फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

बकरी-कुतिया से सेक्स क्यों करते हैं लोग? डॉक्टर मानते हैं मानसिक बीमारी

Wed, 01 Aug 2018 12:30 PM IST
अमित शर्मा, नई दिल्ली
विज्ञापन
मानसिक रोगी (प्रतीकात्मक चित्र)
विज्ञापन
हरियाणा के मेवात में कुछ युवकों द्वारा एक बकरी के साथ सामूहिक दुष्कर्म करने का मामला सुर्खियों में है। इसके पहले भी हैदराबाद और मुंबई में कुतिया के साथ सेक्स करने की घटनाएं सामने आई थीं। जहां सामान्य लोग इस बात पर यकीन ही नहीं कर पाते कि कोई इंसान जानवरों के साथ शारीरिक संबंध भी बना सकता है, वहीं डॉक्टर इसे एक गंभीर मानसिक बीमारी मानते हैं जिसका इलाज किया जा सकता है। 
विज्ञापन


जानवरों के साथ सेक्स क्यों करते हैं लोग

दिल्ली के बीएलके अस्पताल के मनोचिकित्सक डॉ. मनीष जैन के मुताबिक यह बहुत असामान्य तरीके की बीमारी है जो बहुत कम ही लोगों में देखने को मिलती है। एब्नॉर्मल सेक्सुअल एक्टीविटीज की बीमारी को पैरीफीलिया कहते हैं। इसी का एक तरीका 'बेस्टीएलिटी' यानी जानवरों के साथ सेक्स होता है। इसमें सैडिस्ट प्रकृति के इंसान किसी जानवर के साथ सेक्सुअल व्यवहार करते हैं। 

डॉ. जैन के मुताबिक ऐसी बीमारी के शिकार अक्सर वही लोग होते हैं जिनका बचपन में सेक्सुअल शोषण हुआ होता है, या उनका हिंसक तरीके से अपमान हुआ होता है। ऐसे लोग अपने उसी मनोविकार को इस तरीके से निकालने की कोशिश करते हैं। इस वर्ग में ऐसे भी लोग हो सकते हैं जो गंभीर यौन इच्छा की भावना रखते हैं और उसकी सामान्य तरीके से पूर्ति नहीं कर पाते हैं। 
विज्ञापन


डॉक्टर जैन के मुताबिक यह जरुरी नहीं कि इस तरह के लोग सिर्फ असामान्य तरीके से ही सेक्स की आवश्यकता पूरी करते हों। ऐसे भी लोग हो सकते हैं जो सामान्य तरीके से वैवाहिक जीवन भी व्यतीत कर रहे हों और इसके साथ ही बेस्टीएलिटी का भी शिकार हों, यानी जानवरों के साथ भी सेक्स करते हों। अपने पालतू जानवरों के जननांगों को छूना भी इसी बीमारी की बहुत कम गंभीर प्रकृति मानी जाती है। 

अश्लील वीडियो से भी आती है सेक्सुअल फैंटेसी

सेक्सुअल फैंटेसी भी कारक

कुछ विशेषज्ञों के मुताबिक आज बाजार में अश्लील वीडियो की भरमार है। इनमें जानवरों के साथ सेक्स करते हुए वीडियो भी मिलते हैं। ऐसे में इस बात की भी संभावना है कि कुछ लोग ऐसे वीडियो देखकर सेक्सु्अल फैंटेसी के रुप में पशुओं के साथ संभोग को आजमाते हों।

हालांकि डॉ जैन इससे सहमत नहीं हैं। उनके मुताबिक हम केवल उन्हीं चीजों के प्रति आकर्षित होते हैं जिनके प्रति पहले से ही हमारा लगाव होता है। एक ही फिल्म को देखने के बाद अलग-अलग लोगों का अलग-अलग किरदारों को पसंद करना यही बताता है कि हम कुछ ही चीजों के प्रति आकर्षित होते हैं और उन्हें ही आजमाने की कोशिश करते हैं, जबकि दूसरी तरह की चीजों के प्रति हमारे मन में बुरा भाव पैदा होता है। इसी तरह बेस्टीएलिटी के बीज भी कहीं न कहीं इंसान के मन में छिपे होते हैं जो इस तरह से सामने आते हैं।

इनका इलाज संभव है

डॉ. मनीष जैन ने बताया कि ऐसे मरीजों को दो तरीके से ठीक किया जाता है। सबसे पहले तो उन्हें उनकी इस बीमारी का एहसास कराया जाता है। काउंसलिंग के जरिये इन्हें सामान्य व्यवहार के तरीके पर लाने की कोशिश की जाती है, वहीं कुछ दवाइयों के जरिये इनके आक्रामक व्यवहार को सामान्य करने की कोशिश की जाती है। उनके अनुसार इस बीमारी के शिकार लोगों का समुचित इलाज किया जा सकता है। 
विज्ञापन

जानवरों से सेक्स एक गंभीर अपराध

गंभीर अपराध है पशुओं के साथ सेक्स

यहां यह जानना रोचक हो सकता है कि कुछ आदिवासी जनजाति के समुदायों में पशुओं के साथ सेक्स को यौन बीमारियों को ठीक करने के इलाज के रुप में भी देखा जाता है। हालांकि, ज्यादातर देशों में जानवरों के साथ सेक्स करना गंभीर अपराध माना जाता है जहां बेस्टीएलिटी के मामले में दो वर्ष से लेकर कई वर्षों की सजा हो सकती है।

हालांकि हंगरी और फिनलैंड जैसे देशों में यह अब भी अपराध नहीं माना जाता है। ब्रिटेन में इस मामले में आजीवन कारावास का प्रावधान था जिसे हाल ही में घटाकर दो साल कर दिया गया है।

भारत में पशुओं के साथ सेक्स को अप्राकृतिक सेक्स के रुप में अपराध माना जाता है। ऐसे मामलों को पुलिस आईपीसी की धारा 377 (समलैंगिकता की तरह अपराध) के तहत दर्ज करती है। धारा 377 में आरोप सिद्ध होने पर आजीवन कारावास या 10 वर्ष तक की जेल हो सकती है। समलैंगिक लोग इसी धारा को अपने जीवन के अधिकार के तहत इसे खत्म करने की मांग कर रहे हैं।
और पढ़ें...
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें