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सिर्फ राष्ट्रपति बदल सकते हैं आम बजट की तारीख, आयोग को नहीं अधिकार

Thu, 05 Jan 2017 08:11 PM IST
ब्यूरो/ नई दिल्ली, अमर उजाला
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पांच राज्यों के चुनाव से ठीक पहले पेश होने वाले आम बजट पर जारी सियासी कोहराम में चुनाव आयोग की भूमिका बेहद सीमित है। विवाद बढ़ने पर आयोग सरकार को आम बजट पेश करने की तारीख बदलने के लिए बाध्य नहीं कर सकता।
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हां, आयोग सरकार को यह सलाह जरूर दे सकता है कि बजट पेश करने के दौरान वह ऐसी घोषणाओं से बचे जो चुनावी राज्यों के मतदाताओं पर प्रभाव डाल सकते हैं। इस मामले में सिर्फ राष्ट्रपति को ही यह अधिकार है कि वह सरकार को बजट पेश करने की तारीख बदलने का निर्देश दे। गौरतलब है कि सरकार इस बार 1 फरवरी को बजट पेश करने जा रही है। इसके ठीक तीन दिन बाद पहले चरण के तहत मतदान होना है।

पूर्व मुख्य चुनाव आयुक्त एसवाई कुरैशी के मुताबिक परंपरा चुनाव के दौरान पेश होने वाले बजट में लोकलुभावन घोषणाओं से बचने की रही है। जहां तक इस मामले में चुनाव आयोग के अधिकार की बात है तो सरकार को बजट पेश करने की तारीख बदलने के लिए बाध्य नहीं कर सकता।
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सरकार ने बजट में लोकलुभावन घोषणाएं की तो पैदा हो सकता विवाद

बजट - फोटो : Demo Pic.
​हालांकि इसका दूसरा पहलू यह भी है कि आयोग सरकार को आदर्श आचार संहिता की याद दिलाते हुए बजट में लोकलुभावन घोषणाओं से बचने के लिए कह सकता है। हां अगर आयोग की सलाह को ठुकराते हुए सरकार ने बजट में लोकलुभावन घोषणाएं की तो इससे विवाद की स्थिति पैदा होगी।

राष्ट्रपति को जरूर इस मामले में सरकार को निर्देशित करने का अधिकार है। राष्ट्रपति अगर चाहें तो अपने अधिकारों का उपयोग करते हुए सरकार को बजट पेश करने की तारीख बदलने का निर्देश दे सकते हैं। 

गौरतलब है कि चुनाव कार्यक्रम की घोषणा होने के साथ ही आम बजट पर सियासी कोहराम शुरू हो गया है। कांग्रेस समेत कई विपक्षी दलों ने चुनाव आयोग से बजट की तारीख बदलवाने की मांग की है। विपक्षी नेताओं ने इस मामले में राष्ट्रपति भवन का भी दरवाजा खटखटाने का निर्णय लिया है।
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