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Explainer: 21 जून को ही क्यों होता है योग दिवस, कैसा रहा इसका भारत से दुनियाभर में फैलने का 5,000 साल का सफर?

Sun, 21 Jun 2026 05:52 AM IST
रिया दुबे स्पेशल डेस्क, अमर उजाला

सार

भारत की 5,000 साल पुरानी योग परंपरा आज एक वैश्विक आंदोलन बन चुकी है। शरीर, मन और आत्मा के संतुलन का संदेश देने वाला योग अब दुनिया भर में स्वस्थ जीवनशैली का प्रतीक माना जाता है। 21 जून को मनाया जाने वाला अंतरराष्ट्रीय योग दिवस न केवल भारत की सांस्कृतिक विरासत को सम्मान देता है, बल्कि यह भी याद दिलाता है कि बेहतर स्वास्थ्य और मानसिक शांति की राह योग से होकर गुजरती है। आइए योग दिवस से जुड़ी खास बातें जानें। 
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12वां अंतरराष्ट्रीय योग दिवस - फोटो : Amar Ujala
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विस्तार
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21 जून को दुनियाभर में अंतरराष्ट्रीय योग दिवस मनाया जाता है। कभी भारत तक सीमित मानी जाने वाली योग की परंपरा आज एक वैश्विक रूप ले चुकी है। शरीर, मन और आत्मा के संतुलन का संदेश देने वाला योग अब केवल एक व्यायाम पद्धति नहीं, बल्कि स्वस्थ और संतुलित जीवन का माध्यम बन गया है।

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साल 2026 में दुनिया 12वां अंतरराष्ट्रीय योग दिवस मना रही है। इस बार की थीम है, 'Yoga for Healthy Ageing' यानी स्वस्थ उम्र बढ़ने के लिए योग। यह थीम बताती है कि योग केवल युवाओं के लिए नहीं, बल्कि हर आयु वर्ग के लोगों के लिए लाभकारी है। 

आइए जानते हैं कि योग भारत से दुनिया तक कैसे पहुंचा? अंतरराष्ट्रीय योग दिवस की शुरुआत कैसे हुई? 21 जून ही अंतरराष्ट्रीय दिवस के रूप में क्यों चुना गया? 2026 की थीम क्या है? योग दिवस के लोगो का क्या मतलब है? डब्ल्यूएचओ का mYoga एप क्या है? योग क्यों महत्वपूर्ण है?

भारत से दुनिया तक का सफर

योग की उत्पत्ति 5,000 वर्ष पुरानी भारतीय शारीरिक, मानसिक और आध्यात्मिक साधना से हुई है। इसका उल्लेख प्राचीन भारतीय ग्रंथों में मिलता है। इसकी नींव रखने में महर्षि पतंजलि का अतुलनीय योगदान है। लंबे समय तक योग मुख्य रूप से भारत और कुछ चुनिंदा देशों तक सीमित रहा। 

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पश्चिमी देशों में भी योग को शुरू में केवल शरीर को फिट रखने और लचीला बनाने वाली एक शारीरिक गतिविधि के रूप में देखा जाता था, लेकिन भारतीय योग संस्थानों और योग गुरुओं के लगातार प्रयासों ने दुनिया को योग के व्यापक लाभों से परिचित कराया।

धीरे-धीरे यह समझ विकसित हुई कि योग केवल शरीर को स्वस्थ रखने तक सीमित नहीं है, बल्कि यह मानसिक शांति, भावनात्मक संतुलन और समग्र स्वास्थ्य को भी मजबूत बनाता है। योग की लोकप्रियता लगातार बढ़ती गई और आज यह दुनिया के लगभग हर हिस्से में अपनाया जा रहा है।

अंतरराष्ट्रीय योग दिवस की शुरुआत कैसे हुई?

साल 2014 में भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने संयुक्त राष्ट्र में योग को समर्पित एक विशेष दिन मनाने का प्रस्ताव रखा। उन्होंने 21 जून को इसके लिए चुना, क्योंकि यह उत्तरी गोलार्ध का सबसे लंबा दिन होता है और कई संस्कृतियों में इसका विशेष महत्व माना जाता है।

इस प्रस्ताव को अभूतपूर्व समर्थन मिला। संयुक्त राष्ट्र के 177 सदस्य देशों ने इस प्रस्ताव का सह-प्रायोजन किया, जो किसी भी यूएनजीए प्रस्ताव के लिए रिकॉर्ड संख्या थी। इसके बाद 11 दिसंबर 2014 को संयुक्त राष्ट्र ने आधिकारिक तौर पर 21 जून को अंतरराष्ट्रीय योग दिवस घोषित कर दिया। प्रस्ताव में योग को स्वास्थ्य, सामंजस्य और शांति को बढ़ावा देने वाला माध्यम माना गया।

21 जून ही क्यों चुना गया?

  • 21 जून को उत्तरी गोलार्ध में ग्रीष्म अयनांत (Summer Solstice) होता है। 
  • यह वर्ष का सबसे लंबा दिन है, जब सूर्य जल्दी उगता है और देर से अस्त होता है। 
  • वैज्ञानिक दृष्टि से यह पृथ्वी के झुकाव और सूर्य की स्थिति से जुड़ा खगोलीय घटनाक्रम है।
  • भारतीय पौराणिक और योग परंपराओं में भी इस दिन का विशेष महत्व बताया गया है। 
  • इसे योग विज्ञान की शुरुआत से जुड़ी महत्वपूर्ण तिथि माना जाता है। 
  • यही वजह है कि अंतरराष्ट्रीय योग दिवस के लिए 21 जून का चयन किया गया।

इस वर्ष के अंतरराष्ट्रीय योग दिवस का थीम क्या है?

इस वर्ष अंतरराष्ट्रीय योग दिवस की थीम 'Yoga for Healthy Ageing' रखी गई है। संयुक्त राष्ट्र के अनुसार इसका उद्देश्य यह बताना है कि बढ़ती उम्र के साथ भी व्यक्ति शारीरिक और मानसिक रूप से सक्रिय, स्वतंत्र और स्वस्थ रह सकता है। योग इसमें महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है। योग में हल्के व्यायाम, स्ट्रेचिंग, श्वास तकनीक और माइंडफुलनेस जैसी गतिविधियां शामिल होती हैं। ये शरीर का संतुलन, लचीलापन, ताकत और गतिशीलता बढ़ाने में मदद करती हैं। यह थीम विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के स्वस्थ वृद्धावस्था दशक (2021-2030) के कई लक्ष्यों से भी जुड़ी हुई है, जिनमें स्वतंत्र जीवन और जीवन की गुणवत्ता बेहतर बनाना शामिल है।



 

योग दिवस के लोगो का क्या मतलब है?

अंतरराष्ट्रीय योग दिवस का लोगो कई प्रतीकों के माध्यम से योग के दर्शन को दर्शाता है।

जुड़े हुए हाथ: लोगो में जुड़े हुए हाथ  'एकता' का प्रतीक हैं। ये व्यक्ति की चेतना और सार्वभौमिक चेतना के मिलन को दर्शाते हैं। साथ ही मन और शरीर तथा मनुष्य और प्रकृति के बीच सामंजस्य का संदेश देता है।
प्रकृति के पांच तत्व: लोगो में दिखाई देने वाले रंग और आकृतियां प्रकृति के विभिन्न तत्वों का प्रतिनिधित्व करती हैं।
  • भूरे रंग की पत्तियां पृथ्वी तत्व को दर्शाती हैं।
  • हरी पत्तियां प्रकृति का प्रतीक हैं।
  • नीला रंग जल तत्व को दर्शाता है।
  • चमक अग्नि तत्व का प्रतिनिधित्व करती है।
  • सूर्य ऊर्जा और प्रेरणा के स्रोत का प्रतीक है।

डब्ल्यूएचओ का mYoga एप क्या है?

योग को अधिक लोगों तक पहुंचाने के लिए विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) और भारत सरकार ने 2021 में डब्ल्यूएचओ mYoga नामक मोबाइल एप्लिकेशन लॉन्च किया। यह एप एंड्रॉयड और एप्पल दोनों प्लेटफॉर्म पर उपलब्ध है। इसकी खास बात यह है कि यह उपयोगकर्ताओं का कोई डेटा एकत्र नहीं करता।

एप में योग सीखने और अभ्यास करने के लिए वीडियो और ऑडियो सामग्री दी गई है। इसे इस तरह तैयार किया गया है कि पहली बार योग सीखने वाले लोग भी आसानी से इसका उपयोग कर सकें, जबकि नियमित योग करने वाले लोगों के लिए भी यह उपयोगी है। इसमें 3 मिनट से लेकर 45 मिनट तक की योग गतिविधियां उपलब्ध हैं, जिससे व्यस्त दिनचर्या वाले लोग भी अपने समय के अनुसार अभ्यास कर सकते हैं।

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आज के समय में योग की जरूरत क्यों?

आज की तेज रफ्तार जिंदगी में तनाव, अनियमित दिनचर्या और शारीरिक निष्क्रियता आम समस्या बन चुकी है। ऐसे समय में योग शरीर और मन दोनों को संतुलित रखने का एक सरल माध्यम बनकर सामने आया है।
  • एक अध्ययन के अनुसार नियमित योग करने वाले लोगों में मांसपेशियों की शक्ति, सहनशक्ति, लचीलापन और कार्डियो-रेस्पिरेटरी फिटनेस में सुधार देखा गया।
  • योग एकाग्रता बढ़ाने, याददाश्त बेहतर करने और चिंता कम करने में मदद करता है। शोध बताते हैं कि यह मस्तिष्क के कार्यों को बेहतर बनाने में सहायक हो सकता है।
  • योग महिलाओं के लिए केवल फिटनेस गतिविधि नहीं है। यह हार्मोन संतुलन, प्रजनन स्वास्थ्य और मासिक धर्म से जुड़ी परेशानियों को कम करने में भी सहायक माना जाता है। प्रेग्नेंसी और उसके बाद की रिकवरी में भी योग उपयोगी बताया गया है।
  • नियमित योग अभ्यास तंत्रिका तंत्र को शांत करता है और अच्छी नींद को बढ़ावा देता है। योग निद्रा जैसी तकनीकों को नींद की गुणवत्ता सुधारने से भी जोड़ा गया है।
  • पीठ दर्द, गर्दन की जकड़न, गठिया और माइग्रेन जैसी समस्याओं में भी योग को राहत पहुंचाने वाला अभ्यास माना गया है।
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