विपक्ष से ओवैसी, मायावती, रेड्डी और पटनायक गायब?
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पिछले कुछ दिनों से विपक्षी एकता को लेकर कई खबरें आ चुकी हैं। बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार इसके लिए विपक्ष के कई नेताओं से मिल चुके हैं। पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी और तेलंगाना के मुख्यमंत्री के. चंद्रशेखर राव भी इस तरह के प्रयासों में लगे हैं। एनसीपी प्रमुख शरद पवार भी पर्दे के पीछे से सक्रिय बताए जाते हैं।
इन सबके बीच बहुजन समाज पार्टी की मुखिया मायावती, एआईएमआईएम प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी और वाईएसआर कांग्रेस के चीफ और आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री जगन मोहन रेड्डी, ओडिशा के मुख्यमंत्री नवीन पटनायक कहीं चर्चा नहीं हैं। ऐसा लग रहा है कि एकजुट विपक्ष के दायरे से इन नेताओं ने दूरी बना ली है।
ऐसे में सवाल उठ रहा है कि आखिर क्यों मायावती, ओवैसी, जगन मोहन रेड्डी और नवीन पटनायक जैसे नेताओं ने एकजुट विपक्ष से खुद को अलग कर रखा है? क्यों ये दल एकजुट विपक्ष का हिस्सा नहीं बन रहे? आइए समझते हैं सियासी समीकरण…
लोकसभा चुनाव के लिए तैयारी करता विपक्ष।
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मायावती, रेड्डी और ओवैसी क्यों हैं दूर?
जहां एक ओर नीतीश कुमार, केसीआर, ममता बनर्जी, शरद पवार जैसे बड़े नेता विपक्षी दलों को एकजुट करने में जुटे हैं, वहीं मायावती, जगन मोहन रेड्डी, नवीन पटनायक और असदुद्दीन ओवैसी इन सबसे दूरी बनाए हुए हैं। इसे लेकर हमने वरिष्ठ पत्रकार प्रमोद कुमार सिंह से बात की। उन्होंने कहा, 'विपक्षी एकता एक बड़ी चुनौती है। नीतीश कुमार, ममता बनर्जी, शरद पवार, अरविंद केजरीवाल या कोई भी नेता क्यों न हो। वह दूसरे दल के नेता को अपना नेतृत्व नहीं करने देना चाहेगा। मायावती, जगन मोहन रेड्डी, नवीन पटनायक और ओवैसी इस बात को बखूबी जानते हैं।' प्रमोद आगे तीन बिंदुओं में इसके बारे में समझाते हैं।
बसपा सुप्रीमो मायावती
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1. मायावती ने क्यों दूरी बनाई: बहुजन समाज पार्टी की स्थिति पिछले कुछ सालों में काफी खराब हुई है। ऐसे में मायावती पहले अपनी पार्टी को ही एकजुट करने में जुटी हैं। नए सिरे से वह पार्टी के गठन और विस्तार पर काम कर रहीं हैं। मायावती जानती हैं कि अगर बिना खुद मजबूत हुए वह विपक्ष के साथ आ जाती हैं तो आने वाले समय में उन्हें इसका नुकसान उठाना पड़ सकता है।
मजबूत पार्टियां अपने हिसाब से ही सारे फैसले करेंगी और मायावती को उसे मानना पड़ेगा। इसलिए मायावती अभी विपक्ष में शामिल होने की बजाय अपनी पार्टी पर फोकस कर रहीं हैं। दूसरा कारण ये भी है कि मायावती ने लोकसभा चुनाव में समाजवादी पार्टी के साथ गठबंधन किया था। तब उन्हें इसका ज्यादा फायदा देखने को नहीं मिला।
असदउद्दीन ओवैसी
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2. ओवैसी खुद अलग हुए या विपक्ष ने अलग किया? : एआईएमआईएम प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी भी विपक्ष के घेरेबंदी में कहीं नहीं दिखाई दे रहे हैं। ओवैसी खुद ही विपक्ष से अलग रखने की कोशिश कर रहे हैं। ओवैसी जानते हैं कि वह अकेले दम पर लड़ेंगे तो उनके वोटों का बंटवारा नहीं होगा। इसके अलावा वह अपनी पार्टी का विस्तार भी मुस्लिम बहुल इलाकों में कर सकेंगे। अगर वह विपक्ष के साथ जाएंगे तो ऐसा नहीं कर पाएंगे।
जगन मोहन रेड्डी और नवीन पटनायक
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3. जगन मोहन रेड्डी और नवीन पटनायक का क्या? : आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री और वाईएसआर कांग्रेस के प्रमुख जगन मोहन रेड्डी भी एकजुट विपक्ष से दूर दिखाई पड़ रहे हैं। इसी तरह नवीन पटनायक भी विपक्ष से दूरी बनाए हुए हैं। रेड्डी और पटनायक ने राष्ट्रपति और उपराष्ट्रपति चुनाव में भी एनडीए का साथ दिया था। दोनों के व्यक्तिगत संबंध प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से काफी अच्छे हैं।
ऐसे में ये कहा जा सकता है कि आने वाले दिनों में भी दोनों विपक्ष से दूरी ही बनाकर रखें। दोनों राज्यों में 2024 में ही विधानसभा चुनाव होने हैं। दोनों की स्थिति अपने-अपने राज्य में काफी मजबूत है। दोनों ही नहीं चाहते हैं कि विपक्ष में शामिल होकर राज्य के चुनाव में भी सीटों का बंटवारा कर दें। इसलिए फिलहाल रेड्डी और पटनायक अलग रहकर ही राजनीति करना चाहते हैं।
नीतीश कुमार और विपक्ष के अन्य नेता
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विपक्ष को एकजुट करने के लिए कौन क्या कर रहा?
नीतीश कुमार पिछले हफ्ते तीन दिन के दौरे पर दिल्ली पहुंचे थे। यहां उन्होंने राहुल गांधी, अरविंद केजरीवाल, सीताराम येचुरी, डी राजा, एचडी देवेगौड़ा, एचडी कुमारस्वामी, ओम प्रकाश चौटाला, अखिलेश यादव, मुलायम सिंह यादव, शरद पवार सहित कई अन्य विपक्षी दलों के नेताओं से नीतीश ने मुलाकात की।
टीएमसी प्रमुख ममता बनर्जी भी अपनी पार्टी के विस्तार में जुटी हुई हैं। ममता ने कई राज्यों में दूसरे दलों के नेताओं को तोड़कर टीएमसी में शामिल करा लिया। इसके अलावा विपक्ष के क्षेत्रीय दलों को भी साधने में ममता जुटी हैं। इसी तरह तेलंगाना के मुख्यमंत्री केसीआर दक्षिण की राजनीतिक पार्टियों को एकजुट करने की कोशिश में जुटे हैं। एनसीपी प्रमुख शरद पवार भी लगातार विपक्ष के नेताओं के संपर्क में हैं।