पांच राज्यों के चुनाव से ठीक पहले पेश होने वाले आम बजट पर जारी सियासी कोहराम में चुनाव आयोग की भूमिका बेहद सीमित है। विवाद बढ़ने पर आयोग सरकार को आम बजट पेश करने की तारीख बदलने के लिए बाध्य नहीं कर सकता।
हां, आयोग सरकार को यह सलाह जरूर दे सकता है कि बजट पेश करने के दौरान वह ऐसी घोषणाओं से बचे जो चुनावी राज्यों के मतदाताओं पर प्रभाव डाल सकते हैं। इस मामले में सिर्फ राष्ट्रपति को ही यह अधिकार है कि वह सरकार को बजट पेश करने की तारीख बदलने का निर्देश दे। गौरतलब है कि सरकार इस बार 1 फरवरी को बजट पेश करने जा रही है। इसके ठीक तीन दिन बाद पहले चरण के तहत मतदान होना है।
पूर्व मुख्य चुनाव आयुक्त एसवाई कुरैशी के मुताबिक परंपरा चुनाव के दौरान पेश होने वाले बजट में लोकलुभावन घोषणाओं से बचने की रही है। जहां तक इस मामले में चुनाव आयोग के अधिकार की बात है तो सरकार को बजट पेश करने की तारीख बदलने के लिए बाध्य नहीं कर सकता।