कांग्रेस पार्टी के पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी और महासचिव प्रियंका गांधी वाड्रा को यूपी बॉर्डर से वापस लौटा दिया जाता है। दिल्ली में जंतर-मंतर पर पहुंचे विपक्षी नेताओं के खिलाफ पुलिस मामला दर्ज कर देती है। शनिवार को जब दोबारा से राहुल और प्रियंका अपने 35 सांसदों के साथ यूपी बॉर्डर पर पहुंचते हैं तो उनमें से केवल पांच लोगों को हाथरस जाने की इजाजत मिलती है। तर्क ये दिया जा रहा है कि ऐसा इसलिए क्योंकि मौजूदा समय में कोविड-19 के चलते केंद्र सरकार ने महामारी कानून 1897 लागू कर रखा है।
दरअसल एक अक्तूबर से जो गाइडलाइन लागू हुई हैं, उनमें विशेषकर धारा 144 और 188 का जिक्र किया गया है। इसके तहत यह प्रावधान है कि सरकार द्वारा दिए गए निर्देशों का कोई व्यक्ति उल्लंघन करता है, तो उस पर भारतीय दंड संहिता की धारा 188 के तहत कानूनी कार्रवाई की जाएगी। इसके साथ ही धारा 144 भी लगाई गई है। इतना ही नहीं, आपदा प्रबंधन अधिनियम, 2005 की धारा 51 से लेकर 60 तक अन्य लोगों के साथ-साथ सरकारी ड्यूटी वालों के लिए भी नियम तय किए गए हैं। इसमें लोकल प्रशासन, जिसमें पुलिस भी शामिल है, उन्हें आदेशों का पालन करना होगा। अगर कोई कर्मचारी या अधिकारी, अपनी ड्यूटी में कोताही बरतता है तो उसे दो साल तक की सजा और जुर्माना, दोनों भुगतने पड़ सकते हैं।
क्या-क्या खास है नई गाइडलाइंस में
देश में एक अक्तूबर से अनलॉक 5.0 लागू हुआ है। केंद्रीय गृह मंत्रालय ने जो गाइडलाइंस जारी की हैं, उनमें केंद्र सरकार ने सभी राज्यों को कठोर हिदायत दी है कि वे किसी भी तरह से इन गाइडलाइन में बदलाव न करें। सोशल डिस्टेंसिंग को बनाए रखने के लिए राज्य, सेक्शन 144 सीआरपीसी 1973 का इस्तेमाल कर सकते हैं। इसके बावजूद राज्य में गाइडलाइन का पालन संभव नहीं हो पाता है, तो संबंधित प्रदेश की सरकार वह उल्लंघन रोकने के लिए आपदा प्रबंधन अधिनियम, 2005 के तहत कार्रवाई कर सकती है। उल्लंघन करने वालों के खिलाफ सेक्शन 188 आईपीसी के तहत सख्त एक्शन लेने का भी प्रावधान रखा गया है।
सरकारी अधिकारी, कर्मचारी, विभिन्न संगठन, कामगार और सामान्य नागरिक केंद्र सरकार की गाइडलाइन का पालन करें, इसके लिए सख्त प्रावधान किए गए हैं। यदि कोई व्यक्ति या संस्था, गाइडलाइन का उल्लंघन करती है तो उसे अपराध माना जाएगा। इसके लिए उन्हें जेल की सजा और आर्थिक दंड, दोनों का सामना करना पड़ सकता है। आपदा प्रबंधन अधिनियम, 2005 की धारा 51 से लेकर 60 तक सरकारी ड्यूटी वालों के लिए नियम तय किए गए हैं। इसमें स्थानीय प्रशासन, जिसमें पुलिस भी शामिल है, उन्हें उक्त नियमों का पालन करना होगा।
अगर कोई कर्मचारी या अधिकारी, अपनी ड्यूटी में कोताही बरतता है तो उन्हें दो साल की सजा और जुर्माना, दोनों भुगतने पड़ सकते हैं। कोई भी व्यक्ति, सरकारी या गैर सरकारी संस्था, इनका उल्लंघन करती है तो उसके खिलाफ कार्रवाई की जाती है। कोरोना संक्रमण के बाद देश में धारा 188 लागू कर दी गई थी। 1897 के महामारी कानून के सेक्शन 3 में इस बात का जिक्र किया गया है कि अगर कोई व्यक्ति इन प्रावधानों का उल्लंघन करता है, सरकार द्वारा बनाए गए कानूनों या निर्देशों की अवहेलना करता है तो उसके खिलाफ आईपीसी की धारा 188 के तहत कार्रवाई हो सकती है।
यदि कोई व्यक्ति सरकारी कर्मचारी द्वारा दिए गए निर्देशों का उल्लंघन करता है तो भी उसके खिलाफ इस धारा का इस्तेमाल किया जा सकता है।किसी के ऊपर ये धारा लगाने और कानूनी कार्रवाई करने के लिए ये जरूरी नहीं कि उस व्यक्ति द्वारा तोड़े गए नियम से किसी का नुकसान हुआ है या नहीं। अगर उस व्यक्ति को सरकार द्वारा जारी उन निर्देशों की जानकारी है, जिनमें कहा गया है कि ये कार्य उल्लंघन की श्रेणी में आएगा, इसके बाद भी वह उल्लंघन करता है तो धारा 188 के तहत कानूनी कार्रवाई की जा सकती है। आईपीसी की धारा 188 में दो प्रावधान हैं। एक, आप सरकार या किसी सरकारी अधिकारी द्वारा कानूनी रूप से दिए गए आदेशों का उल्लंघन करते हैं। आपकी किसी हरकत से कानून व्यवस्था में लगे शख्स को नुकसान पहुंचता है, तो आपको कम से कम एक महीने की जेल या 200 रुपये जुर्माना या दोनों की सजा दी जा सकती है।
दूसरा, अगर आपके द्वारा सरकार के आदेश का उल्लंघन किए जाने से मानव जीवन, स्वास्थ्य या सुरक्षा आदि को कोई खतरा पैदा होता है, तो आपको कम से कम 6 महीने की जेल या 1000 रुपये जुर्माना या दोनों की सजा दी जा सकती है। क्रिमिनल प्रोसीजर कोड 1973 के पहले शेड्यूल के अनुसार, इन दोनों ही स्थितियों में जमानत मिलने का प्रावधान है। यह कार्रवाई किसी भी मैजिस्ट्रेट द्वारा की जा सकती है। राहुल गांधी को यूपी बॉर्डर से वापस लौटाना, उनके ख़िलाफ केस दर्ज करना, या पांच आदमियों को हाथरस जाने की इजाजत देना और जंतर मंतर पर एकत्रित लोगों के ख़िलाफ मामला दर्ज करना, ये सब कोविड-19 के बचाव के लिए जारी आदेशों में शामिल है।