राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए) और यूपी पुलिस के एंटी टेरर स्क्वॉड (एटीएस) द्वारा की गई कार्रवाई पर सवाल क्यों खड़े हो रहे हैं। राजनीतिक पार्टियां ही नहीं, बल्कि देश का एलीट वर्ग और सोशल मीडिया भी इस मामले में दोहरे पथ पर है। एनआईए-आईएसआईएस-फ़िदायीन अटैक, ये तीन बातें ऐसी हैं जो आपस में मेल नहीं खा रही हैं।
जाच एजेंसी का कहना है, आरोपी कथित तौर पर आईएसआईएस से प्रेरणा लेकर देश में तोड़फोड़ करने और बड़े नेताओं को निशाना बनाने की योजना पर काम कर रहे थे। दूसरा, उनके पास जो
हथियार व गोला-बारुद मिला है, उनकी मदद से फिदायीन हमला होना था। तीसरा, एनआईए ने इस ऑपरेशन में जो सामग्री जब्त करने का दावा किया है, उस पर जनता, नेता और कानून के जानकार खुद प्रश्न चिन्ह लगा रहे हैं। इनके सबके बावजूद जांच एजेंसी का यह कहना कि फिदायीन हमले की तैयारी थी, संदेहास्पद लगता है।
एनएसजी और दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल में काम कर चुके दो पूर्व अफसरों का सीधा कहना है कि एनआईए ने जिस तरीके से इस केस को मीडिया के सामने पेश किया है, उस पर सवाल खड़े होना लाजिमी है। एनआईए ने इस केस को मीडिया के सामने लाने में बहुत जल्दबाजी कर दी। यही वजह है कि कांग्रेस और भाजपा जैसी बड़ी पार्टियां भी इस मुद्दे पर एक राय नहीं बना पा रही हैं।
सोशल मीडिया में जब एनआईए की कार्रवाई पर सवाल उठने लगे तो केंद्रीय मंत्री अरुण जेटली और प्रकाश जावड़ेकर सहित कई नेताओं को जांच एजेंसी के समर्थन में उतरना पड़ा। दूसरी ओर, वकील प्रशांत भूषण ने कहा, एनआईए अपने पुराने खेल, खेल रही है। बेकसूर मुसलमानों को पकड़कर उन्हें आईएसआईएस का एजेंट बताकर बड़ी आतंकी साजिश कह रही है। गांव के लोगों का आरोप है कि इनके सबके पहचान पत्र जला दिए गए। ट्रैक्टर के पाइप को रॉकेट लॉन्चर और लोहे के चूरे को बारूद बताया जा रहा है।
जम्मू-कश्मीर की पूर्व मुख्यमंत्री महबूबा ने अपने ट्वीट में कहा, राष्ट्रीय सुरक्षा का विषय सर्वोपरि है, लेकिन संदिग्धों को सुतली बम के आधार पर आतंकी और आईएसआईएस से जुड़ा बताने का दावा अतार्किक है। इस आरोप ने पहले ही इन लोगों और इनके परिवारों के जीवन को बर्बाद कर दिया है।
ऐसे में एनआईए को उन मौकों से सबक लेना चाहिए, जिनमें आरोपी दशकों के बाद आरोपों से बरी हो गए थे। कांग्रेस के नेता प्रमोद तिवारी ने कहा, जब इतने लंबे समय से इनका नेटवर्क चल रहा था तो आईबी कहां थी। अगर एनआईए को कई माह पहले इनकी खबर थी तो उसी वक्त कार्रवाई क्यों नहीं की। हो सकता है कि यह एक चुनावी स्टंट हो।