राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) गैर राजनीतिक और एक सांस्कृतिक संगठन है, लेकिन सरसंघचालक मोहन भागवत का राजनीतिक रुझान बढ़ रहा है। कांग्रेस प्रवक्ता डॉ. गौरव वल्लभ का कहना है कि भागवत भाजपा को बेलआउट पैकेज देना चाहते हैं। भागवत ऐसा 2019 के चुनाव को ध्यान में रखकर कर रहे हैं।
वरिष्ठ पत्रकार राम बहादुर राय से जब आरएसएस को राष्ट्रीय सेक्युलर संघ बनाने पर चर्चा होती है तो फोन पर हंसकर बिना कुछ कहे स्वीकार लेते हैं, लेकिन वरिष्ठ पत्रकार राहुल देव मानते हैं कि सरसंघचालक के बयानों में राजनीति का प्रभाव बढ़ा है। जबकि संघ में पले बढ़े एक प्रचारक, चिंतक और विचारक के मुताबिक सरसंघचालक ने आरएसएस को सामाजिक राजनीतिक से एक राजनीतिक सामाजिक संगठन में तब्दील कर दिया है।
देवरस जी ले आए थे राजनीति के करीब
वरिष्ठ पत्रकार राहुल देव ने सवालिया लहजे में पूछा कि संघ राजनीति के करीब कब नहीं था। वह इसके लिए पूर्व सरसंघचालक बाला साहब देवरस को याद करते हुए कहते हैं कि वह संघ को राजनीति के करीब ले आए थे। देव के अनुसार भाजपा का गठन ही देवरस के जमाने में हुआ था। हालांकि गुरु गोलवरकर के विचार इससे अलग थे। राहुल देव यह मानते हैं कि संघ की राजनीतिक रुचि बढ़ी है। सरसंघचालक के बयानों में राजनीतिक मुद्दे शामिल हो रहे हैं। सरसंघचालक मोहन भागवत सार्वजनिक रूप से राजनीतिक मुद्दों पर टिप्पणी कर रहे हैं और संघ का राजनीतिक दखल बढ़ा है।
संघ के विचारक की व्यथा
आरएसएस एक सांस्कृतिक, राष्ट्रवादी संगठन था। इसे पूर्व सरसंघचालक बालासाहब देवरस ने संघ को सामाजिक राजनीतिक संगठन का स्वरूप दिया था, लेकिन सरसंघचालक आरएसएस को राजनीतिक सामाजिक संगठन का रूप देने में लगे हैं। ऐसा 2019 के लोकसभा चुनाव और भाजपा तथा देश के राजनीतिक नेतृत्व की पकड़ ढीली होते देखकर किया जा रहा है।
सूत्र का कहना है कि बाला साहब देवरस ने कहा था अस्पृश्यता यदि पाप है तो दुनिया में कुछ भी पाप नहीं है। उन्होंने आरक्षण के पक्ष में खुद प्रतिनिधि सभा में खड़े होकर पहल की और प्रस्ताव पारित कराया था। देवरस जी का सामाजिक समरसता के प्रति विशेष आग्रह था। लेकिन मौजूदा सरसंघचालक ने आरएसएस की प्रतिनिधि सभा में कहा कि राजसत्ता अविरोधी रहे, यह जरूरी है। इतना ही नहीं सबको सत्ता के अनुकूल बनाए रखने के लिए प्रयास किया।
प्रवीण भाई तोगड़िया जैसे लोगों को संघ से बाहर का रास्ता दिखाया गया। जबकि संघ की यह परंपरा नहीं है। गुरु गोलवरकर का भी सभी दलों से समान व्यवहार आग्रह था, लेकिन वर्तमान में सब बदल रहा है। सरसंघ चालक ईवीएम में मौजूद नोटा बटन पर बोल रहे हैं। वह गुरु जी की किताब को खारिज करके हिन्दुत्व में मुसलमान को समाहित कर रहे हैं।
भाजपा को बेलआउट पैकेज : डा. गौरव वल्लभ
कांग्रेस प्रवक्ता डॉ. गौरव वल्लभ का कहना है कि आरएसएस भाजपा की होल्डिंग कंपनी है। भाजपा उसकी सब्सिडियरी (सिस्टर) कंपनी है। भाजपा इस समय भारी घाटे में चल रही है। 2019 के चुनाव में उसे जनता भारी नुकसना देने वाली है। भाजपा का हिन्दुत्व का एजेंडा भी नहीं चल रहा है। ऐसी स्थिति देखकर सरसंघचालक भाजपा को बेलआउट पैकेज दे रहे हैं।
वह ईवीवीएम मशीन में नोटा बटन के औचित्य पर बोल रहे हैं। वह भारत के संविधान और तिरंगे को स्वीकार रहे हैं। जबकि संघ के संस्थापक डा. केशव बलिराम हेडगेवार ने कहा था कि तिरंगा की बजाय अलग रंग का झंडा उठाओ। गुरु गोलवरकर ने बंच ऑफ थाट्स में मुसलमान को पहला दुश्मन बताया है, लेकिन मोहन भागवत ने बंच ऑफ थाट्स में करेक्शन करते हुए इन्हें खारिज कर दिया है।
डॉ. गौरव वल्लभ का कहना है कि यह सारी तैयारी 2019 को ध्यान में रखकर हो रही है। जब सरदार पटेल ने संघ पर प्रतिबंध लगाया था तो इसने राजनीति से खुद को दूर रखते हुए लिखित में दिया कि यह एक सांस्कृतिक संगठन है। लेकिन संघ कोई पंजीकरण नहीं कराता। ऑडिट नहीं कराता और यह पता नहीं क्या छुपाना चाहता है। इतना ही नहीं कोई सांस्कृतिक रंगारंग भजन कीर्तन का आयोजन भी नहीं करता।