एक ऐसा शख्स जो अरबों डॉलर का बिजनेस चला रहा था और उसने एक अनुभवी राजनीतिक प्रतिद्वंद्वी को अमरीका के सबसे ताकतवर पद की लड़ाई में मात दी। आखिर यह कैसे हुआ, यह सवाल अपने आप में अविश्वनीय लगता है। हालांकि विशेषज्ञ अमरीकी राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रंप के दिमागी हालात को लेकर बहस कर रहे हैं।
दर्जनों लोगों ने ट्रंप की दिमागी स्थिति को लेकर खुला पत्र लिखा था। इन पत्रों में बताया गया था कि ट्रंप भावनात्मक रूप से अस्थिरता की चपेट में हैं और वह इस लिहाज से राष्ट्रपति बनने के योग्य नहीं हैं। ट्रंप की दिमागी स्थिति को लेकर बहस इसके बाद ही शुरू हुई थी। ट्रंप की मानसिक स्थिति को लेकर बहस कोई नई नहीं है।
पिछले साल नवंबर में हुए चुनाव से पहले ट्रंप के दिमागी हालात को लेकर बहस शुरू हो गई थी। हालांकि इस मामले में बहुसंख्यक मनोवैज्ञानिकों ने ट्रंप के दिमागी हालात को लेकर कोई सार्वजनिक बयान जारी करने से परहेज किया।
इस नियम के तहत कोई मनोवैज्ञानिक किसी पर निजी बयान नहीं दे सकता है।
इन मनोवैज्ञनिकों ने 'गोल्डवाटर रूल' का पालन किया और सार्वजनिक रूप से कोई बयान नहीं दिया। इस नियम के तहत कोई मनोवैज्ञानिक किसी पर इस तरह का निजी बयान नहीं दे सकता है। इस नियम के बनने का भी इतिहास है।
एक पत्रिका ने 1964 में रिपब्लिकन उम्मीदवार बैरी गोल्डवाटर को लेकर हजारों विशेषज्ञों से सवाल पूछा था कि क्या वह मनोवैज्ञानिक रूप से राष्ट्रपति बनने के काबिल नहीं हैं। अमरीकन साइकेट्रिक असोसिएशन (एपीए) ने पिछले साल चेतवानी दी थी कि ट्रंप पर इस तरह की टिप्पणी नियमों का उल्लंघन है।
एपीए ने कहा कि था कि राष्ट्रपति चुनाव में किसी उम्मीदवार के मनोविज्ञान का विश्लेषण नहीं किया जा सकता है और अगर ऐसा किया जाता है तो यह नियमों के खिलाफ और गैरजिम्मेदाराना रवैया होगा।
ट्रंप नार्सिसिस्टिक पर्सनैलिटी डिसऑर्डर से पीड़ित हैं।
इसके बावजूद अब कुछ प्रोफेशनल खुलकर बोल रहे हैं। इनमें वे लोग भी शामिल हैं जिन्होंने ट्रंप को हटाने को लेकर एक याचिका पर हस्ताक्षर किया है। इस पर अब तक 23,000 हस्ताक्षर हो चुके हैं। कुछ लोगों का कहना है कि ट्रंप नार्सिसिस्टिक पर्सनैलिटी डिसऑर्डर(एनपीडी) से पीड़ित हैं।
मनोवैज्ञानिकों के मुताबिक इस बीमारी से पीड़ित लोग अक्सर ऐसे व्यवहार करते हैं-
ऐसे लोगों में आडंबर का बोझ होता है। दूसरों को लेकर हमदर्दी नहीं होती है और वे तारीफ की तमन्ना रखे हैं।
उन्हें लगता है कि वे सबसे आगे हैं और उनके साथ बिल्कुल खास व्यवहार होना चाहिए।
वे प्रशंसा पाने और ध्यान आकर्षित कराने को लेकर आमादा रहते हैं। वे आलोचना से परेशान होते हैं और उसे मात देने में लगे रहते हैं।
ट्रंप भावनात्मक रूप से अस्थिरता के शिकार हैं।
इसमें नया क्या है?
न्यूयॉर्क टाइम्स को भेजे एक पत्र में 35 मेटंल हेल्थ प्रोफेशनलों ने चेतावनी दी है कि ट्रंप भावनात्मक रूप से अस्थिरता के शिकार हैं। यह ट्रंप के भाषण और उनकी कार्रवाई में साफ तौर पर झलकता है। ऐसे में इस बात का डर है कि वह राष्ट्रपति की भूमिका सुरक्षित तरीके से नहीं निभा पाएंगे।
इसमें कहा गया है कि गोल्डवाटर रूल के कारण विशेषज्ञ खामोश हैं लेकिन अब उन्हें बोलना चाहिए। इसमें कहा गया है, ''इस चुप्पी का नतीजा नाकामी के रूप में सामने आएगा। हमलोग डरे हुए हैं क्योंकि बहुत कुछ दांव पर लगा है कि और इस मामले में लंबे समय तक चुप नहीं रहा जा सकता।
इस पत्र में लिखा गया है, ''ट्रंप के भाषण और कार्रवाई से साफ है कि असहमति रखने वालों को वह बर्दाश्त नहीं करते हैं। उनके व्यवहार में दूसरों से संवेदना रखने की प्रवृत्ति बिल्कुल नहीं है।''