इस बार राहुल गांधी के तेवर काफी गरम हैं। ऐसा लग रहा है मानों उन्होंने पिछले सात दशक की कांग्रेस की राजनीतिक परंपरा को एक मिनट में खूंटी पर टांग दिया है। शुक्रवार 26 अक्टूबर को राहुल गांधी ने एक नई राजनीति का एहसास कराया। उन्होंने एक दिन पहले पार्टी के मंच से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को राफेल मामले में चोर कहा। एक दिन बाद वह न सिर्फ सीबीआई मुख्यालय पर प्रदर्शन करने पहुंच गए, बल्कि सांकेतिक गिरफ्तारी भी दी। पिछले सात दशक के इतिहास में शायद यह पहली बार हुआ है जब कांग्रेस अध्यक्ष ने खुद राजनीतिक प्रदर्शन किया हो, गाड़ी पर लटके हों, गिरफ्तारी देकर बस में बैठे हों और फिर लोदी स्टेट पुलिस थाने पर आंधा घंटा का समय भी बिताया हो।
कांग्रेस की सीटें 50 से कम और पीएम तानाशाह
24 अक्तूबर को ही कांग्रेस पार्टी ने यह घोषणा कर दी थी कि वो 26 अक्तूबर की सुबह सीबीआई मुख्यालय पर प्रदर्शन करने वाली है। राहुल की टीम के सदस्यों के मुताबिक सबकी राय यही है कि कांग्रेस में जान डालने के लिए कुछ नया और अलग तो करना ही पड़ेगा। परंपरागत राजनीतिक शैली से पार्टी को बाहर लाना पड़ेगा।
आशय यह कि राहुल गांधी ने यह प्रदर्शन भी अचानक नहीं किया। पहले उन्होंने राजस्थान की जनसभा में सीबीआई निदेशक को जबरन छुट्टी पर भेजे जाने को लेकर प्रधानमंत्री पर हमला बोला, इसके बाद कांग्रेस मुख्यालय में प्रेसवार्ता की और पीएम को चोर कहा। यह भी कहा कि कांग्रेस पार्टी उन्हें छोड़ेगी नहीं। इसके बाद अगले दिन सुबह कांग्रेस पार्टी मुख्यालय पहुंच गए।
इस राजनीति पर कांग्रेस नेता सुष्मिता देव कहती हैं कि राहुल ऐसे समय में कांग्रेस अध्यक्ष बने हैं, जब चुनौतियां बड़ी हैं। कांग्रेस की लोकसभा में सीटों की संख्या 50 से कम है और देश का प्रधानमंत्री तानाशाह है। सुष्मिता के अनुसार राहुल गांधी विपक्षी दल कांग्रेस के नेता हैं और मेरे ख्याल में यह उनकी जिम्मेदारी बनती है।
गुजरात का प्रयोग दोहरा रहे हैं राहुल
गुजरात विधानसभा चुनाव के दौरान राहुल गांधी ने राजनीति के कई प्रयोग किए। बताते हैं राहुल ने गुजरात में कई स्तर पर लोगों से मिलने के बाद अजीब सी स्थिति पाई। बताते हैं इसके बाद राहुल गांधी ने भाजपा अध्यक्ष अमित शाह के बेटे जयशाह पर हमला बोलने का निर्णय लिया। उन्होंने यही किया और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी तथा भाजपा अध्यक्ष पर जोरदार हमला बोलते गए।
खुद सुष्मिता देव भी बताती हैं कि इसके बार राहुल गांधी कहीं नहीं रुके। इसका असर यह हुआ गुजरात के लोग कांग्रेस के साथ खुलकर खड़े होने लगे। समझा जा रहा है कि कांग्रेस अध्यक्ष इस प्रयोग को अब लगातार दोहरा रहे हैं। वह काफी आक्रामक राजनीति कर रहे हैं। राहुल गांधी प्रधानमंत्री पर लगातार हमला बोलकर हमले की धार भी बढ़ा रहे हैं। उन्होंने प्रधानमंत्री को पहले चौकीदार से भागीदार से कहा और अब सीधे चोर कह रहे हैं।
यह आरोप ठीक वैसा ही है जौसे उनके पिता और पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी के ऊपर अस्सी के दशक में लगाया गया था। हालांकि तब राजीव गांधी की कैबिनेट में मंत्री रहे वीपी सिंह ने जनसभा में पेपर रोल लहराकर सबूत होने की दोहाई दी थी और इस समय राहुल गांधी तथ्यों को सामने लाकर हमला बोल रहे हैं।
छवि बदल रही है
राहुल गांधी ने संसद के मानसून सत्र के दौरान अमर उजाला संवाददाता से कहा था कि अगले तीन-चार महीनों में अपने ऊपर लगा पप्पू का दाग वह धोने वाले हैं। कांग्रेस अध्यक्ष ने कहा था कि भाजपा और आरएसएस ने पैसा खर्च करके कई वर्षो में उनकी पप्पू की बनाई है। क्योंकि दोनों को पता था कि राजनीति में आने के बाद राहुल गांधी इसमें काफी आगे जाने वाले हैं।
लेकिन राहुल ने इसके जवाब में कहा था कि अगले कुछ महीनों में आप देखेंगे कि पप्पू कौन है? उन्होंने इशारा भी किया था कि संसद के मानसून सत्र में कौन उनके सवालों का जवाब देकर पप्पू साबित हुआ। दरअसल राहुल गांधी को पता है कि कुछ किए बिना कांग्रेस पार्टी में जान नहीं लाई जा सकती।