मणिपुर के इंफाल ईस्ट जिले में निर्माणाधीन सरकारी स्कूल को गिराने के आरोप में भाजपा विधायक एल सुसिंद्रो मैतेई के खिलाफ एफआईआर दर्ज की गई है। शिकायत में कहा गया है कि विधायक के निर्देश पर खुदाई मशीन से स्कूल की इमारत तोड़ी गई। यह परियोजना सरकारी फंड से बन रही थी। आइए इस पूरे मामले को विस्तार से जानते हैं।
मणिपुर में एक निर्माणाधीन सरकारी स्कूल को गिराए जाने का मामला अब कानूनी और राजनीतिक विवाद का रूप ले चुका है। इंफाल ईस्ट जिले में एक जूनियर हाई स्कूल की इमारत तोड़े जाने के आरोप में भारतीय जनता पार्टी के विधायक एल सुसिंद्रो मैतेई के खिलाफ एफआईआर दर्ज की गई है। इस कार्रवाई ने राज्य की राजनीति में हलचल मचा दी है और सरकारी योजनाओं के क्रियान्वयन पर भी गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
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क्या है पूरा मामला?
पुलिस के अनुसार, यह एफआईआर स्कूल परिसर के साइट सुपरवाइजर कोंसाम संतोष मैतेई की शिकायत पर दर्ज की गई है। आरोप है कि इंफाल ईस्ट जिले के खुरई हाइग्रुमाखोंग इलाके में स्थित जूनियर हाई स्कूल की निर्माणाधीन इमारत को 18 जनवरी को जबरन गिराया गया। शिकायत में कहा गया है कि एक खुदाई मशीन की मदद से यह तोड़फोड़ की गई और इसके पीछे सीधे तौर पर विधायक के निर्देश बताए गए हैं।
किन धाराओं में दर्ज हुआ केस?
पुलिस ने इस मामले में आपराधिक अतिक्रमण, घर में अवैध प्रवेश और सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान पहुंचाने से जुड़ी धाराएं लगाई हैं। एफआईआर सार्वजनिक संपत्ति क्षति निवारण अधिनियम, 1984 के तहत भी दर्ज की गई है। पुलिस का कहना है कि यह मामला गंभीर है क्योंकि संबंधित इमारत एक सरकारी शैक्षणिक परियोजना का हिस्सा थी।
एफआईआर में विधायक की भूमिका पर क्या कहा गया?
एफआईआर में दर्ज है कि विधायक ने कथित तौर पर स्थानीय अखबारों और सोशल मीडिया के जरिए खुद स्वीकार किया कि उन्होंने निर्माणाधीन ढांचे को गिराने का आदेश दिया था।
शिकायतकर्ता का आरोप है कि विधायक पहले भी निर्माण स्थल पर पहुंचे थे।
उस समय विधायक ने निर्माण कार्य रोकने की चेतावनी दी थी।
शिकायत में कहा गया है कि विधायक ने साफ कहा था कि काम जारी रहा तो इमारत गिरा दी जाएगी।
सरकारी फंड और योजना का सवाल
शिकायत के मुताबिक, इस स्कूल का निर्माण नॉर्थ ईस्टर्न स्पेशल इंफ्रास्ट्रक्चर डेवलपमेंट स्कीम के तहत हो रहा था। यह योजना नॉर्थ ईस्टर्न काउंसिल के फंड से संचालित होती है और परियोजना को मणिपुर सरकार के शिक्षा इंजीनियरिंग विंग द्वारा लागू किया जा रहा था। ऐसे में बिना प्रशासनिक अनुमति निर्माण गिराया जाना सरकारी धन और प्रक्रिया दोनों पर सवाल खड़े करता है।
पुलिस का कहना है कि मामले की जांच जारी है और सभी तथ्यों की पड़ताल की जा रही है। विधायक से पूछताछ की संभावना से इनकार नहीं किया गया है। वहीं, यह मामला राजनीतिक रूप से भी संवेदनशील बन गया है क्योंकि एक निर्वाचित जनप्रतिनिधि पर सीधे तौर पर सरकारी संपत्ति को नुकसान पहुंचाने का आरोप लगा है। आने वाले दिनों में इस केस की जांच मणिपुर की राजनीति और प्रशासन दोनों के लिए अहम मानी जा रही है।