जाता है या बाहर बरामदे में बिठाकर पढ़ाया जाता है।
शहर में सार्वजनिक परिवहन की भी सुविधा नहीं
रामपुर शहर में सार्वजनिक परिवहन की कोई सुविधा ही नहीं है। लोगों को कहीं भी आने-जाने के लिए ऑटो, ई-रिक्शा या टेम्पो का सहारा लेना पड़ता है। जिनके पास अपना कोई वाहन नहीं है, उन्हें भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ता है।