पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान खान (फाइल फोटो)
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भारत में पाकिस्तान की तरफ से आतंकियों की घुसपैठ कराने के बारे में सारी दुनिया जानती है। ये बात जगजाहिर है कि पाकिस्तान आतंकियों के लिए एक सुरक्षित पनाहगाह है। पाकिस्तान में लश्कर-ए-तैयबा का सरगना हाफिज सईद खुलेआम घूमता है। इसके अलावा ऐसे आतंकियों की लंबी फेहरिस्त है, जिन पर पाकिस्तान की सेना का हाथ है और वे मुल्क में आराम से रह रहे हैं। पड़ोसी देश इन आतंकियों को लगातार भारत में हमलों को अंजाम देने के लिए सीमा पार करवाता रहता है।
साल 2008 में हुआ मुंबई हमला हो या फिर पठानकोट हमला, इन सबके तार पाकिस्तान से जरूर जुड़ते हैं। यहां पलने वाले जैश-ए-मोहम्मद और लश्कर-ए-तैयबा जैसे आतंकी संगठन भारत में हमेशा हमले की फिराक में रहते हैं। ताजा मामला जम्मू-कश्मीर का है, जहां नगरोटा में भारतीय सुरक्षाबलों ने मुठभेड़ में जैश-ए-मोहम्मद के चार आतंकियों को ढेर किया है। ये आतंकी घाटी में होने वाले डीडीसी चुनाव से पहले इसे दहलाना चाहते थे।
पाकिस्तान और आतंकियों की मिलीभगत का जिक्र अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति बराक ओबामा ने भी अपनी किताब 'ए प्रोमिस्ड लैंड' में किया। ओबामा ने बताया है कि आखिर क्यों उन्होंने ओसामा बिन लादेन को मारने के अभियान में पाकिस्तान की मदद नहीं ली। दरअसल, ओबामा ने साल 2011 में एबटाबाद में ओसामा बिन लादेन के ठिकाने पर छापा मारने के अभियान में पाकिस्तान को शामिल करने से इसलिए इनकार किया था क्योंकि पाकिस्तान की सेना, खासकर उसकी खुफिया सेवा में कुछ तत्वों के तालिबान और संभवत: अलकायदा से संबंध थे।
ओबामा ने लिखा है कि हालांकि पाकिस्तान सरकार ने आतंकवाद विरोधी कई अभियानों में हमारे साथ सहयोग किया और अफगानिस्तान में हमारे बलों के लिए अहम आपूर्ति मार्ग मुहैया कराया, लेकिन यह खुला रहस्य था कि पाकिस्तान की सेना, खासकर उसकी खुफिया सेवाओं में कुछ तत्वों के तालिबान और संभवत: अलकायदा से भी संबंध थे। वे यह सुनिश्चित करने के लिए सामरिक पूंजी के तौर पर कभी-कभी उनका इस्तेमाल करते थे कि अफगान सरकार कमजोर बनी रहे और अफगानिस्तान पाकिस्तान के सबसे बड़े दुश्मन भारत के नजदीक न आने पाए।
उन्होंने लिखा कि पाकिस्तान की सेना एबटाबाद परिसर से कुछ ही मील की दूरी पर थी, जिसके कारण इस बात की संभावना बढ़ गई थी कि पाकिस्तानियों को कुछ भी बताने से अभियान की जानकारी लीक हो सकती है। ओबामा ने लिखा कि वे एबटाबाद में भले ही कोई भी विकल्प चुनते, उन्हें सबसे खतरनाक तरीके से अपने सहयोगी के क्षेत्र में बिना अनुमति घुसना पड़ता और इससे राजनयिक संबंध भी दाव पर लगे थे तथा इसने जटिलताएं भी बढ़ा दी थीं।
पाकिस्तान पर आतंकियों के पालन-पोषण को लेकर लगातार आरोप लगते रहते हैं, लेकिन इसके बाद भी पड़ोसी मुल्क ने आतंकियों को लेकर अपनी रणनीति में कोई बदलाव नहीं किया है। यहां तक कि पाकिस्तान के आम नागरिकों को भी आतंक का दंश झेलना पड़ता है, लेकिन फिर भी पड़ोसी मुल्क इसे पनाह देने में लगा हुआ है। 16 दिसंबर, 2014 को आतंकियों ने पेशावर के एक स्कूल में मासूमों पर गोलीबारी की, इसमें 132 बच्चों समेत 141 लोगों की मौत हुई, लेकिन फिर भी पाकिस्तान नहीं सुधरा है।
आइए जानते हैं हाल के कुछ बड़ें आतंकी हमलों के बारे में जिसमें सीधे तौर पर रहा पाकिस्तान का हाथ...
जम्मू श्रीनगर राष्ट्रीय राजमार्ग पर 14 फरवरी 2019 को भारतीय सुरक्षा कर्मियों को ले जाने वाले सीआरपीएफ के वाहनों के काफिले पर आत्मघाती हमला हुआ। इस हमले में 40 से अधिक भारतीय सुरक्षाबल शहीद हो गए। आतंकियों ने इस हमले को जम्मू-कश्मीर के पुलवामा जिले के अवंतिपुरा के निकट लेथपोरा इलाके में अंजाम दिया। इस हमले की जिम्मेदारी पाकिस्तान स्थित आतंकवादी समूह जैश-ए-मोहम्मद ने ली। जम्मू-कश्मीर में पिछले कुछ वर्षों के दौरान हुआ ये सबसे बड़ा हमला था। वहीं, हमले के बाद पाकिस्तान ने अपने दामन से दाग हटाने के लिए घटना की निंदा की और जिम्मेदारी से इनकार किया। दूसरी तरफ, पाकिस्तान समर्थित आतंकी संगठन जैश-ए-मोहम्मद की इस कायरतापूर्ण कार्रवाई से पूरा देश गुस्से में उबल उठा था। इस हमले के ठीक 12 दिन बाद भारतीय सेना ने पाकिस्तान के बालाकोट में एयरस्ट्राइक कर बदला लिया था।
पठानकोट एयरबेस पर हमला करने वाले आतंकी दिसंबर 2015 में पाकिस्तान से भारत की सीमा में घुसे थे। 2 जनवरी, 2016 की सुबह साढ़े तीन बजे आतंकी असलहा और हथियारों से लैस होकर एयरबेस स्टेशन में दाखिल हुए थे। इस हमले में एयरबेस के अंदर सात सुरक्षाकर्मी शहीद हुए थे, जबकि करीब 37 अन्य लोग घायल हो गए थे। हमला करने आए सभी आतंकी मारे गए थे। इस मामले की जांच कर रही एनआईए को कई ऐसे प्रमाण मिले थे, जिससे यह बात साफ हो गई थी कि हमला करने वाले सभी आतंकी पाकिस्तान के थे। वहीं, हमले के समय भी आतंकी पाकिस्तान में बैठे अपने आकाओं व परिवार के संपर्क में थे। इसके अलावा जिस रास्ते से आतंकी आए थे वहां से एनआईए को पाकिस्तान में बने फूड पैकेट, एनर्जी ड्रिंक की खाली बोतलें व अन्य सामान बरामद हुआ था। इस हमले में भी पाकिस्तानी आतंकी संगठन जैश-ए-मोहम्मद के शामिल होने की आशंका जताई गई। जैश-ए-मोहम्मद के सरगना मौलाना मसूद अजहर और उसके भाई रऊफ के इशारे पर यह हमला हुआ।
26 नवंबर 2008 की शाम तक मुंबई में हर-रोज की तरह चहलकदमी कर रही थी। शहर के हालात पूरे तरह सामान्य थे। लेकिन जैसे-जैसे मुंबई रात के अंधेरे की तरफ बढ़ना शुरू हुई, वैसे-वैसे मुंबई की सड़कों पर चीख-पुकार तेज होती चली गई। पाकिस्तान से आए जैश-ए-मोहम्मद के 10 आतंकवादियों ने मुंबई को बम धमाकों और गोलीबारी से दहला दिया था। हथियारों से लैस इन आतंकियों के हमले में 160 से ज्यादा लोग मारे गए और 300 ज्यादा लोग घायल हुए थे। वहीं, सुरक्षा बलों और आतंकवादियों के बीच तीन दिनों तक मुठभेड़ चलती रही। इस दौरान, मुंबई में धमाके हुए, आग लगी, गोलियां चली और बंधकों को लेकर उम्मीद टूटती जुड़ती रही और ना सिर्फ भारत से सवा अरब लोगों की बल्कि दुनिया भर की नजरें ताज, ओबेरॉय और नरीमन हाउस पर टिकी रहीं। 29 नवंबर की सुबह तक 9 हमलावरों का सफाया हो चुका था और अजमल कसाब के तौर पर एक हमलावर पुलिस की गिरफ्त में था। स्थिति पूरी तरह नियंत्रण में आ चुकी थी लेकिन लगभग 160 से ज्यादा लोगों की जान जा चुकी थी।